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एसएसपी आशुतोष ने धर्मवीर का पैर छूकर कहा : माफ कर दीजिए

: गोरखपुर में अमर उजाला के पत्रकार की सरेआम पिटाई का मामला : स्‍थानीय संपादक ने कहा, एसएसपी इस मसले पर आपस में बात करें : पांव छूकर माफी मांगना और सार्वजनिक पिटाई अलग-अलग बातें हैं : गोरखपुर : पत्रकार की सरेआम पिटाई करने के भड़के विवाद को सुलझाने की कवायद के तहत गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने आखिर गिरगिट की तरह रंग बदल लिया। अमर उजाला के स्‍थानीय संपादक के चैम्‍बर में आशुतोष पहुंचा और धर्मवीर सिंह के पैर छूकर उनसे सॉरी बोल दिया। लेकिन धर्मवीर इस मसले पर अब झुकने के मूड नहीं है।

: गोरखपुर में अमर उजाला के पत्रकार की सरेआम पिटाई का मामला : स्‍थानीय संपादक ने कहा, एसएसपी इस मसले पर आपस में बात करें : पांव छूकर माफी मांगना और सार्वजनिक पिटाई अलग-अलग बातें हैं : गोरखपुर : पत्रकार की सरेआम पिटाई करने के भड़के विवाद को सुलझाने की कवायद के तहत गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने आखिर गिरगिट की तरह रंग बदल लिया। अमर उजाला के स्‍थानीय संपादक के चैम्‍बर में आशुतोष पहुंचा और धर्मवीर सिंह के पैर छूकर उनसे सॉरी बोल दिया। लेकिन धर्मवीर इस मसले पर अब झुकने के मूड नहीं है।

बता दें कि अमर उजाला के युवा पत्रकार धर्मवीर सिंह को गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने उस समय बुरी तरह डंडा-लात से पीट कर दिया था, जब जाम हटाने की पुलिस कार्रवाई के तहत नागरिकों की पिटाई शुरू हो गयी थी। जब पुलिसिया तौर-तरीके पर धर्मवीर सिंह ने ऐतराज किया तो आशुतोष ने कार से उतर कर उनकी भी पिटाई कर दी थी। भद्दी गालियां देते हुए आशुतोष ने सरेआम धर्मवीर को सड़क पर पटका और घसीट कर कार से रौंद डालने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं, आशुतोष का पुलिसिया तांडव इतने से भी नहीं शांत नहीं हुआ, उसने धर्मवीर के मुंह में डंडा डालते हुए जान मार देने की धमकी तक दी।         

बताते हैं कि एक स्‍थानीय डिग्री कालेज में छात्रसंघ महामंत्री रहे धर्मवीर मेधावी छात्र रहे हैं। राष्‍ट्रीय सेवा योजन के तहत वे अपने सर्किल के प्रमुख के तौर पर समाजसेवा के लिए खासे मशहूर रहे हैं। धर्मवीर सिंह की सेवाओं को समाजसेवा को कालेज और समाज ने ही नहीं, बल्कि देश ने भी प्रशंसित किया है। धर्मवीर सिंह को उनकी सेवाओं के सराहते हुए राष्‍ट्रपति ने पदक देते हुए सम्‍मानित किया है। छात्र नेता की जुझारू छवि रखने वाले एक जांबाज पत्रकार की तौर पर पहचाने जाते हैं। लेकिन गोरखपुर के एसएसपी ने विगत दिनों धर्मवीर सिंह के साथ जो सुलूक किया, उससे पूरा छात्र समुदाय और पत्रकार ही नहीं, शहर के नागरिक भी स्‍तब्‍ध रह गये हैं। घटना के बाद से ही आशुतोष की इस करतूत के खिलाफ शहर का गुस्‍सा भड़क उठा। मामला गरम और भड़क कर देखा आशुतोष ने अपने पैंतरे बदल दिया और गिरगिट की तरह अपना रंग बदलते हुए डैमेज-कंट्रोल की कवायद में जुट गया।        

बताते हैं कि अगले ही दिन आशुतोष ने अमर उजाला के दफ्तर संपर्क किया और उसके बाद सीधे स्‍थानीय संपादक के चैंबर पहुंचा। बताते हैं कि आशुतोष ने कहा कि इस मसले को खत्‍म कर दिया जाए, लेकिन स्‍थानीय संपादक ने इस मसले पर हस्‍तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। स्‍थानीय संपादक का कहना था कि पीडि़त को ही इस मसले पर फैसले का अधिकार है इसलिए अगर आशुतोष को किसी से भी कुछ भी कहना है, तो सीधे धर्मवीर सिंह से भी बात करनी चाहिए। इस बातचीत के दौरान वहां मौजूद लोगों के अनुसार इसके बाद धर्मवीर सिंह को चैंबर में बुलाया गया। पहले तो उस हादसे के चलते बेहद क्षुब्‍ध था, लेकिन लोगों की कोशिश के बाद धर्मवीर सिंह चैंबर में आने पर राजी हुआ। हालांकि उनके तेवर सख्‍त ही रहे।

सूत्रों के अनुसार आशुतोष बहुत रूंआसे स्‍वर में उस घटना का ब्‍योरा दिया। आशुतोष का कहना था कि उस समय बहुत थका और तनाव में था, इसीलिए उससे यह बर्ताव हो गया। लेकिन सूत्रों के अनुसार धर्मवीर सिंह ने टका सा जवाब दिया कि थकान या तनाव रहने का मतलब यह कैसे हो सकता है कि लोग किसी नागरिक को सरेआम गालियां देते हुए लात-जूतों-डंडों से वहशी तरीके से पीट दें। धर्मवीर का कहना था कि अगर यह हादसा किसी सिपाही या दारोगा से किया गया तो एक बार तो उसे क्षम्‍य किया जा सकता है, लेकिन एसएसपी जैसे बड़े दारोगा की करतूत को सहन कैसे किया जा सकता है।

बताते हैं कि इस पर आशुतोष ने बिना किसी बात को आगे बढ़ाये धर्मवीर सिंह के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया। आर्द्र स्‍वर से आशुतोष सीधे वहां सामने कुर्सी पर बैठे धर्मवीर सिंह के नीचे झुका और धर्मवीर के पैरों को छूकर बोला – अपराध हो गया मुझसे, माफ कर दीजिए। भड़ास4मीडिया से बातचीत में बातचीत पर धर्मवीर सिंह ने साफ कहा कि आशुतोष ने मेरे पैर छूकर माफी मांग ली है। लेकिन धर्मवीर सिंह ने यह भी कह दिया कि पांव छूकर माफी मांगना और सार्वजनिक पिटाई अलग-अलग बातें हैं। अब सवाल यह है कि आखिर जब आशुतोष ने अपनी जिस करतूत के लिए धर्मवीर सिंह के पैर छूकर मांगी है, उसे प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बीपी सिंह ने किस आधार पर एक गलफहमी करार दे दिया था। इसके पहले बीपी सिंह का बयान था कि स्‍कूटर के विवाद पर शुरू हुआ विवाद अब सुलझ गया है और दोनों ही पक्ष शांत हैं। सवाल यह भी है कि क्‍या किसी पीडि़त के पैर छूकर माफी मांगने मात्र से ही विवाद सुलझा जा सकता है। और मामला इतना क्‍या बड़ा था कि एसएसपी को अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर उस पत्रकार के पैर छूना पड़ता।

लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट. कुमार सौवीर यूपी के जाने माने पत्रकार हैं. दैनिक जागरण, दैनिक भास्‍कर, हिंदुस्तान, महुआ, एसटीवी समेत कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. सौवीर अपने बेबाक बयानों और दमदार लेखन के लिए जाने जाते हैं. उनसे संपर्क [email protected] और 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.  

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