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इस समय मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ टीवी के पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए जन्नत बन गए हैं

उत्‍तर प्रदेश की तरह मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में भी चैनल्‍स के बीच कड़ी प्रतिस्‍पर्धा है.. हाल ही में मैदान में कूदे स्‍थापित समूहों के चैनल्‍स ने इस स्‍पर्धा की जलती आग में और घी डाला है.. जी चौबीस घंटे ने छत्‍तीसगढ़ और आईबीसी 24 ने मध्‍यप्रदेश में अपने अपने प्रतिस्‍पर्धियों को चौकन्ना कर दिया है.. इस समय मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ टीवी के पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए जन्नत  बन गए हैं..

उत्‍तर प्रदेश की तरह मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में भी चैनल्‍स के बीच कड़ी प्रतिस्‍पर्धा है.. हाल ही में मैदान में कूदे स्‍थापित समूहों के चैनल्‍स ने इस स्‍पर्धा की जलती आग में और घी डाला है.. जी चौबीस घंटे ने छत्‍तीसगढ़ और आईबीसी 24 ने मध्‍यप्रदेश में अपने अपने प्रतिस्‍पर्धियों को चौकन्ना कर दिया है.. इस समय मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ टीवी के पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए जन्नत  बन गए हैं..

हालत यह है कि जूनियर लेवल पर अनुभव का ठप्‍पा लगा  कर बाजार में सीवी लेकर घूमने वालों को भी बुला बुला कर नौकरी दी जा रही है.. आलम यह है कि कई लोग तो जेब में दो-दो तीन तीन नियुक्ति पत्र लेकर घूम रहे हैं.. मध्‍यप्रदेश में सहारा की तो छत्‍तीसगढ़ में आईबीसी की बढ़त कायम है..

हालांकि छत्‍तीसगढ़ में आईबीसी (पुराना नाम जी चौबीस घंटे) को बदली हुई परिस्थितियों में बंसल और कुछ चैनलों ने मात देते हुए एक या दो हफ्ते तक नंबर वन का खिताब हॉसिल करते हुए बढ़त बनाई थी लेकिन जल्‍द ही आईबीसी ने फिर अपना जलवा बिखेरते हुए सबको पीछे छोड़ दिया.. छत्‍तीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश की इस बार की टीआरपी के आंकड़े बताते हैं कि प्रतिस्‍पर्धा कितनी धारदार और कठिन होती जा रही है.. हालांकि मप्र में सहारा के सामने अभी तक कोई चैनल चुनौती नहीं बन पाया है.. लेकिन नंबर दो के लिए जबर्दस्‍त संघर्ष नजर आता है.. मप्र में इस बार भी सहारा नंबर वन है तो नंबर दो पर बंसल न्‍यूज है.. ई टीवी नंबर तीन और इंडिया न्‍यूज नंबर चार पर है.. इंडिया न्‍यूज नंबर दो के स्‍थान के लिए ईटीवी और बंसल के लिए कड़ी चुनौती बन गया है..

बीते दो-तीन हफ्ते इंडिया न्‍यूज नंबर दो रहा था.. सहारा की तरह छत्‍तीसगढ में आईबीसी अपने प्रतिस्‍पर्धियों से बहुत आगे हैं लेकिन नंबर दो के लिए कड़ी चुनौती है.. इंडिया न्‍यूज नंबर दो पर है और बंसल न्‍यूज तीसरे स्‍थान पर.. छत्‍तीसगढ़ में हालात कितने कठिन है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मप्र में टॉप पर रहने वाला सहारा वहां लंबे समय से पांचवें और छठे सथान पर ही बना हुआ है..

छत्‍तीसगढ़ में बीच बीच में धूमकेतु की तरह उभरने वाले चैनल साधना और खबर भारती भी टीआरपी का सारा गणित बिगाड़ देते हैं.. मप्र इन दिनों नए टीवी चैनल्‍स की खान बना हुआ है.. एक्‍सप्रेस समूह और राज एक्‍सप्रेस जल्‍द ही अपना चैनल शुरू कर रहे हैं.. कुछ अंजान समूह भी चैनल लाने की तैयारी में हैं… ऐसे में नौकरियों की भरमार है और टीवी कर्मचारियों के सर कढ़ाई में……

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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