आई नेक्स्ट के हालात दिन-ब-दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। मार्केटिंग वाले एड ना मिलने से परेशान हैं तो एडोटोरियल वाले अच्छे और कर्मठ कर्मचारी ना मिलने से। लखनऊ में मार्केटिंग का बुरा हाल है। एजीएम मार्केटिंग आशुतोष अग्निहोत्री लगातार लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं यहां से अखबार के लिए विज्ञापन निकाल पाना अखबार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। टार्गेट एक करोड़ रुपये मंथली विज्ञापन कलेक्ट करने का है और लखनऊ में टार्गेट का पंद्रह से बीस प्रतिशत पहुंचने में ही इम्प्लाई को छीकें आ रही हैं।
बुधवार को भी एजीएम ने मार्केटिंग सेक्शन में टार्गेट पूरा ना करने को लेकर यहां के कर्मचारियों से गालियों से बात की। जिससे नाराज कुछ इम्पलाई ने रिजाइन देने का भी मन बना लिया है। उधर एडिटोरियल का हाल और भी बुरा है। लखनऊ में न्यूज एडिटर राधा कृष्ण त्रिपाठी को हटे एक महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन अब तक आई नेक्स्ट को लखनऊ के लिए कोई नहीं मिल पाया। लखनऊ में शर्मिष्ठा शर्मा के आतंक की वजह से कोई भी ज्वाइन करना नहीं चाहता।
आईनेक्स्ट के सूत्र की मानें तो आई नेक्स्ट एडिटोरियल का माहौल इस कदर खराब हो चुका है कि यहां काम करने वाले इम्पलाई हंसी मजाक में भी कोई बात कहते हैं तो सेकेण्डों में इसकी मुखबिरी शर्मिष्ठा शर्मा तक पहुंच जाती है और शर्मिष्ठा शर्मा भी फौरन बुला कर सम्बंधित लोगों से अपने केबिन में पूछताछ शुरू कर देती हैं।
शर्मिष्ठा शर्मा भी काम करने वालों को कम और मुखबिरी करने वालों को अधिक पसंद करती हैं। यहां तक कि अपने मुखबिर के खिलाफ एक शब्द भी सुनना शर्मिष्ठा शर्मा को पसंद नहीं। लखनऊ आई नेक्स्ट में काम करने वाले अधिकांश इम्पलाई से शर्मिष्ठा शर्मा ने भी साफ कह दिया है कि जहां इससे बेहतर मिले चले जाओ, यहां कोई नहीं रोकेगा। सबको अपना भविष्य बनाने का अधिकार है।
आई नेक्स्ट के छह साल में इतिहास रहा है कि शर्मिष्ठा शर्मा ने आज तक कभी भी किसी भी इम्पलाई का बचाव नहीं किया। सभी इसी भ्रम में रहे कि वह शर्मिष्ठा शर्मा की जी हुजूरी करते हैं और उनकी नौकरी चलती रहे। लेकिन ऐसा नहीं है। राजीव ओझा, अजेंद्र राजन से लेकर शबी हैदर तक जो इनके खास हुआ करते थे, लेकिन इन लोगों की ओर से इस महिला ने कभी एक शब्द नहीं कहे। अजेंद्र राजन इनके काफी करीबी माने जाते थे, लेकिन जब आलोक सांवल से अजेंद्र का झगड़ा हुआ तो शर्मिष्ठा शर्मा आलोक सांवल की ओर हो गयीं।
इसी तरह लांचिंग टाइम से काम करने वाले रिपोर्टर शबी हैदर को भी शर्मिष्ठा शर्मा का खास माना जाता था। लेकिन हैदर को पांच साल में भी प्रमोशन नहीं दिया। जबकि दूसरे लोगों को जूनियर रिपोर्टर से सीनियर रिपोर्टर बना दिया गया। यही हाल राजीव ओझा के साथ हुआ। राजीव ओझा शर्मिष्ठा शर्मा की किसी भी बात को कभी काट नहीं सकते थे, यहां तक कि अगर शर्मिष्ठा शर्मा दिन को कह दें कि रात है तो राजीव ओझा की आंखों के सामने भी अंधेरा छा जाता था और उसे रात कहने लगते थे।
एक महिला फोटो ग्राफर ने राजीव ओझा पर आरोप लगाया तो शर्मिष्ठा शर्मा राजीव ओझा का साथ छोड़ कर उस महिला की ओर हो गयीं और आफिस में एलान कर दिया कि राजीव ओझा से कोई बात नहीं करेगा। राजीव ओझा का ट्रांसफर कानपुर कर दिया गया। बाद में उन्होंने केटीवी ज्वाइन कर लिया। (कानाफूसी)
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






