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उमा भारती के पीछे काम कर रहा चिन्‍मयानंद का दिमाग

सावन का महीना आने से पहले ही सुहागिन महिलायें सजने-संवरने की विशेष तैयारियां शुरू कर देती हैं, ऐसे ही पसंदीदा मौसम में तमाम तरह के जीव-जंतु और पशु-पक्षी विशेष स्थानों पर प्रवास करने पहुंच जाते हैं, ठीक वैसे ही चुनाव का मौसम आने पर कुछ स्त्री-पुरुष भगवा रंग के कपड़े निकाल लेते हैं और अचानक आस्था-श्रद्धा उनके सिर चढ़ कर बोलने लगती है, जबकि
समाज से दूर बाकी समय यह तथा-कथित भगवाधारी स्त्री-पुरुष विदेशी कपड़ों में लिपटे नजर आते हैं, साथ ही पूरे समय वैभव का आनंद लेते रहते हैं। जनता को समझना चाहिए कि बाकी समय मौन रहने वाले तथा-कथित भगवाधारियों को चुनाव के समय ही हिंदुत्व, गाय, गंगा क्यूं याद आते हैं?

सावन का महीना आने से पहले ही सुहागिन महिलायें सजने-संवरने की विशेष तैयारियां शुरू कर देती हैं, ऐसे ही पसंदीदा मौसम में तमाम तरह के जीव-जंतु और पशु-पक्षी विशेष स्थानों पर प्रवास करने पहुंच जाते हैं, ठीक वैसे ही चुनाव का मौसम आने पर कुछ स्त्री-पुरुष भगवा रंग के कपड़े निकाल लेते हैं और अचानक आस्था-श्रद्धा उनके सिर चढ़ कर बोलने लगती है, जबकि
समाज से दूर बाकी समय यह तथा-कथित भगवाधारी स्त्री-पुरुष विदेशी कपड़ों में लिपटे नजर आते हैं, साथ ही पूरे समय वैभव का आनंद लेते रहते हैं। जनता को समझना चाहिए कि बाकी समय मौन रहने वाले तथा-कथित भगवाधारियों को चुनाव के समय ही हिंदुत्व, गाय, गंगा क्यूं याद आते हैं?

स्वामी धर्मानंद सरस्वती जी सच्चे संन्यासी थे। इन्दिरा गांधी और डा. राजेन्द्र प्रसाद जैसे शीर्ष नेता उनसे मिलने आते थे और श्रद्धा से सिर झुकाते थे, पर उन्हें राजनीति आकर्षित नहीं कर सकी, पर उनके निर्वाण के बाद चिन्मयानंद सरस्वती ने उनके आश्रम को राजनीति का अड्डा बना दिया। उनके प्रयासों से आश्रम को मिली प्रसिद्धि का चिन्मयानंद सरस्वती ने भरपूर दुरुपयोग किया। समाज में धर्मवाद का जहर घोल कर सांसद भी बन बैठे, पर प्रकृति, आचरण और व्यवहार में सेवा भाव न होने के कारण जनता ने किनारे कर दिये। जनपद बदायूं के लोगों को याद होगा कि मुस्लिम समाज के विरुद्ध खुल कर बोलने के कारण अपनी हार को जीत में बदल लिया था। ऐसे लोग राम नाम, गंगा और गाय के नाम पर लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग करते रहे हैं, तभी आम आदमी से प्राथमिक सुविधायें अभी तक दूर हैं, इसलिए अब ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।

चिन्मयानंद का असली चेहरा पूरा देश जान गया है, पर भगवा कपड़ों में लिपटे अभी ऐसे कई स्त्री-पुरुष और हैं, जिनका असली चेहरा जनता के सामने आना शेष है। यह तथा-कथित भगवाधारी गंगा के नाम पर आंदोलन करते हैं और गंगा के सबसे बड़े दुश्मन से अपने आश्रम के घाट का निर्माण करा लेते हैं। हरिद्वार स्थित परमार्थ आश्रम का घाट गंगा के दुश्मन के रुपयों से चमचमा रहा है। घाट पर लगा गंगा के दुश्मन का स्वागत बोर्ड गंगा आंदोलन के पीछे की कहानी खोलने के लिए काफी है। अगर, यह गलत है तो चिन्मयानंद सरस्वती और साध्वी उमा भारती जनता को जवाब दें कि गंगा अभी तक प्रदूषण मुक्त नहीं हुई है, पर उनका आंदोलन मुखर क्यूं हो गया? तथा-कथित भगवाधारियों की सलाह पर भाजपा के घोषणा पत्र में गाय देने का वादा किया गया है, पर तथा-कथित आश्रमों में गाय दूध देना बंद कर देती है, तो यह तथा-कथित भगवाधारी सडक़ पर छुड़वा देते हैं, इनके स्वयं के मन में गाय के प्रति किसी तरह की श्रद्धा नहीं है, सिर्फ जनता की भावनाओं का पुन: दुरुपयोग करने के लिए नाटक किया जा रहा है।

भाजपा के मंचों पर या चुनाव प्रचार सभाओं में चिन्मयानंद सरस्वती भले ही नहीं दिख रहे हैं, पर उनके और साध्वी उमा भारती के बहुत अच्छे संबंध हैं। आश्रम से जुड़े बाकी लोगों से भी अच्छे संबंध हैं, क्योंकि साध्वी उमा भारती परमार्थ आश्रम में ही रही हैं। उनके 13-14 वर्ष की आयु के तमाम फोटो आश्रम में मौजूद हैं, यह दोनों बचपन से ही साथ-साथ हैं और अजब-गजब संयोग ही कहा जायेगा कि दोनों ही सक्रिय राजनीति में हैं। सच्चाई यह है कि दोनों मिल कर जनता को मूर्ख बना रहे हैं, क्योंकि साध्वी उमा भारती अनशन करती हैं और भाजपा का कोई नेता चर्चा तक नहीं करता, तो चिन्मयानंद सरस्वती जूस पिलाने पहुंच जाते हैं। वह रूठ कर बद्रीधाम या कोप भवन में चली जाती हैं, पर भाजपा का कोई शीर्ष नेता मनाने नहीं आता, तो चिन्मयानंद सरस्वती मनाने पहुंच जाते हैं और यह आसानी से मान भी जाती हैं, यह क्रम आज तक जारी है। चिन्मयानंद सरस्वती जनता के सामने आकर भले ही कुछ नहीं कर रहे हैं, पर साध्वी उमा भारती के दिमाग के पीछे उनका ही दिमाग काम कर रहा है। राजनीति के माध्यम से इन दोनों के हाथों में शक्ति आती है, तो एक-दूसरे को मदद पहुंचाते हैं। उमा भारती खेल मंत्री थीं, तब मुमुक्षु आश्रम में इंडोर स्टेडियम

साध्‍वी चिदर्पिता गौतम

बनवा चुकी हैं, ऐसे में उमा भारती को शक्तिशाली बनाने का मतलब चिन्मयानंद सरस्वती को ही शक्तिशाली बनाना है। चिन्मयानंद सरस्वती का असली चेहरा आपके सामने है ही, इसलिए उत्तर प्रदेश के साथ विशेष तौर पर चरखारी विधान सभा क्षेत्र के मतदाताओं से अपील है कि वोट डालने से पहले एक बार सोचें, सिर्फ भगवा कपड़े देख कर वोट न डालें।

साध्वी चिदर्पिता गौतम का यह लिखा उनके ब्लाग मेरी ज़मीं मेरा आसमां से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

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