साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष तथा दस्तावेज के संपादक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ की उपेक्षा की तरफ उनका ध्यान आकृष्ट कराया है. श्री तिवारी ने सीएम को लिखे गए पत्र में कहा है कि पिछली मायावती सरकार के कार्यकाल के दौरान हिंदी संस्थान की उपेक्षा तो की ही गई, कई पुरस्कारों को भी समाप्त कर दिया गया.
वे आगे लिखते हैं कि इन पुरस्कारों को समाप्त करने का कोई कारण तो नहीं बताया गया परन्तु कहा जाता है कि इन पुरस्कारों में दीनदयाल उपाध्याय, राममनोहर लोहिया, मधु लिमये जैसे का नाम होने चलते या फिर दलित लेखकों की संख्या कम होने के चलते इन पुरस्कारों को रद्द किया गया. उन्होंने सीएम से इस संदर्भ में उचित कदम उठाने की मांग की है. नीचे विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा सीएम को लिखा गया पत्र.








