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ए राम पाण्डेय को पत्रकारिता में पीएचडी उपाधि

 

नोयडा शारदा विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे ए राम पाण्डेय को लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग से पीएचडी उपाधि प्रदान की गयी है। श्री पाण्डेय ने प्रो0 एसपी दीक्षित के निर्देशन में जनमत निर्माण में मीडिया की भूमिका-चुनाव के विशेष सन्दर्भ में शीर्षक पर शोध कार्य किया। वर्ष 2007 में ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे लोकप्रिय हिन्दी अखबारों की प्रति भारतीय प्रेस परिषद को जांच एवं कार्यवाही करने के लिये भेजा। जिसमें इस बात की जांच करनी थी कि तमाम समाचार पत्र भी पत्रकारिता कर्म से दूर अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ खड़े दिख रहे थे। यह अलग बात है कि प्रेस परिषद ने पत्र का संज्ञान लेना भी उचित नहीं समझा। 

 

नोयडा शारदा विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे ए राम पाण्डेय को लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग से पीएचडी उपाधि प्रदान की गयी है। श्री पाण्डेय ने प्रो0 एसपी दीक्षित के निर्देशन में जनमत निर्माण में मीडिया की भूमिका-चुनाव के विशेष सन्दर्भ में शीर्षक पर शोध कार्य किया। वर्ष 2007 में ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे लोकप्रिय हिन्दी अखबारों की प्रति भारतीय प्रेस परिषद को जांच एवं कार्यवाही करने के लिये भेजा। जिसमें इस बात की जांच करनी थी कि तमाम समाचार पत्र भी पत्रकारिता कर्म से दूर अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ खड़े दिख रहे थे। यह अलग बात है कि प्रेस परिषद ने पत्र का संज्ञान लेना भी उचित नहीं समझा। 
श्री पाण्डेय ने कंटेंट एनालिसिस, इंटरव्यू एवं केस स्टडी विधियों का प्रयोग करके चुनाव में जनमत निर्माण को जांचने का प्रयास किया। बिहार विधानसभा चुनाव  2010 में चुनाव के दौरान अखबारों के कंटेंट के विश्लेषण करने से पता चला कि ज्यादातर अखबारों ने नेताओं के बयानबाजी को ज्यादा महत्व दिया। शोध ने यह सिद्ध किया कि समाचार पत्र बिहार चुनाव के एजेंडे को सेट करना तो दूर, उसको समझ ही नहीं सके। विकास की जगह पर वे चुनावी गणित, बयानबाजी आदि पर अपना शामियाना तानते रहे। ऐसे हालात के चलते बिहार की जनता ने फैसला लेने में मीडिया की राय को दरकिनार कर दिया यानि बिहार चुनाव ने संकेत दे दिया कि जनमत निर्माण में मीडिया की भूमिका अब संकुचित होती जा रही है।
 
ए राम पांडेय ने चुनाव में जनमत निर्धारण को समझने के लिये पुण्य प्रसून बाजपेयी, राम कृपाल सिंह, उर्मिलेश, प्रसून शुक्ला और शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकारों का साक्षात्कार लिया। इन लोगों के इंटरव्यू ने शोध को सार्थक बनाने में अहम भूमिका निभायी। पेड न्यूज एवं लोकसभा चुनाव 2004 और 2009 के प्रचार अभियान की गहन केस स्टडी से निष्कर्ष निकला कि जनमत निर्धारण में मीडिया की अहम भूमिका है लेकिन कारपोरेट कल्चर हावी होने से पत्रकार जनभावनाओं को समझने में विफल हो रहे हैं। 
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