बुजुर्ग फोटोग्राफर बिजेंदर त्यागी ने अपने फोटोजर्नलिज्म के लंबे करियर में बहुत से किस्से कहानियां देखे सुने हैं. वे जो भी लिखते हैं, जिस भी भाव से लिखते हैं, उसे उनका संस्मरण और उनकी सोच मानकर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया जाता है. अबकी जो कुछ उन्होंने लिखकर भेजा है, वह काफी विवादास्पद दिख रहा है. मैंने न छापने का फैसला भी कर लिया था. लेकिन उनके लिखे को थोड़ा बहुत संपादित, संयत करने के बाद प्रकाशित कर रहा हूं, क्योंकि उनके अपने अनुभवों संस्मरणों को जाहिर होने से कैसे रोका जा सकता है. निजी तौर पर मैं खुद उनके लिखे को पढ़कर उनसे सहमत नहीं हो पा रहा हूं. पर उनकी अभिव्यक्ति का सम्मान करते हुए उनका एसपी सिंह, अरुण पुरी, जीके सिंह आदि के बारे में लिखा हुआ यह संस्मरण प्रकाशित कर रहा हूं. मैं चाहूंगा कि कोई साथी जरूर त्यागीजी के लिखे का प्रतिवाद करे और तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने लाए. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
अथश्री सुरेंद्र प्रताप सिंह कथा
बिजेंदर त्यागी
आनंद बाजार पत्रिका समूह की रविवार पत्रिका के संपादक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने जब रविवार पत्रिका छोड़ी तो वह नवभारत टाइम्स (मुंबई) में काम करने लगे थे. उन्हीं दिनों एक मधु चतुर्वेदी नामक पत्रकार को भी वहीं पत्रकार के रूप में नौकरी मिल गई. इसी दौरान वहां पर एक सुंदर युवती भी काम करती थी. सुरेन्द्र प्रताप सिंह उसे चाहते थे. परंतु उस महिला की दोस्ती चतुर्वेदी से हो गई. कालचक्र इतनी तेजी से घूमा कि महिला और चतुर्वेदी की शादी हो गई.
थोड़े समय के पश्चात मधु चतुर्वेदी और उनकी पत्नी का मुंबई से दिल्ली नवभारत टाइम्स में स्थानान्तरण हो गया. दोनों का वैवाहिक जीवन ठीकठाक चल रहा था. सुरेन्द्र प्रताप सिंह मुंबई से दिल्ली नवभारत टाइम्स के संपादक बन कर आ गए. कहने वाले कहते हैं कि सुरेन्द्र प्रताप सिंह के मन में वेदना थी. सुरेन्द्र प्रताप सिंह मधु चतुर्वेदी को प्रताड़ित करने लगे. एक दिन मधु चतुर्वेदी को नवभारत टाइम्स से हटाकर सांध्य टाइम्स में रख दिया. इससे मधु चतुर्वेदी कुंठाग्रस्त हो गए. वह शराब पीने लगे. शराब की इस लत से घर में आपसी कलह रहता था. मारपीट भी होने लगी थी. पत्नी घर छोड़ कर चली गई.
मधु चतुर्वेदी को पता चला कि पत्नी एमएमटीसी के एक अधिकारी के घर में है. वह पत्नी को लेने वहीं चले गए. वहां दोनों में कहासुनी हुई. पत्नी ने चतुर्वेदी को भगा दिया. इस बात से निराश होकर मधु चतुर्वेदी काफी शराब पीने लगे थे. वह कभी कभी प्रेस क्लब में शराब के नशे में धुत होकर गिर जाते थे. एक दिन चतुर्वेदी प्रेस क्लब में शराब पीते-पीते गिर गए और वहीं पर उनकी मृत्यु हो गई.
उधर, सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने नवभारत टाइम्स के तत्कालीन संपादक राजेन्द्र माथुर को अपना नया मोहरा बनाया. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने नीति निर्धारकों और मालिकों को अख़बार के खर्चों में कमी करने के लिए टाइम्स आफ इंडिया (अंग्रेजी) का हिन्दी में रूपान्तरण करके छापने की सलाह दी. राजेन्द्र माथुर इस बात से व्यथित थे. बाद में राजेन्द्र माथुर की मृत्यु हो गई. अब राजेन्द्र माथुर की जगह सुरेन्द्र प्रताप सिंह नवभारत टाइम्स के पूर्ण संपादक बन गए.
सुरेन्द्र प्रताप सिंह का एक शिष्य दिनमान टाइम्स से बीबीसी में लंदन चला गया था. वह वहां से एफएम रेडियो को भारत में खोलने की कला को सुरेन्द्र प्रताप सिंह से सलाह मशवरा कर ही रहा था कि इंडिया टुडे के मालिक अरुण पुरी ने अपने अखबारी कागज का आर.एन.आई से यह कह कर कोटा बढ़वा लिया था कि हम इंडिया टुडे को विभिन्न भाषाओं में छापेंगे. अरुण पुरी उन दिनों आरएनआई की सलाहकार समिति के सदस्य थे, और अखबारी कागज का विदेश से इम्पोर्ट होता था, जिसमें अनुमति आर.एन.आई देती थी. उस समय अखबारी कागज ब्लैक में बिकता था. कोटा बनने के पश्चात अरुण पुरी वहां से हट गए.
सूत्र बताते हैं कि अरुण पुरी ने काफी पैसे कमाए और उस पैसे से उन्होंने आज तक टीवी चैनल चलाना शुरू किया. इंडिया टुडे की प्रतिष्ठा थी. इसलिए अरुण पुरी और उनके एक पालतू प्रभु चावला की पहुंच बड़े नेताओं और अधिकारी वर्ग में बन गई थी. जब अरुण पुरी को प्राइवेट टीवी चैनल चलाने की इजाजत मिल गई, तभी सुरेन्द्र प्रताप सिंह को नवभारत टाइम्स से यूनियन के विरोध से निकाल दिया गया था, क्योंकि सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने नवभारत टाइम्स को टाइम्स आफ इंडिया का अनुवादित संस्करण निकालने की सलाह दी थी. तत्पश्चात सुरेन्द्र प्रताप सिंह अरुण पुरी के आज तक चैनल में संपादक के रूप में बैठा दिए गए. उन्हीं दिनों उन्होंने एक महिला को अपने घर में रखना शुरू कर दिया. बाद में सुरेन्द्र प्रताप सिंह की मृत्यु हो गई. फिर वह महिला एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी चार्ल्स शोभराज के मित्र दिवांग के साथ रहने लगी जो एनडीटीवी में काम करते थे.
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हमारे प्रेस क्लब के महासचिव जीके सिंह के बारे में एक किस्सा है. सिंह का पंजाब के अलावा वर्तमान के उत्तराखंड में भी किच्छा के आसपास फार्म हाउस था. वह अपने साथ अपने कुछ साथियों को और उनकी पत्नियों को भी ले जाया करते थे. उनकी अपनी पत्नी कैंसर रोग से ग्रसित थीं. एक बार कश्मीर के समाचार पत्र में कार्यरत अपनी महिला मित्र को लेकर वह अपने उत्तराखंड के फार्म हाउस पर पिकनिक मनाने गए थे. वह इस तरह की मौजमस्ती करते रहते थे. एक दफे वह अपने कार्यालय संडे मेल से अपने साथ कई महिला मित्रों को ले गए थे. एक दिन वह प्रेस क्लब से निकल कर गए तो जनपथ और रायसीना रोड पर वह अचेत अवस्था में पड़े थे. उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया परंतु उनकी चेतना वापस नहीं लौटी औऱ उन्होंने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया. उनके शव को प्रेस क्लब के लान में रखा गया था. उनके शव के पास सफेद लिबास में उनकी तीन महिला मित्र खड़ी थी जो काफी दुखी थीं. लोगों के बीच इनका प्रेम तब भी चर्चा का विषय था.
लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी
कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.





