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एमडी से शिकायत- इंचार्ज हम लोगों से वसूली कर रहा है!

गोरखपुर। जनसंदेश का तिलिस्म दो माह के अन्दर ही टूटने लगा। स्थानीय डेस्क इंचार्ज के उत्पीड़न और भ्रष्ट प्रवृत्तियों के कारण अब यहां के पत्रकारों का मोहभंग होने लगा है. हालत यह है कि सम्पादक डा. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी के दिखाये गये झूठे सब्जबाग से उबकर अब ईमानदार व तेज तर्रार पत्रकार इस संस्थान को अलविदा कहने लगे हैं. इसकी शुरुआत किया है आई-नेकस्ट छोड़ कर जनसंदेश ज्वाइन किये अनुराग तिवारी ने. उन्होंने स्थानीय डेस्क इंचार्ज राजीव रंजन तिवारी के मूर्खतापूर्ण निर्णयों और पहले माह में ही किश्तों में वेतन वितरण से क्षुब्ध हो इस्तीफा देकर लखनऊ चले गये.

गोरखपुर। जनसंदेश का तिलिस्म दो माह के अन्दर ही टूटने लगा। स्थानीय डेस्क इंचार्ज के उत्पीड़न और भ्रष्ट प्रवृत्तियों के कारण अब यहां के पत्रकारों का मोहभंग होने लगा है. हालत यह है कि सम्पादक डा. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी के दिखाये गये झूठे सब्जबाग से उबकर अब ईमानदार व तेज तर्रार पत्रकार इस संस्थान को अलविदा कहने लगे हैं. इसकी शुरुआत किया है आई-नेकस्ट छोड़ कर जनसंदेश ज्वाइन किये अनुराग तिवारी ने. उन्होंने स्थानीय डेस्क इंचार्ज राजीव रंजन तिवारी के मूर्खतापूर्ण निर्णयों और पहले माह में ही किश्तों में वेतन वितरण से क्षुब्ध हो इस्तीफा देकर लखनऊ चले गये.

लखनऊ में ज्वाइन करने के बाद अनुराग तिवारी ने डा. शैलेन्द्र मणि को एक लम्बा चौड़ा ईमेल भेज कर जनसंदेश में चल रहे कुचक्रों और प्रतिभावान पत्रकारों को हतोत्साहित करने वाले स्थानीय डेस्क प्रभारी के कार्यां की विस्तृत जानकारी दी. मगर डा. शैलेन्द्र मणि इसके बाद भी मौन रहे. ताजी सूचना है कि होली के चार दिन पूर्व स्थानीय डेस्क के रिपोर्टरों से होली गिफ्ट के रूप में किसी से खोवा, किसी से शराब, किसी से ड्राईफ्रूट, साड़ी कपड़ा आदि लाकर देने को कहा गया. बताते हैं कि खोवा मनीष शुक्ला ने दिया, शिव सिंह ने दो बोतल शराब लाकर दिया, नीरज श्रीवास्तव ने साड़ी कपड़ा बच्चों की पिचकारियां आदि लाकर दिया. उत्कर्ष श्रीवास्तव से ड्राईफ्रूट लाकर देने को कहा गया. इन्हीं में से किसी ने इस वसूली की शिकायत कंपनी के एमडी अनुज पोद्दार तक कर दी.

यह पूरी कहानी पिछले कई दिनों से गोरखपुर के मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है. उल्लेखनीय है कि अभी कुछ माह पूर्व ही सपा नेता लाल अमीन द्वारा एक प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद पत्रकारों को पांच पांच सौ रुपये नकद देने का शिव सिंह ने कड़ा विरोध किया था और शिव सिंह की इस ईमानदारी पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने उन्हें सम्मानित भी किया था. मगर आज यही ईमानदार अपनी नौकरी बचाने एवं वेतन बढ़वाने के लिए अपने इंचार्ज के नाजायज मांगों के आगे झुकने को मजबूर हो गया. आश्चर्य यह है कि सारी कहानी सार्वजनिक हो जाने के बाद भी डा. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी मौन हैं. देखना यह है कि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुज पोद्दार कोई कड़ा कदम उठाते हुए ईमानदार पत्रकारों की हौसला अफजाई करते हैं या मौन साध कर जनसंदेश गोरखपुर में लूट की खुली छूट को प्रोत्साहित करेंगे.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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