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उबल रहे हैं यूपी के पुलिसकर्मी, आजमगढ़ में सामूहिक इस्‍तीफे की धमकी

: आईपीएस अधिकारियों के दोहरे रवैये से हैं नाराज : आजमगढ़ जिले के पुलिसकर्मी उबल रहे हैं. ये उबाल आईपीएस अधिकारियों के दोहरे चरित्र के चलते आया है. अधिकारियों के रवैये से नाराज पुलिसकर्मी एक दिन का सांकेतिक भूख हड़ताल भी कर चुके हैं. अब सामूहिक इस्‍तीफे की बारी है. वे उसी राह पर चल रहे हैं, जिस राह पर बस्‍ती में कमिश्‍नर और एसपी विवाद के बाद आईपीएस अधिकारी चले थे. अधिकारी मामले को दबाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं पर आग अब तेज होती जा रही है. ऐसा लग रहा है कि यह आग पूरे यूपी में फैल सकती है.

: आईपीएस अधिकारियों के दोहरे रवैये से हैं नाराज : आजमगढ़ जिले के पुलिसकर्मी उबल रहे हैं. ये उबाल आईपीएस अधिकारियों के दोहरे चरित्र के चलते आया है. अधिकारियों के रवैये से नाराज पुलिसकर्मी एक दिन का सांकेतिक भूख हड़ताल भी कर चुके हैं. अब सामूहिक इस्‍तीफे की बारी है. वे उसी राह पर चल रहे हैं, जिस राह पर बस्‍ती में कमिश्‍नर और एसपी विवाद के बाद आईपीएस अधिकारी चले थे. अधिकारी मामले को दबाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं पर आग अब तेज होती जा रही है. ऐसा लग रहा है कि यह आग पूरे यूपी में फैल सकती है.

अमर उजाला ने आज अपने पहले पन्‍ने पर छापा है इस खबर को. खबर के अनुसार पुलिसकर्मियों ने सामूहिक इस्‍तीफे की धमकी दी है. यूपी में पुलिस कल्‍याण संगठन बनाने की मांग काफी अर्से से चल रही है. सिपाही बृजेंद्र सिंह यादव ने पुलिस विभाग में व्‍याप्‍त अनियमितताओं को लेकर अर्से से संघर्षरत रहे हैं. इनको कई बार बर्खास्‍त किया गया है. इनके भाई को भी बर्खास्‍त किया गया. वो भी इस आधार पर कि पुलिस बल को संगठन बनाने की मनाही है. संगठन बनाकर दबाव बनाना विद्रोह की श्रेणी में आता है. इसे आधार बनाकर पुलिसकर्मियों को संगठन बनाने से रोक दिया गया, पर इन्‍हीं अधिकारियों के दोहरे रवैये के बाद यह आग फिर से सुलग चुकी है. और अगर शीघ्र इन मांगों पर अधिकारियों ने ध्‍यान नहीं दिया तो इसे धधकने से रोक पाना बहुत मुश्किल होगा.

अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार पुलिस कल्‍याण संगठन ने अपनी ग्‍यारह सूत्रीय मांगों को लेकर एक पर्चा छपवाया है. इसमें पुलिसकर्मियों की गृह जनपद में पोस्‍िटंग, बिना परीक्षा के प्रोन्‍नति, अध्‍यापक के समान वेतन, पुलिस रेगुलेशन एक्‍ट की धारा 1861 में बदलाव, आठ घंटे की ड्यूटी, वोट देने का अधिकार समेत कुछ अन्‍य मांगें भी शामिल हैं. बृजेंद्र सिंह यादव काफी अर्से से इंस्‍पेक्‍टर स्‍तर तक के पुलिसकर्मियों के वेतन से पुलिस कल्‍याण के नाम पर पैसे काटे जाने का विरोध करते रहे हैं. उन्‍होंने अब तक के कथित करोड़ों के घोटालों के खिलाफ अदालत की चौकठ भी खटखटा चुके हैं. पिछले दिनों बस्‍ती में हुए घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है.

बताया जा रहा है कि एक फरवरी को कथित नोटिस के बाद आजमगढ़ के पुलिसकर्मियों ने दो फरवरी को पुलिस लाइन की मेस में खाना ना खाकर सांकेतिक हड़ताल किया. हालांकि अधिकारी स्‍तर पर इस मामले को दबाने की बात हुई. पर पर्चे के जगह जगह चिपकाए तथा बंटवाए जाने के बाद इसे दबा पाना संभव नहीं हो पाया. इस पर्चे में बृजेंद्र सिंह यादव का नाम  निवेदक के रूप में दिया गया है. खबर है कि पुलिसकर्मियों ने 15 फरवरी को सामूहिक इस्‍तीफे की धमकी दी है. इससे पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूले हुए हैं. बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी इस बात को लेकर नाराज हैं कि जब वे संगठन बनाने की बात करते हैं तो उसे विद्रोह की श्रेणी में खड़ा कर दिया जाता है.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि आईपीएस अधिकारियों ने पिछले दिनों जो किया क्‍या वह विद्रोह की श्रेणी में नहीं आता है? आईपीएस अधिकारियों के रवैये के बाद से ही पुलिसकर्मियों को ऊर्जा मिली है. उल्‍लेखनीय है कि बस्‍ती के कमिश्‍नर अनुराग श्रीवास्‍तव द्वारा सिद्धार्थनगर के एसपी के साथ दुर्व्‍यवहार के बाद तमाम आईपीएस अधिकारियों ने आईपीएस एसोसिएशन को इस्‍तीफा देकर सरकार पर दबाव बनाया था तथा सफल भी रहे थे. आईपीएस अधिकारियों के दबाव में कमिश्‍नर का तबादला भी कर दिया गया था. पर वो ही अधिकारी पुलिसकर्मियों के मामले में दोहरी नीति अपनाने लगते हैं. उन्‍हें पुलिसकर्मियों की मांग विद्रोह लगने लगती है.

बताया जा रहा है कि आईपीएस अधिकारियों के इस कदम ने पुलिसकर्मियों को भी उद्देलित एवं उत्‍तेजित कर दिया है. वे भी अब अपना संगठन बनाने तथा अपनी मांगे मनवाने के लिए सामूहिक इस्‍तीफे के हथियार के इस्‍तेमाल की योजना बना रहे हैं. अभी शुरुआत आजमगढ़ से होने जा रही है. बताया जा रहा है कि आजमगढ़ के पुलिसकर्मी 15 फरवरी को सामूहिक इस्‍तीफा देने की बात कह रहे हैं. अगर आजमगढ़ में मामला नहीं सुलझा तो समझा जा रहा है कि यह पूरे यूपी में संक्रामक रोग की तरह फैल जाएगा. पुलिसकर्मियों की सबसे ज्‍यादा नाराजगी आईपीएस अधिकारियों के दोहरे रवैये को लेकर है.

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