Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

एक सप्‍ताह बाद भी ब्‍लैक आउट की कालिख से रंगा है पॉजिटिव मीडिया

: मतंग सिंह की कंपनी का बुरा हाल : पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के सभी छह चैनल लगभग एक सप्‍ताह बाद भी ब्‍लैक आउट पड़े हुए हैं. ग्रुप के किसी भी चैनल पर प्रसारण नहीं हो रहा है. पूर्व मंत्री मतंग सिंह का पॉजिटिव मीडिया ग्रुप कंगालियत के दौर में पहुंच चुका है. ट्रांशमिशन का किराया नहीं देने पर इस ग्रुप के चैनलों की फ्रिक्‍वेंसी रोक दी गई है. दूसरी तरफ इंडियन ओवरसीज बैंक का कर्ज सिर पर है और हमार टीवी के नीलाम होने की तलवार लटक रही है. कर्मचारियों को फरवरी माह के बाद से सेलरी भी नहीं मिली है.

: मतंग सिंह की कंपनी का बुरा हाल : पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के सभी छह चैनल लगभग एक सप्‍ताह बाद भी ब्‍लैक आउट पड़े हुए हैं. ग्रुप के किसी भी चैनल पर प्रसारण नहीं हो रहा है. पूर्व मंत्री मतंग सिंह का पॉजिटिव मीडिया ग्रुप कंगालियत के दौर में पहुंच चुका है. ट्रांशमिशन का किराया नहीं देने पर इस ग्रुप के चैनलों की फ्रिक्‍वेंसी रोक दी गई है. दूसरी तरफ इंडियन ओवरसीज बैंक का कर्ज सिर पर है और हमार टीवी के नीलाम होने की तलवार लटक रही है. कर्मचारियों को फरवरी माह के बाद से सेलरी भी नहीं मिली है.

मतंग सिंह के पॉजिटिव ग्रुप के चैनल फोकस टीवी, हमार टीवी, एनई बांग्‍ला, एचवाई टीवी, हाई फाई, एई टीवी ब्‍लैक आउट है. एक सप्‍ताह से इन चैनलों पर कुछ भी प्रसारित नहीं हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन के ट्रांशमिशन का दो महीना का किराया चुकता नहीं करने के चलते प्रसारण रोक दिया गया है. शुरू से ही विवादों में उलझा रहा यह ग्रुप अब मीडिया की बदनामी का कारण बनता जा रहा है. खबरों से ज्‍यादा खुद की खबरों के लिए चर्चित इस ग्रुप से जुड़े कर्मचारी भी अब फ्रस्‍टेशन के दौर से गुजर रहे हैं. कई जगह हाथ पैर मारने के बाद भी पॉजिटिव मीडिया का नाम सुनते ही दूसरे चैनलों के दरवाजे बंद हो जाते हैं.

ग्रुप के सामने सबसे बड़ी दिक्‍कत एनई टीवी को लेकर है. इस ग्रुप के अन्‍य चैनलों के मुकाबले एनई की स्थिति अच्‍छी है. ग्रुप के लिए हमार टीवी जहां सफेद हाथी बना हुआ है तो फोकस का इस्‍तेमाल खबरों से ज्‍यादा दूसरी खबरों के लिए जाना जाता है. एचवाई टीवी भी कुछ खास मुकाम हासिल नहीं कर पाया. बाकी एनई बांग्‍ला तथा हाई फाई भी बस शोभा बढ़ाने वाले चैनल बने हुए हैं. प्रबंधन का खर्चा ज्‍यादा और आमदनी चवन्‍नी भी नहीं है. इस ग्रुप के पास एक भी ऐसा पत्रकार नहीं है जिसकी पहचान हो. असिस्‍टेंट प्रोड्यूसरों को वरिष्‍ठ बनाकर चैनल चलाया जा रहा है, जिनमें विजन की कमी साफ झलकती है.

यह ग्रुप दूसरों का पैसा हड़पने के लिए भी जाना जाता है. इंडियन ओवरसीज बैंक का इस ग्रुप के हमार टीवी पर 52 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का कर्ज है. बैंक ने इस चैनल की नीलामी के लिए नोटिस भी जारी कर दिया है. बताया जा रहा है कि अब तक बैंक का पैसा जमा नहीं हुआ है. अगर हमार टीवी नीलाम होता है तब भी बैंक घाटे में रहेगा. कंपनी प्रबंधन अपने कर्मचारियों के पीएफ का पैसा भी हड़प चुका है. कर्मचारियों से पैसे लेकर प्रबंधन के लोग जमा करने की बजाय खुद खा चुके हैं. बीच में सैलरी विवाद को लेकर भी पांच दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारियों ने इस्‍तीफा दे दिया था.

इस ग्रुप के चैनलों में बचे खुचे काम करने वाले लोगों को फरवरी के बाद से सैलरी नहीं मिली है. जबकि अप्रैल भी बीतने को है. कर्मचारियों के फ्रस्‍ट्रेशन का आलम यह है कि अब ज्‍यादातर कार्यालय अपनी मर्जी से जाते हैं. मन किया तो गए नहीं मन किया तो छुट्टी. कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है. कर्मचारी दूसरी जगह नौकरियों की तलाश कर रहे हैं पर तलाश है कि खतम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. वे कर्मचारी जरूर मस्‍त हैं, जिनको उनकी औकात से ज्‍यादा पैसे चैनल से मिल रहे हैं. वे अब भी चैनल में डंटे हुए हैं तथा ब्‍लैक आउट के बाद भी न्‍यूज रूम में क्‍या हेडिंग लगाई है, क्‍या खबरें चलाई हैं, कर रहे हैं. वैसे अभी तय नहीं है कि कब तक पॉजिटिव ग्रुप को ब्‍लैक आउट की समस्‍या से निजात मिलेगा.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...