इलाहाबाद। जिस दिन जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों को लेकर केंद्र सरकार देश की राजधानी दिल्ली में रेप के मामले में सख्त सजा देने की सिफारिश कर रही थी। उसी दिन सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले इलाहाबाद में पहली जनवरी का दिन काला दिन साबित हुआ। रेप और छेड़खानी की चार शर्मनाक वारदातें हुईं। पहली घटना यमुनापार के शंकरगढ़ इलाके की है। घोंद गांव के पास जंगल में लकड़ी बीनने गई कोल जाति की एक आदिवासी किशोरी के साथ एक दबंग टाइप के युवक ने बलात्कार के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
भुक्तभोगी किशोरी कक्षा ग्यारह की छात्रा है। शर्मनाक पहलू यह कि किशोरी की मां, भाभी और पड़ोस की एक महिला के सामने दुराचार किया गया। महिलाओं के विरोध करने पर किशोरी की मां और भाभी को लहूलुहान कर दिया गया। घटना से आक्रोशित सैकड़ों महिला-पुरुषों ने देर रात तक शंकरगढ़ थाने का घेराव कर पुलिस से न्याय की फरियाद की। एसपी यमुनापार लल्लन राय और सीओ बारा ने थाने पहुंचकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। अफसरों के आश्वासन पर ग्रामीणों ने थाने का घेराव खत्म किया। इसी इलाके के जिगना गांव में 5 दिसंबर को कक्षा नौ में पढ़ने वाली एक किशोरी को रेप करने के बाद जिंदा जला दिया गया था।
इसी दिन शहर के पॉश इलाके सिविल लाइंस स्थित सेंट एंथोनी कॉलेज के सामने इंटर की एक छात्रा को सरेराह छेड़खानी की घटना ने बवाल मचा दिया। छात्रा ने फोन कर अपने भाई को बुला लिया। छात्रा के भाई ने मौके पर पहुंचकर छेड़खानी के आरोपी छात्र की पिटाई कर दी। पिटे छात्र ने भी अपने दोस्तों को बुला लिया। थोड़ी ही देर बाद दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। घंटों शहर का पॉश इलाका रणक्षेत्र बना रहा। एक दूसरे को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। राह चलने वालों के बीच भगदड़ मच गई। पथराव हुआ, वाहन तोड़े गए। छात्रा की शिकायत थी कि पड़ोस में रहने वाला आरोपी आए दिन छेड़खानी करता है, घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पुलिस दोनों पक्ष के लोगों को पकड़कर थाने लाई।
यमुनापार के जारी कस्बा में इंटर की एक छात्रा को तीन युवक जबरन खंडहर में उठा ले गए। दुराचार करते समय आसपास रहने वाले लोगों ने मौके पर पहुंचकर छात्रा को तीन दरिंदों के चंगुल से मुक्त कराया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किशोरी को उसके घर पहुंचाया। यमुनापार के ही कोरांव तहसील में आशा बहुओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि यहां कार्यरत आशा बहू के साथ एक डॉक्टर अश्लील हरकतें करता है। आशा बहुओं ने चेतावनी दिया कि चौदह फरवरी तक डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने पर जोरदार आंदोलन किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इलाहाबाद में महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं? इसकी रोकथाम के लिए बुद्धिजीवियों का कहे जाने वाले इस शहर में प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.






