मेरे रुम पार्टनर की उंगली कटकर बस अलग नहीं हुई थी, अटककर रह गई थी. हम उन्हें लेकर पहले तो पहुंचे डीयू हेल्थ सेंटर लेकिन उन्होंने सीधे हिन्दूराव भेज दिया. हम वैसे तो हिन्दूराव से पहले कई बार गुजर चुके थे और एक बार एडमिट भी लेकिन हमें पहली बार पता चला कि यहां की क्या हालत है ? अंदर जो चढ़कर त्वाडी, थारे, मैनु टाइप से बात कर ले रहा हो, उसे पहले एटेंड कर लिया जाता और जो सामान्य तरीके से अपनी बात बताता, कोई पूछने-जाननेवाला नहीं.
खैर, खून लगातार बह रहा था और एटेंडेंट ने बताया कि टांके लगेंगे. हम डॉक्टर का इंतजार करने लगे..और इंतजार करते-करते कब एक ऐसे शख्स ने चीनी की बोरी की तरह पार्टनर की उंगल की सिलाई कर दी, पता ही नहीं चला. वो तो जब उनके चीखने की आवाज आयी तो हम अंदर गए और देखा तो वो शख्स खींचकर धागा तोड़ रहा है. हमने कहा, रहने दीजिए.जब हमें पहले पता होता कि आप ही रफ्फूगिरी करोगे तो खुद ही कर लेते. हिन्दूराव उत्तरी दिल्ली के बेहतरीन सरकारी अस्पतालों में से है.
मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.





