लखनऊ : उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के नाम पर छद्म तरीके से कराये गए पंजीकरण को डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने निरस्त कर दिया है। प्रमाण पत्र निरस्तीकरण की कार्रवाई संस्था द्वारा दर्ज करायी गई आपत्ति पर संज्ञान लेते हुए की गई है। उपजा के अध्यक्ष रतन कुमार दीक्षित ने चेतावनी दी है कि अब इस नाम का उपयोग यदि अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अध्यक्ष श्री दीक्षित ने बताया कि उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 में पंजीकृत यूनियन है। इसकी पंजीकरण संख्या 2946 है। संस्था का पंजीकरण 16 मार्च 1966 को कानपुर स्थित रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन्स कार्यालय से हुआ है। उपजा वर्ष 1972 से नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (इण्डिया) एनयूजे आई से सम्बध्द है। उपजा के नाम का दुरुपयोग करते हुए कुछ लोगों ने वर्ष 2007 में सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 में पंजीकरण करा लिया था। इसके विरुध्द उपजा ने डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटीज के कार्यालय में आपत्ति दर्ज की थी। उपजा ने डिप्टी रजिस्ट्रार को अवगत कराया था कि एक संस्था के रहते उसके नाम पर किसी भी एक्ट में नया पंजीकरण नहीं कराया जा सकता है।
डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स लखनऊ ने आपत्ति पर संज्ञान लेते हुए 19 जुलाई 2011 को यू.पी.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के नाम पर कराये गए पंजीकरण प्रमाण पत्र संख्या 2746 को निरस्त कर दिया। श्री दीक्षित ने बताया कि उक्त पंजीकरण निरस्त होने की सूचना सम्बन्धित विभागों, जिला स्तर के अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) नाम का केवल एक संगठन है, जोकि ट्रेड यूनियन में रजिस्टर्ड है। उपजा का पंजीकृत कार्यालय 31-बी, दारुलशफा, विधायक निवास-2, लखनऊ है।
उपजा के अध्यक्ष रतन कुमार दीक्षित ने उन लोगों को चेतावनी दी है कि उपजा के नाम का दुरुपयोग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब उपजा के नाम पर अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा कार्यक्रम, सदस्यता, चंदा प्राप्त करने, किसी राजकीय विभाग से सहयोग प्राप्त करने, लैटर हैड छपवाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






