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सुख-दुख...

एक चैनल के मालिक ने पत्रकार को काम करने दिया, दूसरे चैनल के मालिक ने पत्रकार के पर कतर दिए!

आज बात करते हैं दो पत्रकारों की… पहला पत्रकार एक बड़े चैनल में वरिष्ठ पत्रकार है और उनकी जिम्मेदारी है कुछ खोजी ख़बरें लायें और उनका खुलासा करें… आम तौर पर जब कहीं बम विस्फोट होता है या अंडरवर्ल्ड की कोई खबर होती तो वो पत्रकार महोदय तुरंत स्क्रीन पर दिख जाते और ऐसी जानकारियां देते जिन्हें सुन कर हर कोई दंग रह जाता…. इसी बीच कुछ नया करने के प्रयास में उन्होंने एक मंत्री जी पर हाथ डाल दिया… एक स्टोरी उनके खिलाफ कर दी.

आज बात करते हैं दो पत्रकारों की… पहला पत्रकार एक बड़े चैनल में वरिष्ठ पत्रकार है और उनकी जिम्मेदारी है कुछ खोजी ख़बरें लायें और उनका खुलासा करें… आम तौर पर जब कहीं बम विस्फोट होता है या अंडरवर्ल्ड की कोई खबर होती तो वो पत्रकार महोदय तुरंत स्क्रीन पर दिख जाते और ऐसी जानकारियां देते जिन्हें सुन कर हर कोई दंग रह जाता…. इसी बीच कुछ नया करने के प्रयास में उन्होंने एक मंत्री जी पर हाथ डाल दिया… एक स्टोरी उनके खिलाफ कर दी.

मंत्री जी से उनकी सफाई मांगी गई तो मंत्री जी सत्ता के नशे में चूर… कुछ बोलने के लिए तैयार ही नहीं…. ठीक है साहब स्टोरी चैनल पर चल गई… फिर क्या था!!!! हाहाकार मच गया.. मंत्री जी बिलबिला उठे… हाईकमान ने जवाब तलब किया तो बुला ली प्रेस कांफ्रेंस… ये क्या!!!!!! उस प्रेस कांफ्रेंस में भी वही पत्रकार मौजूद थे जिन्होंने स्टोरी की थी… वहां भी बवाल… हंगामा… अफरा तफरी… मंत्री जी ने तैश में आकर धमकी दे दी… क्या!!!!! ये तुम्हारी आखिरी प्रेस कांफ्रेंस होगी… पत्रकार ने भी चुनौती स्वीकार कर ली… बात ख़तम हो गई.

अब बात दूसरे पत्रकार की… उनके लाखों दीवाने… उनकी बात और स्क्रिप्ट सुनने के लिए लोग इंतज़ार करते… काम छोड़ देते… ट्वीटर पर लाखों चाहने वाले…. फेसबुक पर कुछ लिखे तो कुछ ही मिनट में हजारों टिप्पणियां…. कुल मिलाकर टेम्पो हाई…. चैनल ने उन्हें शाम के महत्वपूर्ण घंटे में उनका कार्यक्रम शुरू कराया…. हिट रहा… शायद टीआरपी भी मिली ही होगी… लेकिन कुछ समय बाद लोग बोर होने लगे… वही मेहमान वही थके हुए विषय… वही सवाल और वही जवाब…. कुल मिला कर कुछ नयापन नहीं…. एक दिन उन्होंने एक ख़ास धड़े की तारीफ कर दी…. जो चैनल के मालिक का विरोधी धड़ा था… फिर क्या था मालिक साहब भड़क गए… पता नहीं क्या क्या सुना दिया… और कहा आप सोशल मीडिया से तत्काल दूर हो जाइये नहीं तो परिणाम गंभीर होंगे… पत्रकार महोदय ने ऐसा ही किया… भैया करते भी क्यों नहीं… नौकरी भी तो करनी है…. सो कर रहे है… ये थे एक मालिक.

अब फिर से पहले पत्रकार साहब की बात पर आते है… आपको याद होगा…. मंत्री जी ने धमकी दी थी की ये तुम्हारी आखिरी प्रेस कांफ्रेंस होगी…. मैं तुम्हें ख़तम कर दूंगा…. लेकिन अफ़सोस ऐसा कुछ आज तक हो नहीं सका… पत्रकार पहले फेसबुक पर इतने सक्रिय नहीं थे जितने इस घटनाक्रम के बाद हुए…. आज भी मौज से नौकरी कर रहे हैं… अब एक सवाल!!!!!! क्या मंत्री जी ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए पत्रकार को हटाने के लिए चैनल मालिक से नहीं कहा होगा… जरूर कहा होगा… प्रयास किया होगा… लेकिन मालिक ने सच्चाई का साथ दिया… और पत्रकार को अपना काम करने दिया… ये है पत्रकारिता… ये है सत्य…. दूसरे मालिक ने क्या किया… इतने काबिल पत्रकार के पर क़तर दिए… अब सोचिये…. समझिये और फैसला कीजिये…?

नोट : एक बात और…. इस कहानी का सम्बन्ध किसी जीवित या मृत व्यक्ति से नहीं है… दरअसल ऐसा कभी हकीकत में हुआ ही नहीं… पूरी कहानी कल्पनाओं पर आधारित है…. कोई व्यक्ति अगर इस कहानी को किसी व्यक्ति विशेष से जोड़ता है तो ये उसकी भूल होगी… इसके लिए मैं नहीं वह स्वयं जिम्मेदार होगा.

पत्रकार पंकज मिश्रा के फेसबुक वॉल से साभार.

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