Israr Ahmed Sheikh : मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों पर आज तक का स्टिंग आपरेशन चैनल की निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े करता है। पहली नज़र में ये एक रहस्योद्घाटन लगता है। मगर थोड़ा दिमाग़ पर ज़ोर डालने से ये पूरी तरह प्रायोजित और एकतरफ़ा लगता है। मैं शुरु से ये बात कहता रहा हूँ कि से दंगे समाजवादी पार्टी और बीजेपी की मिलीजुली साज़िश का हिस्सा हैं। मगर इस स्टिंग में बीजेपी के चारों विधायकों को साफ़ बचाने की कोशिश की गई। दंगों के आधे दोषियों की तरफ़ से ध्यान हटाने की कोशिश की गई है। कुछ सवाल हैं जो स्टिंग को देखकर दिमाग़ में आते हैं।
1. क्या आज तक के पास आज़म नाम के शख़्स के बारे में पुख़्ता जानकारी थी?
2. अगर हाँ तो उस जानकारी का आधार क्या था? अगर नहीं तो रिपोर्टर ने वो ही नाम क्यों लिया? सा उन्हें आकाशवाणी हुई थी?
3. क्या इन दंगों में बीजेपी के चार विधायकों और कार्यकर्ताओं का कोई हाथ नहीं है? अगर चैनल को लगता है कि नहीं है तो मुझसे सम्पर्क करें, मैं मोबाइल नम्बर और नाम के साथ इनके ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत दे सकता हूँ।
4. क्या इस प्रायोजित स्टिंग से ध्रुवीकरण बढ़ाने की कोशिश नहीं की गई है?
5. पूरा मुज़फ़्फ़रनगर जानता है कि ये दंगे दोनों पार्टियों की मिलीभगत का नतीजा है, फिर एक पार्टी को वो किसके इशारे पर बचा रहे हैं?
मुझे लगता है इस स्टिंग आपरेशन के ज़रिये बीजेपी को बचाने और मुसलमानों के बीच आज़म ख़ान को हीरो बनाने जैसी घिनौनी साज़िश है। दरअसल आज़म ख़ान बीजेपी के लिए पारस का पत्थर है। वो जितना आज़म ख़ान को घिसेंगे, उतना ही उन्हें वोट रूपी सोना मिलेगा।
इसरार अहमद शेख के फेसबुक वॉल से.






