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दिल्ली

एक सीएम के कहने पर तीन पुलिसवालों को सस्पेंड नहीं किया जा सकता तो फिर सीएम बने रहने का क्या फायदा?

Samarendra Singh : फेसबुक पर लोगों के जो पोस्ट आ रहे हैं उन्हें पढ़ कर लग रहा है कि पेंच तरीके को लेकर फंसा है. जहां तक मुद्दे का सवाल है मोटा-मोटी सभी सहमत हैं कि पुलिस चोर है. पुलिस हफ्ता वसूली करती है.

Samarendra Singh : फेसबुक पर लोगों के जो पोस्ट आ रहे हैं उन्हें पढ़ कर लग रहा है कि पेंच तरीके को लेकर फंसा है. जहां तक मुद्दे का सवाल है मोटा-मोटी सभी सहमत हैं कि पुलिस चोर है. पुलिस हफ्ता वसूली करती है.

पुलिस लूटती है. खुदरा कारोबारियों और ड्राइवरों को तंग करती है. रिश्वत मांगती है और नहीं देने पर कानून का भय दिखाती है. और केजरीवाल उस पुलिस को जवाबदेह बनाना चाहते हैं. इसलिए चाहते हैं कि पुलिस उनके हवाले की जाए. लेकिन पेंच तरीके को लेकर फंस गया है और इस बात पर भी कि दूसरों को जवाबदेह बनाने की वकालत करने वाले केजरीवाल और उनके मंत्री खुद कितना जवाबदेह हैं.

अब इस पर लड़ाई हो रही है. अभी तक की लड़ाई में दिल्ली में केजरीवाल जीतते नजर आ रहे हैं. क्योंकि मैं कई लोगों से बात कर रहा हूं और बौद्धिक जगत को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर लोग केजरीवाल के समर्थन में हैं. वो कह रहे हैं कि दिल्ली का मुख्यमंत्री सही बोल रहा है. अगर एक मुख्यमंत्री के कहने पर तीन पुलिसवालों को दो-तीन दिन के लिए भी सस्पेंड नहीं किया जा सकता तो फिर मुख्यमंत्री बने रहने का क्या फायदा?

यानी अभी लोग केजरीवाल के पक्ष में है लिहाजा पहला राउंड केजरीवाल जीतेंगे. मतलब केंद्र सरकार उनकी मांग माने या नहीं माने केजरीवाल जीतेंगे. अगर केंद्र उनकी बात मान लेती है तो जीत सीधी और प्रत्यक्ष होगी. अगर नहीं मानती है तो भी इतनी जीत हो जाएगी कि आगे जब कोई अपराध होगा तो केजरीवाल सरकार पर कोई सीधा आक्रमण नहीं करेगा. उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराएगा.

नोट: सियासत में कोई नियम नहीं होता. जब कांग्रेस अपने धुर विरोधी को समर्थन देकर जबरन सरकार बनवा सकती है तो उस विरोधी को भी यह छूट दी जानी चाहिए कि वह कांग्रेस का घेराव कर सके. इसलिए हम और आप अभी कुछ समय के लिए अपने-अपने आग्रह से ऊपर उठ कर इस पूरे खेल को समझने की कोशिश करें. एक पार्टी जिसने इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अब इसी व्यवस्था के जाल में उलझ गई है. अगर वह इस जाल को नहीं काटेगी तो नई व्यवस्था नहीं बना सकेगी. नई व्यवस्था नहीं बनाएगी तो उस पार्टी का दम घुट जाएगा. इसलिए यह सारी कोशिश उस जाल को काटने की है. जाल कटे नहीं कटे… थोड़ा स्पेस बढ़ जाए ताकि दम तो नहीं घुटे.

वरिष्ठ पत्रकार समरेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से.

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