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‘ऑपरेशन रेल’ के लिए ‘न्यूज एक्सप्रेस’ चैनल बधाई का पात्र है

 दमदार खबर दिखाने का दावा तो तकरीबन सभी चैनल करते हैं लेकिन अगर ख़बरों में वाकई दम हो तभी उनका असर भी दिखता है. न्यूज एक्सप्रेस ने बीते सोमवार को जो स्टिंग ऑपरेशन चलाया उसने ना केवल रेल प्रशासन के होश उड़ा दिए बल्कि चेहरा बचाने की कवायद में कार्रवाई भी आनन-फानन शुरू कर दी गई. न्यूज एक्सप्रेस ने अपने ‘ऑपरेशन रेल’ में भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी. ऑपरेशन की अगुवाई विशेष संवाददाता पंडित आयुष ने की.

 दमदार खबर दिखाने का दावा तो तकरीबन सभी चैनल करते हैं लेकिन अगर ख़बरों में वाकई दम हो तभी उनका असर भी दिखता है. न्यूज एक्सप्रेस ने बीते सोमवार को जो स्टिंग ऑपरेशन चलाया उसने ना केवल रेल प्रशासन के होश उड़ा दिए बल्कि चेहरा बचाने की कवायद में कार्रवाई भी आनन-फानन शुरू कर दी गई. न्यूज एक्सप्रेस ने अपने ‘ऑपरेशन रेल’ में भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी. ऑपरेशन की अगुवाई विशेष संवाददाता पंडित आयुष ने की.

खुफिया कैमरे की मदद से दिखाया गया कि कैसे चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजामात में सेंध लगा सकते हैं आतंकी. रेलवे स्टेशनों पर मुसाफिरों और उनके सामानों की भले ही मुकम्मल पड़ताल होती हो, लेकिन उसी स्टेशन के पार्सल घर से कहीं भी ले जाया जा सकता है मौत का सामान. वो भी पूरे इत्मीनान से.

न्यूज एक्सप्रेस ने इसके लिए एक बक्से में नकली हथियारों का जखीरा रखा. साथ में पीतल के बने नकली कारतूस भी. फिर इस बक्से को दलालों की मदद से नई दिल्ली से कानपुर के लिए बुक कर दिया गया. किसी ने ये सवाल तक नहीं किया कि आखिरकार बक्से में है क्या? रेल पुलिस की आंखों के सामने हथियारों का ये जखीरा दिल्ली से कानपुर के लिए रवाना हुआ और अपने मुकम्मल ठिकाने तक जा पहुंचा.

इतना ही नहीं इस बात की भी पड़ताल की गई कि क्या रेलवे का रवैया हर बार इसी तरह लापरवाही वाला ही होता है. फिर एक मोटरसाइकिल को कानपुर के लिए बुक कराया गया. ना तो नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफेकेट और ना ही दूसरे जरुरी दस्तावेज़. बस हरे-हरे नोटों के ज़ोर पर दलालों ने इसे भी ठिकाने तक पहुंचाने का इंतजाम कर डाला. खुफिया कैमरे के सामने एक नहीं, कई दलालों ने कुबूल किया कि सामान चाहे जो हो वो जहां चाहे पहुंचा सकते हैं.

रेल और रेलवे स्टेशन दोनों ही हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रहे हैं. ये बात  कौन नहीं जानता. बावजूद इसके रेल-प्रशासन के इस रवैये  को देखकर मुसाफिरों के तो जैसे रोंगटे खड़े हो गए. त्योहारों  के मौसम में अगर कोई अनहोनी हो गई तो जाहिराना तौर पर जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है. पार्सल घरों में  ना तो कोई एक्स-रे मशीन है और ना हीं कोई इसबात को लेकर चौकसी कि आखिर पैकेट में बंद सामान है क्या.

ये सच ऐसा था जिसका ना तो सामना करना रेल प्रशासन के बूते में था और ना ही कोई उनके पास कोई जवाब. हां असर इतना जरुर हुआ कि कानपुर सहित दूसरे स्टेशनों के पार्सल घर में चौकसी बढ़ा दी गई और रेल पुलिस बुक किए जाने वाले सामान की पड़ताल में जुट गई.

दिल्ली में भी डीसीएम की अगुवाई में छापेमारी हुई और बीस से भी ज्यादा दलाल गिरफ्तार कर लिए गए. न्यूज चैनल पर दलालों के चेहरों को देखन के बाद प्रशासन को उन्हें पकड़ने में परेशानी भी पेश नहीं आई. न्यूज एक्सप्रेस ने इस स्टिंग ऑपरेशन को दिखाने के पहले ये साफ कर दिया था कि चैनल का मकसद ना तो भारतीय रेल की छवि को धूमिल करना है और ना हीं मुसाफिरों को खौफजदा करना.

मकसद केवल और केवल रेल पुलिस और प्रशासन को नींद से जगाना है कि उठो और देखो कि कैसे लगाई जा सकती है तुम्हारी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध. न्यूज एक्सप्रेस अपने मकसद और दावे पर खरा उतरा है. आखिरकार उसने अंदर की खबर जो दिखाई है.

प्रेस विज्ञप्ति

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