नैनीताल। राजनीति बड़ी निष्ठुर होती है। सियासत में भूत एवं भविष्य का कोई अर्थ नहीं। यहां एक ही काल अर्थवान होता है, वह है वर्तमान। राजनीति के इस यथार्थ को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पण्डित नारायण दत्त तिवारी से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता है। एक दौर था, जब नारायण दत्त तिवारी की महज नजरें इनायत होने से छुटभय्ये नेता भी रातों-रात राजनीति की क्षितिज पर पहुंच जाते थे। कांग्रेस की राजनीति में एक लंबे अरसे तक कद्दावर नेताओं की फेहरिस्त में शुमार रहे नारायण दत्त तिवारी ने खुद कभी इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि छः दशक के लम्बे राजनीतिक जीवन में पांच बार मुख्यमंत्री और भारत का वित्त एवं उद्योग मंत्री समेत तमाम बडे़ ओहदे सम्भालने के बाद उन्हें अपने नजदीकी लोगों के लिए विधान सभा के टिकट के वास्ते हाई कमान के सामने गिड़गिड़ाना पडे़गा।
लेकिन ऐसा हुआ। तिवारी को अपने करीबियों को उत्तराखण्ड की विधानसभा का टिकट दिलाने के लिए उनके संरक्षण में बनी निरंतर विकास समिति की अपरोक्ष रूप से आड़ लेनी पडी़। कांग्रेस ने समय रहते बुजुर्ग नेता के सियासी इशारे को भांप लिया। कांग्रेस में कामयाब लंबी सियासी पारी खेलने के बाद हाई कमान ने नजराने के तौर पर अपने दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी के भतीजे मनीष तिवारी को गदरपुर से, ओ.एस.डी. आर्येन्द्र शर्मा- सहसपुर तथा नवप्रभात को विकास नगर से विधानसभा का टिकट थमा दिया है।
यहां तक तो सब ठीक था। लेकिन हद तब हो गई जब कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन को आ रहे नारायण दत्त तिवारी के भतीजे मनीष तिवारी तथा उनके अन्य परिजनों के ऊपर बुधवार को काशीपुर के पास कुछ लोगों ने कातिलाना हमला बोल दिया। हमलावर तिवारी के भाई का मोबाईल फोन और कागजातों से भरा बैग भी लूट ले गये। तिवारी के भतीजे तथा अन्य परिजनों पर हमला उस क्षेत्र में हुआ, जहां के विकास के लिए तिवारी ने अपना पूरा राजनीतिक जीवन झोंक दिया।
नैनीताल से प्रयाग पाण्डे की रिपोर्ट.






