इटावा और औरैया में हिंदुस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कानपुर से लेकर दिल्ली तक के आला अफसर यहां अखबार के अच्छे प्रदर्शन के लिए नाक रगड़ रहे हैं, तमाम उपाय कर रहे हैं, बावजूद इसके यह अखबार लोगों की पसंद नहीं बन पा रहा है. अखबार की कीमत कम करने के बावजूद हिंदुस्तान को लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. औरैया-इटावा में हिंदुस्तान प्रबंधन ने अखबार की कीमत साढ़े तीन रुपये से घटाकर दो रुपये कर दिया है इसके बाद भी प्रसार संख्या में कोई खास इजाफा देखने को नहीं मिल रहा है.
वहीं अमर उजाला ने इटावा में कानपुर से अपने तेजतर्रार पत्रकार प्रदीप अवस्थी को भेजकर हिंदुस्तान के साथ जागरण की भी मुश्किलें बढ़ा दी है. ब्यूरोचीफ के रूप में प्रदीप ने कई बड़ी खबरें धड़ाधड़ ब्रेक की, जिसके चलते इन अखबारों के पत्रकारों के सामने भी मुश्किल आने लगा है. हॉकरों को अस्सी पैसा में हिंदुस्तान मिलने के बाद भी प्रसार संख्या में कोई बढ़त नहीं दिख रही है. दिल्ली-कानपुर से आए सेल्स हेड विजय सिंह, चार यूनिटों के हेड दीपक मुखर्जी समेत कई वरिष्ठ लोग इन दोनों जिलों में अखबार की स्थिति को लेकर परेशान हैं. इन लोगों ने कई सेंटरों पर जाकर जायजा लिया, बातचीत की परन्तु अभी तक कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है. अखबार के दो रुपये का होने का भी जमकर प्रचार किया गया, जगह-जगह अखबार के बंडल फेंके गए फिर भी हिंदुस्तान को वह शुरुआत नहीं मिल पाई है, जिसकी प्रबंधन ने उम्मीद की थी.






