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एबीपी न्यूज ने भारी भूल की, मस्जिद या ढांचा विवादित नहीं है, जन्मस्थल पर विवाद है

Nadim S. Akhter : अच्छा है. एबीपी न्यूज वालों ने संघ और बीजेपी की लाइन ले ली है. वे इसे -बाबरी मस्जिद- नहीं मानते. चैनल इसे -विवादित ढांचा- बता रहा था अपने कार्यक्रम -प्रधानमंत्री- में. एबीपी न्यूज वालों जिस तरह से बाबरी मस्जिद के इतिहास की व्याख्या की, उसका मतलब ये हुआ कि जिस 'ढांचे' को कारसेवकों ने ध्वस्त कर दिया, वह 'ढांचा' पहले मंदिर था. फिर दूसरे धर्म के लोगों (मुसलमानों) ने उस 'ढांचे' पर कब्जा कर लिया और उस ''ढांचे' को मस्जिद बताकर वहां नमाज पढ़नी शुरू कर दी. यानी ढांचा –विवादित– हो गया.

Nadim S. Akhter : अच्छा है. एबीपी न्यूज वालों ने संघ और बीजेपी की लाइन ले ली है. वे इसे -बाबरी मस्जिद- नहीं मानते. चैनल इसे -विवादित ढांचा- बता रहा था अपने कार्यक्रम -प्रधानमंत्री- में. एबीपी न्यूज वालों जिस तरह से बाबरी मस्जिद के इतिहास की व्याख्या की, उसका मतलब ये हुआ कि जिस 'ढांचे' को कारसेवकों ने ध्वस्त कर दिया, वह 'ढांचा' पहले मंदिर था. फिर दूसरे धर्म के लोगों (मुसलमानों) ने उस 'ढांचे' पर कब्जा कर लिया और उस ''ढांचे' को मस्जिद बताकर वहां नमाज पढ़नी शुरू कर दी. यानी ढांचा –विवादित– हो गया.

लेकिन ऊपर जो मैंने कहानी बताई, क्या वाकई में ऐसा हुआ. नहीं हुआ ना. तो फिर मस्जिद को -विवादित ढांचा- क्यों और किस आधार पर बता रहा था एबीपी न्यूज. —विवादित ढांचा— का मतलब तो यह होता है कि जिस ढांचे को ढहाया गया, उसी पर विवाद है यानी कि वह ढांचा पहले मंदिर के रूप में बना था और फिर उसे मस्जिद बताया-कहा जाने लगा. मतलब कि एक बने-बनाए ढांचे पर विवाद है.

लेकिन राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का मामला तो इससे एकदम उलट है. यहां विवाद किसी ढांचे को लेकर नहीं, जन्मस्थान को लेकर है. हिन्दू संगठनों का कहना है कि पहले वहां भगवान राम का मंदिर था, जिसे ढहाकर मस्जिद बना दी गई. उनका दावा है कि मस्जिद के अंदर ही वह जगह-स्थान है, जहां भगवान राम का जन्म हुआ था. और मुस्लिम इसे बस एक मस्जिद मानते हैं, जैसी किसी भी गली-मुहल्ले की मस्जिद होती है, एक आम मस्जिद जहां नमाज पढ़ी जाती है. फर्क ये है कि इस मस्जिद को एक बादशाह ने बनवाया था, जैसे दिल्ली की जामा मस्जिद या कोई भी पुरातत्व महत्व की मस्जिद.

इन तथ्यों के आधार पर अवलोकन करें तो ये पाएंगे कि ढांचा विवादित कैसे हो गया?? उसे तो मस्जिद ही बनाया गया था ना. वहां नमाज भी पढ़ी जाती थी शुरुआत में. हां, ये अलग बात है कि हिन्दू संगठनों की दलीलों के अनुसार उसे मंदिर तोड़कर बनाया गया था और यहीं भगवान राम का जन्म स्थान है, मस्जिद के अंदर. फिर तो मस्जिद नहीं, उसके अंदर स्थित वह जगह विवादित हुई, जहां भगवान राम का जन्म हुआ बताया जाता है. तब तो इसे कहना चाहिए कि –बाबरी मस्जिद के अंदर स्थित विवादित स्थल/जगह-.

लेकिन इस पूरे प्रकरण में बाबरी मस्जिद का ढांचा कैसे विवादित हो गया भाई. वह तो मस्जिद के रूप में बनाई गई थी और गिराए जाने तक मस्जिद ही रही. उसे -विवादित ढांचा- कैसे और क्यों कहा जा सकता है. विवादित तो वह स्थान है, मस्जिद के अंदर का, जहां भगवान राम का जन्म मानते हैं हिन्दू संगठन. तो अगर लिखना ही होगा तो ये लिखेंगे कि —बाबरी मस्जिद के अंदर का विवादित स्थल—-. बाबरी मस्जिद की इमारत को -विवादित ढांचा- किस तर्क के आधार पर लिखा जा सकता है दोस्तों???!!! और जो लिखते हैं, वो मेरी समझ से भारी तथ्यात्मक चूक करते हैं. और यही चूक एबीपी न्यूज ने अपने कार्यक्रम -प्रधानमंत्री- में की. पूरे प्रोग्राम में इसके प्रोड्यूसर ने बाबरी मस्जिद को -विवादित ढांचा- बताया. पता नहीं, इतने महत्वपूर्ण प्रोग्राम के ऑन एयर होने से पहले वरिष्ठ लोग इसे देखते भी हैं या नहीं.

हास्यास्पद ये रहा कि एबीपी न्यूज तो पूरे कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद को -विवादित ढांचा- बताता रहा लेकिन जिन Experts-Journalists की राय वह इसमें दिखा रहा था, जिन्होंने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना को अपनी आंखों से देखा था, वो सब इसे -मस्जिद- ही कहते रहे. किसी ने भी इसे -विवादित ढांचा- नहीं बताया. एबीपी न्यूज ने इस प्रोग्राम में वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी और शीतला प्रसाद की byte दिखाई, उनकी राय बताई. इन दोनों ने उस ढांचे को -मस्जिद- कहकर ही संबोधित किया, -विवादित ढांचा- नहीं कहा. लेकिन एबीपी न्यूज इसे लगातार -विवादित ढांचा- कहकर संबोधित करता रहा, जो मेरी समझ से तथ्यात्मक रूप से एक बहुत भारी चूक थी और दर्शकों को गुमराह करने की कवायद. बतौर दर्शक एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय न्यूज चैनल पर ऐसी गलती देखना अच्छा नहीं लगा.

तो जो मित्र बाबरी मस्जिद को -विवादित ढांचा- बताने पर तुले थे, मेरे ख्याल से उनका भ्रम अब दूर हो गया होगा. यह -विवादित ढांचा- नहीं है, इसे ऐसे लिखा जा सकता है कि -बाबरी मस्जिद के अंदर का विवादित स्थान या स्थल— यह ढांचा एक मस्जिद थी, इसमें कोई विवाद नहीं है दोस्तों.

पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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