आप न्यूज पेपर कई अच्छी न्यूज, लेखों या अन्य कारणों से लेते होंगे लेकिन कुछ लोग कोई न्यूज पेपर केवल उसके क्रासवर्ड पहेलियों के लिये लेते या बंद कर देते है. टाइम्स आफ इंडिया के एसोसिएट एडिटर जग सुरैया ऐसे ही लोगों में से हैं. वे कहते हैं कि कई सालों तक हिन्दुस्तान टाइम्स न्यूज पेपर खरीदने के बाद मैंने इसे लेना बंद कर दिया. ऐसा नहीं था कि हिन्दुस्तान खराब पेपर था बल्कि हमने इसे इसके क्रासवर्ड की वजह से बंद किया. मैं और बन्नी इसकी क्रासवर्ड पहेलियां सुलझाने के आदती हो गये थे. लेकिन जब हिंदुस्तान टाइम्स ने क्रासवर्ड जो ये 'द टाइम्स', लंदन से लेता था, लेना बंद कर दिया तब मैंने इसे लेना बंद कर दिया.
जग सुरैया कहते हैं कि दरअसल न्यूजपेपर केवल खबर ही नहीं देते बल्कि आदत बनाते हैं. वो कहते हैं कि आज भी चाय, काफी के साथ न्यूजपेपर पढ़ने के अलावा एक और महत्वपूर्ण आदत क्रासवर्ड की भी है. यही वजह है कि जब पूरी दुनिया की प्रिंट मीडिया दम तोड़ रही हैं और ये भविष्यवाणियां की जा रही हैं कि ये बस कुछ सालों में खत्म हो जायेगी, भारत का प्रिंट मीडिया मजबूती से खड़ा है और बढ़ रहा है.





