दिल्ली : परिंदों को मिलेगी मंज़िल, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं। वही लोग खामोश रहते हैं अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं।। ..ये पंक्तियां शायद एसडी चौहान जैसे लोगों के लिये ही लिखी गयी है जो पैर से विकलांग होने के बाद भी एक लंबे अरसे से मानव सेवा में लगे हुए हैं। श्री चौहान धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरी पेशे से करीब से जुड़े हैं और देश के सबसे प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से जुड़े हुए हैं।
दिल्ली की दौड़ती भागती जिन्दगी में भी श्री चौहान ने खुद को अपनी मातृभूमि की माटी की महक से दूर नहीं किया साथ ही पिछले 18 सालों से न सिर्फ मऊ जनपद के बल्कि पूर्वांचल के सभी जिलों से आने वाले आगंतुकों को दिल्ली में खुले दिल से स्वागत करते हैं और एम्स जैसे संस्थान में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराते हैं।
श्री चौहान का एक वृहद स्वभाव ही है कि उन्होंने अपने को न सिर्फ पेशे से बांधे रखा बल्कि इससे इतर सामाजिक सरोकारों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते रहे। तन-मन से सेवक और विचार से संवेदनशील श्री चौहान की पहल पर ही एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ''राजनीति के बदलते स्वरुप और पत्रकारों की भूमिका'' पर चर्चा की गई। चर्चा के दौरान श्री चौहान नें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कलमकारों से समाज में अपनी सार्थक भूमिका निभाने की अपील की।


श्री चौहान की यह अपनी माटी से लगाव का नतीजा था कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में उन्होंने अपने जिले व आस पास के पत्रकारों को मीडिया के महारथियों के कतार में समान अधिकार व सम्मान दिया। इस कार्यक्रम के दौरान श्री पवन गौर व श्री एस डी चौहान नें गांडीव व पूर्वांचल संदेश जैसे तमाम पत्र पत्रिकाओं में बतौर संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार श्री अर्जुन सिंह को अंगवस्त्रम और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। विचार गोष्ठी में मऊ से आकर दिल्ली की पत्रकारिता में परचम लहराने वाले पत्रकार शामिल हुए। साथ ही अपने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहारा समय के चैनल हेड रजनीकांत सिंह और संचालन वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन दूबे ने की।
प्रेस विज्ञप्ति





