यदि मध्य प्रदेश में पत्रकारों पर ऐसे ही हमले और एफआईआर होती रही तो तो निकट भविष्य में ऐसे सरकारी आदेश जारी होने की संभावना है:- 1. विधानसभा भवन में पत्रकारों का वीडियो-स्टिल कैमरा/वॉइस रेकॉर्डर लेकर आना वर्जित है। 2. वल्लभ भवन, सतपुड़ा भवन, विंध्याचल भवन, पर्यावास भवन में पत्रकारों का प्रवेश वर्जित है। 3. पत्रकार सूचना का अधिकार के माध्यम से जानकारी प्राप्त करें। अधिकारियों/कर्मचारियों को अनावश्यक परेशान न करें।
4. पत्रकार आवेदन देकर अधिकारियों से समय प्राप्त करें। बिना समय लिये आने पर पत्रकार के विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रकरण दर्ज कराया जायेगा। 5. बिना समय लिये आने पर यदि कोई अनहोनी दुर्घटना/टूट-फूट होती है तो उसके लिये पत्रकार उत्तरदायी होगा। 6. शासकीय कार्यालय परिसर में पत्रकार की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं पत्रकार की होगी। 7. शासकीय अधिकारियों द्वारा पत्रकारों के विरुद्ध की गई शिकायत पर थाना प्रभारी अविलंब एफआईआर दर्ज कर पत्रकार को गिरफ्तार कर चालान प्रस्तुत करेंगे। 8. प्रत्येक कार्यालय में पत्रकार पीड़ित अधिकारी/कर्मचारी संघों का गठन किया जावे। 9. सरकार की ओर से पत्रकार विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु राज्य स्तर पर एक प्रकोष्ठ गठित किया जाता है, जिसका प्रभारी श्री एसएस भंडारी को बनाया जाता है। श्री भंडारी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर इसी अनुसार समस्त सुविधायें तत्काल प्रभाव से प्रदान की जाती हैं।
भोपाल की घटना पर सभी पत्रकारों का ध्यान आकृष्ट करने हेतु प्रेषित।
जितेन्द्र जायसवाल
भोपाल





