मुंगेर। ‘‘हिन्दुस्तान घोटाला क्या है, कैसे हुआ और इतने वर्षों तक यह घोटाला किन लोगों के संरक्षण में चलता रहा?'' यह सीधा और सपाट प्रश्न मुंगेर के पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन ने 27 फरवरी, 2012 को अपने कार्यालय कक्ष में एक बार फिर याचिकाकर्ता मन्टू शर्मा और उनके अधिवक्ता काशी प्रसाद और श्रीकृष्ण प्रसाद के समक्ष रखा। उन्होंने चेतावनी भी दी कि प्रश्नों का जवाब साक्ष्य के आधार पर नहीं मिलने पर मुकदमा खारिज कर दिया जाएगा।
वरीय अधिवक्ता काशी प्रसाद ने इस सनसनीखेज और चर्चित हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले के संबंध में पुलिस अधीक्षक के समक्ष साक्ष्य के साथ बिन्दुवार जो जवाब दिया, उस जवाब और प्रश्न को पेश कर रहे हैं अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद। श्रीकृष्ण प्रसाद पूरी बहस के दौरान वरीय अधिवक्ता काशी प्रसाद को सहयोग कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक ने चौथी बार सूचक मंटू शर्मा और उनके अधिवक्ता काशी प्रसाद और श्रीकृष्ण प्रसाद को अभियोजन के पक्ष में साक्ष्य को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
स्मरणीय है कि मुंगेर की कोतवाली पुलिस मुकदमा संख्या -445/2011 में कथित 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले की जांच कर रही है। कोतवाली पुलिस ने थाना में याचिकाकर्ता मंटू शर्मा के फर्दबयान पर मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष सह संपादकीय निदेशक शोभना भरतिया, प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, स्थानीय संपादक अकु श्रीवास्तव और बिनोद बंधु के साथ मुद्रक के विरुद्ध प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 8 बी, 14 और 15 और भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 471 और 476 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। नीचे एपी द्वारा पूछे गए प्रश्न एवं उसके उत्तर –
एसपी – ‘‘दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला क्या है?‘‘
अधिवक्ता — ‘‘हिन्दुस्तान दिल्ली से मुद्रित, प्रकाशित और वितरित होता है। प्रकाशक अमित चोपड़ा हैं। इस अखबार का रजिस्ट्रेशन नम्बर -509(नई दिल्ली) है ।रजिस्ट्रेशन डेट 23 मार्च, 2011 है। इसी नाम का ’हिन्दुस्तान‘ का संस्करण नए समाचार और बदले हुए स्वरूप में पटना (बिहार) से मुद्रित, प्रकाशित और वितरित होता है। इस हिन्दुस्तान का रजिस्ट्रेशन नम्बर -44348/1986/पटना है।
फिर, इसी नाम का ‘हिन्दुस्तान‘ का ‘मुंगेर संस्करण‘ वर्ष 2001 के 3 अगस्त से भागलपुर से अबतक लगातार मुद्रित और प्रकाशित हो रहा है और मुंगेर जिले के पाठकों के बीच वितरित होता आ रहा है। फिर भी कंपनी ने मुंगेर संस्करण को मुद्रित, प्रकाशित और मुंगेर जिले के पाठकों के बीच वितरित करने के लिए प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्स एक्ट, 1867 के तहत प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली से रजिस्ट्रेशन नम्बर अब तक प्राप्त नहीं किया है और प्रारंभ से अब तक अर्थात पूरे साढ़े दस वर्षों से अवैध ढंग से हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का प्रकाशन और वितरण मुंगेर जिला में करता आ रहा है।
हिन्दुस्तान, मुंगेर संस्करण का विज्ञापन घोटाला यह है कि जब हिन्दुस्तान (मुंगेर संस्करण) का 03 अगस्त, 2001 से रजिस्ट्रेशन नहीं रहने के बावजूद कंपनी ने पटना से प्रकाशित एवं मुद्रित हिन्दुस्तान का रजिस्ट्रेशन नम्बर -44348/86 को मुंगेर संस्करण हिन्दुस्तान में जालसाजी, धोखाधड़ी और ठगी की नीयत से लगातार 30 जून, 2011 तक छापता रहा। फर्जी रजिस्ट्रेशन नम्बर अखबार पर छापकर हिन्दुस्तान (मुंगेर संस्करण) के सभी नामजद अभियुक्तों ने मुंगेर प्रमंडल के केन्द्र और राज्य सरकार के कार्यालयों से लगभग 200 करोड़ का सरकारी विज्ञापन छल और धोखाधड़ी से प्राप्त किया और सरकारी राजस्व को चूना लगाया।‘‘

अधिवक्ताओं ने आगे बताया कि — ‘‘हिन्दुस्तान (मुंगेर संस्करण) को मुद्रित, प्रकाशित और मुंगेर जिले के ग्राहकों के बीच वितरित करने के पूर्व कंपनी मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, जो पूर्व में मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड और फिर मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड के नाम से हिन्दुस्तान का मुंगेर संस्करण छाप रहा था, को प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्स एक्ट, 1867 के तहत प्रकाशन कार्य प्रारंभ करने के पूर्व जिलाधिकारी (मुंगेर) के समक्ष विहित प्रपत्र में घोषणा करना, कंपनी रजिस्ट्रार से अनुमति प्राप्त करना और भारत सरकार के प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली से पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य था, परन्तु कंपनी (मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड और अब मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड) ने आज तक नहीं किया।
सभी अभियुक्तगण 03.08.2001 से कंपनी का नाम बदल-बदल कर कानून को ठेंगा दिखाकर हिन्दुस्तान मुंगेर संस्करण छापते रहे और साढ़े दस वर्षों तक बिना निबंधन का हिन्दुस्तान मुंगेर संस्करण छापा और अखबार में हिन्दुस्तान (पटना) संस्करण का रजिस्ट्रेशन नम्बर छापकर केन्द्र और राज्य सरकार को धोखा देकर 200 करोड़ का विज्ञापन हासिल कर राजस्व लूट का विश्वव्यापी मिसाल कायम किया। आज भी कंपनी बिना रजिस्ट्रेशन का राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, भारतीय रेल, बिहार लोक सेवा आयोग और अन्य सरकारी संस्थाओं का विज्ञापन हिन्दुस्तान मुंगेर संस्करण में अवैध, गैरकानूनी ढंग से डंका की चोट पर छाप रही है और सरकारी राजस्व को चूना लगा रही है।‘‘
एसपी– ‘‘हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला हुआ और अवैध ढंग से कंपनी ने सरकारी विज्ञापन वसूला और अनैनित लाभ प्राप्त किया, इसका साक्ष्य क्या है?‘‘
अधिवक्ता– ‘‘बिहार सरकार के तत्कलीन मुख्य सचिव प्रेम प्रसाद नैय्यर ने दिनांक 13 जुलाई, 1981 और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव राजेश भूषण ने वर्ष 2008में अलग-अलग बिहार सरकार की विज्ञापन नीति प्रकशित की और राज्य सरकार के हर विभाग के विभाग प्रमुखों को दैनिक अखबार में सरकारी विज्ञापन भेजने और प्रकाशित करने की शर्त्तें तय कर दीं। विज्ञापन नीति, 1981 में पृष्ठ 02 पर कंडिका 04 में और बिहार विज्ञापन नीति, 2008 के पृष्ठ -01 पर कंडिका 03 के (ख) में स्पष्ट उल्लेख है कि ‘‘सरकारी विज्ञापन छापने के योग्य वे समाचार पत्र होंगे, जो प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्स एक्ट, 1867 के अन्तर्गत प्रेस रजिस्ट्रार से निबंधित होंगे।
बिहार सरकार की स्पष्ट विज्ञापन नीतियों के बावजूद अभियुक्तगण ने मुंगेर और भागलपुर में साढ़े दस वर्षों के दौरान पदस्थापित जिला पदाधिकारियों, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पदाधिकारियों, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) के सचिवों, निदेशकों, उप-निदेशक (विज्ञापन) की मिलीभगत से लगभग 200 करोड़ का सरकारी विज्ञापन साढ़े दस वर्षों में छापा और सरकारी राजस्व की लूट मचाई।‘‘
एसपी– ‘‘साढ़े दस वर्षों से चल रहे हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले के लिए कौन-कौन जिम्मेवार हैं?‘‘
अधिवक्ता– ‘‘अपने कार्यालय से स्पष्ट विज्ञापन नीति 1981 और 2008 का निर्माण कर बिहार के सभी आयुक्त, जिला पदाधिकारी, उप-विकास आयुक्त, निगम अध्यक्ष आदि को भेजनेवाले सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) में विज्ञापन से जुड़े सभी छोटे-बड़े अधिकारी, भागलपुर और मुंगेर के साढ़े दस वर्षों तक पदस्थापित रहे सभी जिला पदाधिकारी और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के उप-निदेशक और जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी, प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय,नई दिल्ली और डीएवीपी, नई दिल्ली के साढ़े दस वर्षों के पदस्थापित सभी अधिकारी पूर्णरूपेण जिम्मेवार और घोटाला के सहभागी हैं। इस विश्वव्यापी हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में वर्णित विभागों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और उन्हें भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप में अभियुक्त बनाने की जरूरत हैं।‘‘
एसपी- ‘‘मुंगेर के सरकारी कार्यालय से हिन्दुस्तान ने विज्ञापन वसूला, क्या साक्ष्य है?‘‘
अधिवक्ता– ‘‘द हिन्दुस्तान टाइम्स, भागलपुर संस्करण कार्यालय ने अपने कार्यालय के रेफरेन्स नं0- 57, 138, 117, 85, 125, 62, 139, 143, 215, 69, 74, 46 के जरिए वर्ष 2001/02 में बीएसएनएल, मुंगेर एवं अन्य को प्रकाशित विज्ञापन विपत्र जारी किया था, की छायाप्रति श्रीमान को सुपुर्द की जाती है।‘‘
अधिवक्ता ने एसपी से सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप-पत्र समर्पित करने और अभियुक्तों की गिरफतारी के लिए पुलिस टीम भागलपुर, पटना और दिल्ली भेजने की मांग की है।
एसपी– ‘‘इस घोटाले में और कितने संपादक संलग्न हैं?‘‘
अधिवक्ता– ‘‘वर्ष 2001 से अब तक हिन्दुस्तान मुंगेर संस्करण में छपनेवाले सभी संपादक क्रमशः सुनील दूबे, महेश खरे, विजय भास्कर, विश्वेश्वर कुमार एवं अन्य संपादक भी इस घोटाले के लिए दोषी हैं। उन्हें भी अभियुक्त बनाने की जरूरत है।
एसपी- ‘‘क्या अन्य अखबार भी ऐसा कर रहे हैं?‘‘
अधिवक्ता– ‘‘दैनिक जागरण, प्रभात खबर, दैनिक आज भी जिले-जिले से पूरे बदले हुए स्वरूप में बदले हुए समाचार के साथ खास-खास जिलों के लिए अवैध ढंग से प्रकाशित हो रहे हैं और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की मिलीभगत से सरकारी विज्ञापन की लूट मचा रहे हैं।''
अधिवक्ता ने एसपी से इस देशव्यापी मीडिया घोटाले से जुड़े सूचक मंटू शर्मा, वरीय अधिवक्ता काशी प्रसाद, श्रीकृष्ण प्रसाद, अशोक कुमार एवं अन्य को अभियुक्तों से सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया है। इस बीच, हिन्दुस्तान अखबार ने मुकदमे से जुड़े सभी व्यक्तियों को मौत का डर दिखाकर आतंकित करने का अभियान तेज कर दिया है।
मुंगेर से एसके प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.






