: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार से पीड़ित एक विभाग का इलाज करने के लिए किसान नेता ने लिखा पत्र : प्रति, श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय, (मंत्री-सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन और जनसेवा मंत्रालय), उत्तराखंड शासन, देहरादून. महोदय, उत्तराखंड सरकार लगातार ये घोषणा करती रही है कि उत्तराखंड प्रदेश को ‘हर्बल स्टेट’ यानि जड़ी-बूटी प्रदेश बनाना सरकार के प्राथमिकताओं में है. इस तरह भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने को भी आपकी सरकार ने अपनी प्राथमिकता बताया है. परन्तु जड़ी-बूटी के क्षेत्र में जो सब कुछ चल रहा है, उससे तो इसमें संदेह है कि प्रदेश-हर्बल स्टेट बन पायेगा और शासन भ्रष्टाचार मुक्त हो, इस प्रयास पर भी पलीता लग रहा है.
महोदय, देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में सगंध पादप केंद्र (Centre for Aromatic Plants-C.A.P) है. ये केंद्र लंबे अरसे से अपने दायित्वों से इतर बातों और कामों के लिए चर्चा में रहा है.इन तमाम चर्चाओं का कारण इस केंद्र में वैज्ञानिक प्रभारी के तौर पर तैनात श्री नृपेन्द्र चौहान हैं. महोदय ये एक अन्य महिला कार्मिक डा.हेमा लोहनी के साथ 2008 में तीन वर्ष के लिए उक्त केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हुए थे. (वैसे उससे पहले भी ये दोनों वर्ष 2001 से इसी केंद्र में जमे हुए थे) इन दोनों की प्रतिनियुक्ति कितनी विवादास्पद थी, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि 2006 में शुरू हुई प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया 2008 में पूरी हो सकी. दो साल तक इनकी फाइल उद्यान, कार्मिक और वित्त विभाग के बीच घूमती रही. जहाँ कार्मिक विभाग ने इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को ही ‘छद्म’ और व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने वाली करार दिया था, वहीँ वित्त विभाग ने ये कहते हुए कि “प्रतिनियुक्ति द्वारा नियुक्ति तो सामान वेतनमान वाले पद पर होती है”, इन्हें मूल पद के वेतनमान से दो वेतनमान ऊपर वाले पद पर प्रश्न उठाये थे. बहरहाल कार्मिक और वित्त विभाग के तमाम प्रश्न-चिन्हों के बावजूद श्री नृपेन्द्र चौहान और डा.हेमा लोहनी सगंध पादप केंद्र में प्रतिनियुक्ति पाने में कामयाब रहे. सगंध पादप केंद्र के प्रभारी के तौर पर सगंध पादपों की खेती को प्रोत्साहित करने से ज्यादा श्री चौहान ने स्वयं के लिए अधिकतम लाभ अर्जित करने में ज्यादा रूचि दिखाई. इसी के नतीजे के तौर पर ये हुआ कि जिन कार्यों के लिए इन्हें वेतन मिलता था, उन कार्यों के लिए भी इन्होंने किसानों से परामर्श शुल्क (consultancy fees) वसूल कर उसे अपने और अपने सहयोगियों के बीच बाँट लिया. महोदय, सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत प्राप्त दस्तावेजों से ज्ञात हुआ कि किसानों से परामर्श शुल्क के रूप में लिए गए ग्यारह लाख चौबीस हज़ार छ:सौ इकतालीस रुपये में से चार लाख बासठ हज़ार नौ सौ सत्तर रुपये, श्री नृपेन्द्र चौहान और डा.हेमा लोहनी ने आपस में बाँट लिए, जो कि भ्रष्ट आचरण ही कहा जायेगा.
श्री नृपेन्द्र चौहान पर सगंध पादपों की खेती करने वाले किसानों द्वारा ही समय-समय पर ये आरोप लगाया जाता रहा है कि श्री चौहान ने उन्हें इस बात के लिए मजबूर किया कि किसान पौधों की खरीद सतीश कुमार की नर्सरी से ही करें.सतीश कुमार की नर्सरी में किसानों को सरकारी दर से पांच गुना अधिक दर पर पौध बेची गयी जिससे उक्त नर्सरी मालिक को लाखों रुपये का लाभ हुआ.उक्त सतीश कुमार के बारे में बताया गया है कि वो श्री नृपेन्द्र चौहान का भाई है.
महोदय, समाचार पत्रों में ये प्रकाशित हो चुका है और मुझे भी कतिपय किसानों ने बताया कि उन्होंने शपथ पत्र पर उद्यान विभाग में शिकायत की है कि सगंध पादपों की खेती के लिए उनसे परामर्श शुल्क वसूलने के बाद खेती के लिए उनकी नाम पर बैंक से कर्ज स्वीकृत कराये गए और किसानों के नाम पर स्वीकृत कर्ज के लाखों रुपये श्री चौहान की मिलीभगत से सतीश कुमार तथा कुछ अन्य ऐसी नर्सरियों को भुगतान कर दिए गए जो धरातल पर तो मौजूद नहीं हैं,परन्तु जिनके बैंक खाते जरुर मौजूद हैं.महोदय,किसानों के साथ ऐसी धोखाधड़ी और सिर्फ बैंक खातों में मौजूद नर्सरियों से प्रदेश के ‘हर्बल स्टेट’ बनने की कल्पना तो आप भी नहीं करते होंगे.
इसके अलावा फर्जी व्यक्तियों के नाम ऋण स्वीकृत कराने,मनमानी नियुक्तियां करने जैसे तमाम आरोप, जिनके पुख्ता सबूत भी हैं, श्री चौहान पर लगते रहे हैं.सूचना अधिकार कानून के जरिये यह जानकारी भी प्राप्त हुई है कि श्री नृपेन्द्र चौहान और डा.हेमा लोहनी की प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने पर प्रतिकूल टिपण्णी करते हुए, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान, गोपेश्वर के निदेशक ने लिखा था कि श्री चौहान और डा.हेमा लोहनी ने अपनी क्षमताओं को उच्च विशेषज्ञता वाले कार्य के अनुरूप उन्नत नहीं किया और प्रतिनियुक्ति अवधि में इनके कार्य औसत ही रहे.महोदय,औसत कार्यक्षमता और भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बावजूद भी श्री चौहान और डा.हेमा लोहनी की प्रतिनियुक्ति अवधि में विस्तार,क्या कुछ गंभीर गडबडी की ओर इशारा नहीं करता है?
महोदय, श्री नृपेन्द्र चौहान के विरुद्ध किसानों के अलावा सेवानिवृत्त पी.सी.एस. अधिकारी श्री नत्थी सिंह तोमर, आपकी पार्टी-भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, यहाँ तक कि गढ़वल मंडल विकास निगम के उपाध्यक्ष श्री रघुनाथ सिंह नेगी ने भी उद्यान मंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यसचिव एवं मुख्यमंत्री महोदय को भी शिकायत की. परन्तु आश्चर्य है कि इतनी शिकायतों के बावजूद श्री नृपेन्द्र चौहान के खिलाफ कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई. उद्यान मंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी तो लगता है कि श्री नृपेन्द्र चौहान के विरुद्ध किसी तरह की कार्यवाही नहीं होने देना चाहते हैं. सूचना अधिकार कानून का प्रयोग करके ही एक ऐसा पत्र भी प्राप्त हुआ जिसमे श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी द्वारा विभागीय सचिव को निर्देशित किया गया है कि सचिव श्री नृपेन्द्र चौहान की अनियमित्ताओं के सन्दर्भ में अगले दो माह तक श्री चौहान से कोई सवाल न पूछें.महोदय कोई अधिकारी किन्ही मंत्री महोदय को कितने ही प्रिय क्यूँ ना हों, उक्त अधिकारी से सवाल तक ना पूछने का निर्देश जारी करना, न केवल अपने अधिकारों व शक्तियों का गलत उपयोग है वरन स्वच्छ एवं पारदर्शी शासन(लोकतंत्र में जो किसी भी सरकार का दायित्व होना ही चाहिए) की राह में भी बाधा है.
महोदय, यह ज्ञात हुआ था कि उद्यान विभाग के सचिव श्री विनोद फोनिया,सगंध पादप केन्द्र में चल रहे भ्रष्टाचार की रोकथाम की कोशिश कर रहे हैं तथा उनकी द्वारा श्री नृपेन्द्र चौहान के कार्यों की जांच करवा कर,उन्हें आरोप पत्र भी देने जा रहे हैं.लेकिन फिर यह समाचार मिला कि श्री विनोद फोनिया को उद्यान विभाग से अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है.महोदय शासन के किसी भी कार्मिक का स्थानांतरण,शासन का विशेषाधिकार है,उसमें कोई दखलंदाजी उचित नहीं है.परन्तु जब एक भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारी का बाल भी बांका नहीं होता और ऐसे अधिकारी की जांच करने वाले अधिकारी का ही तबादला हो जाता है तो संदेह पैदा होना तथा नीति और नीयत पर सवाल उठाना लाज़मी है.
महोदय,उक्त तमाम बातों के आलोक में राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते और साफ़ सुथरे शासन के लिए आप ही के द्वारा बनाये गए मंत्रालय-सुराज,भ्रष्टाचार उन्मूलन और जनसेवा के भी मंत्री होने के नाते आप से ये मांग है कि सगंध पादप केंद्र के वैज्ञानिक प्रभारी श्री नृपेन्द्र चौहान के कार्यों के कार्यों की उच्च स्तरीय, समयबद्ध जांच की जाये, उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्यवाही अमल में लायी जाये और उन्हें व डा.हेमा लोहनी की प्रतिनियुक्ति निरस्त कर, उनके मूल विभाग में वापस भेजा जाये.साथ ये भी जांच की जाए कि उद्यान मंत्री श्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा क्यूँ उद्यान सचिव को श्री चौहान के विरुद्ध जांच करने से रोका गया.महोदय,जांच का विषय तो यह भी है कि किसानों और आपकी पार्टी के नेताओं की शिकायत के बावजूद भी श्री नृपेन्द्र चौहान के विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यूँ नहीं हो सकी? महोदय, आशा है कि प्रदेश के किसानो के हित में तथा स्वच्छ,पारदर्शी शासन सुनिश्चित हो, इसलिए आप इस पत्र में उठाये गए बिंदुओं पर अवश्य कार्यवाही करेंगे. इस पत्र में उठाये गए तमाम बिंदुओं के साक्ष्य, जांच के लिए प्रस्तुत करने को कहा जायेगा तो कर दिए जायेंगे.
उचित कार्यवाही की आशा में,
सहयोग का आकंक्षी
इन्द्रेश मैखुरी
प्रदेश उपाध्यक्ष
अखिल भारतीय किसान महासभा
पोस्ट बॉक्स-21 श्रीनगर (गढ़वाल)





