नयी दिल्ली : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सुरक्षा से जुडे एसपीजी कमांडो की बदसलूकी के कारण कल मीडियाकमियो ने उनके कार्यक्रम और बाद मे कांग्रेस के संवाददाता सम्मेलन का बहिष्कार कर सत्तारूढ पार्टी को हैरत में डाल दिया। बुरे बर्ताव का शिकार हुए पत्रकारों का गुस्सा इस कदर बढ गया कि कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा और पार्टी के प्रवक्ता राज बब्बर ने उन्हें मनाना चाहा लेकिन मीडिया टस से मस नहीं हुआ।
कांग्रेस और मीडिया के बीच यह टकराव उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने गुजरात में अपनी छात्र शाखा की विश्वविद्यालय के चुनाव में जीत को प्रचारित करने के लिए मीडियार्मियों को बुलाया था। इस आयोजन में राहुल गांधी गुजरात से आए कांग्रेस के छात्र नेताओं से चार बजे मिलने वाले थे। गांधी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैमरामैन और फोटो पत्रकार आधे घंटे पहले 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पहुंच गए। लेकिन तब तक एसपीजी के सुरक्षा संबंधी उपकरण नहीं आए थे। ऐसे में उन्होंने पत्रकारों को मुख्यालय से बाहर निकलने को कहा।
इसके बाद पता चला कि गांधी साढे चार बजे छात्र नेताओं से मिलेंगे। इस पर एसपीजी एक बार फिर हरकत में आ गई और सुरक्षा जांच को लेकर पत्रकारों और एसपीजी कर्मियों के बीच नोकझोक हुई। सुरक्षाकर्मियों की बदसलूकी जब निहायत बढ गई तो मीडियाकर्मियों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। पत्रकारों, कैमरामैन और फोटो पत्रकारों के बीच अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई दी और राहुल गांधी के कार्यक्रम में कोई भी मीडियाकर्मी नहीं गया।
बाद में कांग्रेस ने मीडिया को संदेश भेजा कि पार्टी की नियमित ब्रीफिंग शाम साढे पांच बजे होगी। लेकिन कांग्रेस का मीडिया रूम एकदम वीरान पड़ा रहा। पार्टी की ब्रीफिंग करने आए राज बब्बर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जमा पत्रकारों को मनाने के लिए आए लेकिन वह अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हुए। दरअसल कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों के बीच असंतोष पिछली कई घटनाओं से बढता जा रहा था, जिसका नतीजा आज के बहिष्कार के रूप में हुआ। कुछ दिन पहले बजट में 'एक रैंक एक पेशन' का श्रेय लेने के लिए गांधी ने प्रेस को बुलाया था लेकिन सुरक्षा के तामझाम के कारण बहुत कम पत्रकार ही दस जनपथ में प्रवेश कर पाए थे। पत्रकारों और गांधी के बीच एसपीजी की सुरक्षा एक दीवार और खटास बनकर सामने खड़ी हो गई है और यह आक्रोश उसी का परिणाम है।






