Deepak Sharma :ए भाई जरा देख कर चलो… किसी को नामवर पत्रकार होने का गुमान है. किसी को मीडिया मुगल होने का. कोई पत्रकार से मंत्री बनकर हैसियत भूल गया. कोई सरकार की बड़ी दलाली करने पर फख्र कर रहा है. किसी को सिर्फ अपनी एंकरिंग पर गुरूर है. तो कोई मोदी के करीब होने पर तिरछा है. और एक साहब सिर्फ इसलिए बदतमीज़ हो गए कि उन्हें एक ख़ूबसूरत बाला चाहने लगी.
मित्रों मुझे सिर्फ इस बात का गुरूर है कि रोज बड़ी खबर खोजने निकलता हूँ पर शाम तक कुछ नही मिलता. गुरूर यही है कि खबर बड़ी नही कर सके पर अब तक बिके नहीं. हैसियत कुछ भी ना हो पर नीयत बची है अब तक.
बैठ जाता हूँ ख़ाक पर अक्सर
मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है
वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के एफबी वॉल से साभार.






