इटावा के एसएसपी राजेश मोदक ने जनपद के पत्रकारों को शराब, भांग और बीयर की दावत परोसी। मौका था होली मिलन का और स्थान था एसएसपी का आवास, जहाँ Blenders pride (शराब) की बोतलों और भांग की बर्फी संग पत्रकारों और एसएसपी का होली मिलन समारोह संपन्न हुआ। क्या पुलिस की नज़र में पत्रकार नशेड़ी होते हैं या पत्रकारों की औकात शराब की बोतल और भांग की बर्फी हैl कुछ भी हो ऐसा होली मिलन इटावा के इतिहास में पहली बार हुआ जब एसएसपी ने शराब और भांग के साथ पत्रकारों का अपने आवास पर स्वागत कियाl
पुलिस विभाग लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिये बजट के अभाव बताते हुए मृतकों के शव को नदियों में बहा देता है। और रोना रोते है बजट के न मिलने का, लेकिन पत्रकारों के लिये Blenders pride (शराब) की बोतलें और भांग की बर्फी का इंतजाम कहाँ से हुआ चलिए हम बताते हैं कि पुलिस विभाग पत्रकारों की सेवा कहाँ से करता है। इनके पास अलग से कोई बजट तो है नहीं और एसएसपी अपनी सेलरी से तो पत्रकारों की इस दावत का इंतजाम करेंगे नहीं, तो निश्चित ही इसकी जिम्मेदारी किसी सीओ को सौंपी गयी होगी और सीओ ने किसी थानेदार को और थानेदार ने किसी सिपाही को, तो सिपाही ने अपनी सैलरी से तो किया नहीं होगा इंतजाम। इसलिए जायज सी बात है कि जनता का खून चूसकर इस इंतजाम को किया गया होगा।

चलिए इंतजाम से हटकर अब होली मिलन पर आते हैं। शराब और बियर की बोतलों व भांग की बर्फी को देखकर दिन दहाड़े एसएसपी आवास में कुछ निर्लज्ज टूट पड़े। ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा कप्तान के आवास में पीने का। खुल गयी बोतलें और जम कर छलके जाम। कुछ वरिष्ठ अपनी वरिष्ठता का ख्याल रखते हुए शराब और भांग की बर्फी से दूर रहे, उन्होंने कप्तान से होली मिलकर कोल्ड ड्रिंक से काम चलाया। इटावा के इतिहास में ऐसा आयोजन पहली बार हुआ तो नशेड़ियों का दिल बाग़ बाग हो गयाl जबकि कोई आम आदमी या पत्रकार किसी होटल में शराब पी रहा हो तो पुलिस क्या हश्र करती है, ये सभी जानते हैंl
इटावा के पत्रकार विकास मिश्रा की रिपोर्ट.






