लखनऊ। यूपी मेडिकल घोटाले में एक और बड़े अफसर पर शिकंजा कसा है। एनआरएचएम (नेशनल रूरल हेल्थ मिशन) के पूर्व मिशन डायरेक्टर और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। यूपी मेडिकल घोटाले में इस गिरफ्तारी को अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी माना जा रहा है। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से प्रदीप शुक्ला को सीबीआई ने आज सुबह हिरासत में लिया था। यूपी मेडिकल घोटाले में ये पहली गिरफ्तारी है जिसमें किसी आईएएस अफसर पर सीबीआई ने हाथ डाला है। प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद कुछ और लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
आईएएस प्रदीप शुक्ला मायावती सरकार के दौरान यूपी के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव थे। शुक्ला को मायावती का करीबी माना जाता रहा है। शुक्ला पर यूपी मेडिकल घोटाले में शामिल होने के आरोप पहले से लगते रहे हैं। इन्हीं आरोपों की वजह से सीबीआई प्रदीप शुक्ला से कई बार पूछताछ कर चुकी है। समझा जा रहा है कि इस बार सीबीआई इनसे लंबी पूछताछ करने वाली हैं। बसपा सरकार के समय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव होने के दौरान वो यूपी में एनआरएचएम के भी मिशन डायरेक्टर हुआ करते थे। प्रदीप शुक्ला को घोटाले की सबसे बड़ी मछली माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि एनआरएचएम में सबसे ज्यादा फैसले शुक्ला के दस्तखत से लिए गए। बिना इनके इशारे के विभाग में एक पत्ता तक नहीं हिलता था। यहां तक कि विभाग के मंत्री से भी ज्यादा उनकी चलती थी।
प्रदीप शुक्ला ने कई बार विदेश यात्राएं भी कीं जिन्हें उन्होंने सरकार से छुपाया तथा उसे अंधेरे में रखा। माया सरकार में प्रदीप शुक्ला चार साल तक स्वास्थ्य विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर रहे। शुक्ला के शासन में ही घोटाला हुआ। खबर है कि दोपहर तक सीबीआई उन्हें कोर्ट में पेश कर सकती है। इससे पहले सीबीआई ने सोमवार को पूर्व सीएमओ डॉक्टर एके शुक्ला को गिरफ्तार किया था। वे इस समय जेल में बंद हैं। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सरकार में परिवार कल्याण मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा इसी घोटाले के चलते जेल में हैं। करीब 2,000 करोड़ रुपये के इस घोटाले की वजह से 27 अक्टूबर 2010 को लखनऊ के सीएमओ डॉ. विनोद आर्या की हत्या कर दी गई, जबकि 2 अप्रैल 2011 को लखनऊ के ही सीएमओ डॉ. बीपी सिंह की हत्या कर दी गई।
इन दोनों की हत्या में लखनऊ के ही डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 22 जून 2011 को लखनऊ जेल में उनका शव शौचालय में बनी खिड़की की ग्रिल से लटकता मिला। सचान की संदिग्ध मौत का राज अब तक नहीं खुल सका है। एनआरएचएम के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील वर्मा ने इसी साल 23 जनवरी को खुदकुशी कर ली, जबकि लखीमपुर खीरी में स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क महेंद्र शर्मा की संदिग्ध मौत हो गई। वाराणसी के डिप्टी सीएमओ शैलेश यादव की इसी साल 15 फरवरी को सड़क दुर्घटना में हुई मौत को भी एनआरएचएम घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। सीबीआई इस घोटाले में दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें बाबू सिंह कुशवाहा समेत करीब दर्जन भर लोग आरोपी बनाए गए हैं।





