एटूजेड चैनल के अनुभवी संवाददाता अरविंद सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. वे लंबे समय से एटूजेड के साथ जुड़े हुए थे. अरविंद अपनी नई पारी श्री न्यूज के साथ शुरू की है. उन्हें यहां भी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कोर्ट की खबरों को कवर करने वाले अरविंद श्री न्यूज में भी यही जिम्मेदारी निभाएंगे. अरविंद ने अपनी पुरानी और नई पारी को एफबी वॉल पर भी लिखा है.
''कई बार ऐसे लम्हे भी आते हैं कि जब कैसे रिएक्ट किया जाए, समझ ही नहीं आता ..आज एटूजेड से विदा ले रहा हूं ..उस संस्थान से जहां पिछले करीब साढे़ तीन साल से जुड़ा था ..जिस संस्थान ने तिवारी सर, Rajender Tyagi सर औऱ सुशील सर, ज्ञानेन्द्र सर जैसे सर दिये.. जिन्होंने हमेशा मुझे मोटिवेट किया अच्छा करने के लिए … Vidya Shanker Tiwari सर मैं आपको कभी नहीं भूल पाउंगा ..आपके साथ काम करना एक ऐसा अनुभव है ..जैसा अब शायद ही आगे कभी मिले …कसम से… आपने इतना स्नेह दिया कि कभी आज तक आपकी डांट का बुरा नही लगा……आप सिर्फ टीम लीडर नही टीम के दोस्त भी है… और भी बहुत सारे दोस्तों से मिलवाया इस एटूजेड ने …मेरा छोटा लाडला भाई Praney Sharma………. जिसके जरिए मैं खुद को जान पाया… कि मेरे अंदर कितना स्नेह भरा है औऱ मैं किसी भी इंसान से किस हद तक स्नेह कर सकता हूं. ..जिसके जरिए मेरा brotherhood तुष्ट हुआ..
ये इतना लंबा वक्त जिसके साथ ही वजह से कब गुजर गया, पता ही नहीं चला .. बात बात मेरी टांग खिंचाई करने वाली, चालाक लडकियों से सावधान करने वाली ..दिल की साफ मेरी प्यारी दोस्त, बहन Rachana Srivastwa, सुलझा हुआ, हमेशा साथ देने वाला Pravakar Chanchal और Shankar Anand जैसे बडे दिल वाला दोस्त हो ..सिर्फ कोर्ट रूम ही नही बल्कि मौजमस्ती में बराबर का शरीक Ashish Sinha हो. ओल्ड इज गोल्ड को सार्थक करने वाला मेरा पुराना दोस्त Gaurav Singh हो, …और दुनिया मे सबसे जुदा अंदाज वाली मेरी प्यारी सी दोस्त Pooja Singh Bhadula …Deepika Nayal और रचना जैसी ऐसी दोस्त जिसके साथ के बाद गर्लफ्रेंड की जरूरत ही ना पड़े… परदे पर भी मुझसे बतियाने वाले एंकर साथी देवेश, आशीष, सूरज सनवाल औऱ निहिता जैसे दोस्त ..भोला भाला वरूण ..शरारती दीपक, खुद में खोया सा तरूण. कैमरा के साथी विकास, अपनी पहेलियों से मुझे उलझन में डालने वाली मासूम सी रंजना, मिलनसार प्रीति …कैमरे के साथी संदीप, प्रदीप, बल्ली दीपक, अमरेन्द्र ..नितिन भल्ला के साथ शूट पर भी मस्ती …..महेश सर की चुटिकया, मजे लेने वाली तारीफ, पर साथ ही सबको खुश रखने वाली जीजीविषा.. रामवीर सर की चुटीली बातें, शशि सर की आगे बढ़ाने वाली पर कभी भी नाराज कर देने वाली नसीहत. राजीव की नोंक झोंक, आशू के साथ दिल्ली के सौ साल …आशीष चौबे का सहजपन …देवेश भाई की दोस्ती …..और हां कपूर सर और वेद सर …..विदा के वक्त इन्होंने जुड़े रहने के लिए जो सम्मान और स्नेह दिया …वो अनेपिक्षत और बहुत अच्छा अनुभव था ..खूब सारी यादें हैं, कई बार तीखी भी पर सब अपनेपन और स्नेह से भीगी …बहुत कुछ दिया इस संस्थान ने …बहुत कुछ करने का मौका भी मिला ….अब साथ छूट रहा है तो कुछ दरक सा रहा है.. पर ये यादें हमेशा हमेशा के लिए जेहन मे रहेंगी….कई सारे दोस्तों के नाम छूट गये हैं जल्दबाजी पर वो भी कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में मेरे अंदर जुड गये हैं इस संस्थान की इस वजह से..''





