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उत्‍तराखंड में बागियों ने बिगाड़ा भाजपा-कांग्रेस का चुनावी गणित

नैनीताल। उत्‍तराखण्ड में बागियों ने कांग्रेस और भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है। राज्य का मुख्यमंत्री बनने को लालायित कांग्रेस और भाजपा के क्षत्रपों के टिकट बंटवारे में अपने खासों को तरजीह देने की वजह से दोनों पार्टियों के भीतर पनपा असन्तोष राज्य की सत्‍ता में काबिज होने के भाजपा और कांग्रेस के मंसूबों में पानी फेर सकता है। टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री का ख्वाब पाले अघोषित दावेदारों के बीच चली शांतिपूर्ण खींचतान के कारण दोनों पार्टियों को कार्यकर्ताओं के जबरदस्त गुस्से और बगावत का सामना करना पड़ रहा है।

नैनीताल। उत्‍तराखण्ड में बागियों ने कांग्रेस और भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है। राज्य का मुख्यमंत्री बनने को लालायित कांग्रेस और भाजपा के क्षत्रपों के टिकट बंटवारे में अपने खासों को तरजीह देने की वजह से दोनों पार्टियों के भीतर पनपा असन्तोष राज्य की सत्‍ता में काबिज होने के भाजपा और कांग्रेस के मंसूबों में पानी फेर सकता है। टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री का ख्वाब पाले अघोषित दावेदारों के बीच चली शांतिपूर्ण खींचतान के कारण दोनों पार्टियों को कार्यकर्ताओं के जबरदस्त गुस्से और बगावत का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य की करीब एक दर्जन से अधिक सीटों पर कांग्रेस को बागी उम्मीदवारों की तगडी़ चुनौतियों से दो-चार होना पड़ रहा है। कांग्रेस से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे ज्यादातर पूर्व कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों की नींद उडा़ दी है। नैनीताल जिले की लालकुंआ विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस के पूर्व विधायक हरीश चन्द्र दुर्गापाल बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में डट गये हैं। हरीश चन्द्र दुर्गापाल जमीन से जुड़े कर्मठ तथा ईमानदार बुजुर्ग कांग्रेसी नेता हैं। वे पिछले पचपन सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। इंदिरा गॉधी के जेल भरो आन्दोलन से लेकर दूसरे कई जन-आन्दोलनों में जेल गये हैं। कांग्रेस के प्रति निष्ठा और बेदाग छवि के चलते उनकी अपने क्षेत्र में तगडी़ पकड़ है। कांग्रेस ने अबकी इस वरिष्ठ नेता को टिकट नहीं दिया। लिहाजा वे कांग्रेस को अलविदा कह बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव मैदान में कूद पड़े है। इस सीट पर चुनावी लड़ाई दुर्गापाल और भाजपा के बीच सिमटती नजर आ रही है।

उधर जिले की कालाढू़गी विधानसभा सीट पर प्रदेश कांग्रेस महासचिव पद से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे महेश शर्मा ने कांग्रेस को खासी मुसीबत में डाल दिया है। हरिद्वार से पूर्व विधायक अमरीश कुमार रानीपुर सीट से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। रूद्रप्रयाग सीट में नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत को अपने सगे साढू भाई भाजपा प्रत्याशी मातवर सिंह कण्डारी के साथ-साथ अपनी पार्टी के दो बागी उम्मीदवारों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यहॉ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव विरेन्द्र सिंह और भरत सिंह चौधरी चुनाव मैदान में डटे है। देवप्रयाग सीट में कांग्रेस से बगावत कर मंत्री प्रसाद नैथानी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में है। हरिद्वार ग्रामीण सीट में श्रीकान्त वर्मा, सहसपुर से गुलजार अहमद, रायपुर से पंकज क्षेत्री, ऋषिकेश से दीपा शर्मा, डोईवाला से एस.पी. सिंह और धनोल्टी से कांग्रेस नेता जोत सिंह बिष्ट बागी बनकर कांग्रेस को ही चुनौती दे रहे हैं।

बगावत के मामले में अबकी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस को पछाड़ दिया है। टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा के चार विधायक, एक दायित्वधारी समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा छोटे-बडे़ नेता बागी हो गये है। भाजपा से टिकट कट जाने के बाद विधायक केदार सिंह फोनिया रक्षा मोर्चा के टिकट पर बदरीनाथ से चुनाव मैदान में कूद पड़े है। विधायक गोविन्द लाल साह थराली से, अनिल नौटियाल कर्णप्रयाग से, राजकुमार पुरोला से और दायित्वधारी आदित्य कोठारी नरेन्द्र नगर से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। वहीं अल्मोडा़ से पूर्व विधायक कैलाश शर्मा बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। इनमें से कई बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों पर भारी नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों को अबकी चुनाव में कई सीटों में जबरदस्त भीतरधात का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसी सूरत में चुनावी नतीजे क्या होंगे, यह कह पाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। 

नैनीताल से प्रयाग पांडेय की रिपोर्ट.

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