Om Thanvi : कँवल भारती की गिरफ्तारी की जितनी निंदा की जाय, कम होगी। सत्ताधारियों में सहनशीलता पहले ही कब थी; अब वह, लगता है, पूरी तरह छीज गई है। साथ ही मैं यह भी सोचता हूँ कि धार्मिक मामलों में टीका करते हुए ज्यादा सावधानी भी बरती जानी चाहिए। Prabhat Shunglu की वाल पर उपलब्ध कँवल भारती की एक पोस्ट विचार की अपेक्षा रखती है कि क्या बगैर समुचित सबूत किसी मुसलिम पर — वह चाहे मंत्री हो या संतरी — रमज़ान में मसजिद गिराने जैसा संगीन आरोप लगाना चाहिए?
29 जुलाई की पोस्ट कहती है कि "आज़म खां … रमज़ान में मदरसा गिरवा सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं।" मेरी आज़म ख़ां से कोई सहानुभूति नहीं; उन्हें घोर अयोग्य नेता मानता हूँ। पर यह भी मानता हूँ कि कंवलजी धार्मिक मामलों की नजाकत समझते हुए अपनी अभिव्यक्ति में अधिक सजगता बरत सकते थे।
फिर भी, इस असावधानी के लिए उन्हें गिरफ्तार करना सत्ता का सरासर दुरुपयोग है। कँवल भारती की जिस पोस्ट का सन्दर्भ है, वह पूरी इस तरह है: "29 जुलाई: उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार ने नोएडा में आईएस ऑफिसर दुर्गाशक्ति नागपाल को निलम्बित करने का कारण यह बताया है कि उन्होंने रमजान के महीने में एक मस्जिद का निर्माण गिरवा दिया था, जो अवैध रूप से सरकारी ज़मीन पर बनायी जा रही थी. लेकिन रामपुर में रमजान के महीने में ही जिला प्रशासन ने एक सालों पुराने इस्लामिक मदरसे को बुलडोज़र चलवाकर गिरवा दिया और विरोध करने पर मदरसा संचालक को जेल भिजवा दिया. पर अभी तक किसी भी ऑफिसर को समाजवादी अखिलेश सरकार ने न निलम्बित किया है और न हटाया है. जानते हैं क्यों? क्योंकि यहाँ अखिलेश का नहीं, आज़म खां का राज चलता है. वह रमजान में मदरसा गिरवा सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं. उनको रोकने की मजाल तो खुदा में भी नहीं है."
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.






