बाराबंकी। पुलिस कस्टडी में फैजाबाद से लखनऊ पेशी से लौटते हुए कचहरी बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपी खालिद मुजाहिद की आज संदिग्ध हालात में मौत हो गयी। मौत के बाद जिला पुलिस प्रशासन में हड़कम्प मच गया। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गये हैं। वहीं आरोपी आतंकियों के हमदर्दों ने अस्पताल में नारेबाजी करनी शुरू कर दी। देर शाम पुलिस कप्तान सैयद वसीम, जिलाधिकारी मिनिस्ती एस ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए जिला अस्पताल का मुआयना किया। सांसद पीएल पुनिया ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
मालूम हो कि 22 दिसम्बर 2007 को बाराबंकी और उत्तर-प्रदेश पुलिस ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन से मौलाना तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद की आरडीएक्स बरामदगी में एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया था। दोनों लोगों के घर वालों का आरोप था कि पुलिस वाले आलिमें इस्तिमा को गिरफ्तार करके फर्जी बरामदगी दिखा दी है। उक्त गिरफ्तारी से पूर्व आजमगढ़ व अन्य जनपदों में धरना प्रदर्शन भी किया गया। इस पूरे मामले में पिछली सरकार ने आरडी निमेष आयोग का गठन कर मामले की जांच करवायी थी। आयोग ने 21 अगस्त 2012 को उत्तर-प्रदेश सरकार अखिलेश को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें दोनो मौलाना के पास आरडीएक्स बरामदगी को गलत बताया गया।
आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद भी सपा सरकार ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए इन लोगों पर मुकदमा वापसी की तैयारी कर ली थी। जिसके तहत पूरे मामले की जांच कर मुकदमा वापसी के लिए जिला जज के यहां राज्य सरकार की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कल्पना मिश्रा ने खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला गर्म हो गया था। भाजपा ने और वकीलों ने जमकर खुशी का इजहार किया था। कचहरी श्रंखलाबद्ध बम विस्फोटों के मामले के आरोपी खालिद मुजाहिद को लखनऊ कारागार से शनिवार को पुलिस लाइन के उपनिरीक्षक रामअवध पुलिस बल के साथ फैजाबाद न्यायालय में शनिवार को तारीख पेशी पर लेकर गये हुये थे। वहां से वापस लौटते समय श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट के आरोपी खालिद मुजाहिद की रास्ते में तबियत खराब हो गयी तो एसआई राम अवध उसे बाराबंकी के जिला अस्पताल के आपात कक्ष में शनिवार की शाम पांच बजकर 25 मिनट पर पहुंचे तो आपात कक्ष में तैनात ईएमओ डाक्टर एसके शुक्ला ने उसे मृत घोषित कर दिया तथा नगर कोतवाली पुलिस को सूचना देते हुए उसके शव को मर्चरी में रखवा दिया है।
सनद रहे कि मई 2007 में गोरखपुर जिले के भीड़ भाड़ वाले इलाके बलदेव प्लाजा, गोलघर चौराहा तथा जलकर भवन के पास साइकिल तथा मोटरसाइकिल पर टिफिन में रखे बमों में सिलसिलेवार धमाका हुआ था। इस मामले में छह लोग जख्मी हो गये थे। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने हरकतुल जेहाद अल इस्लामी के संदिग्ध आतंकवादी तारिक कासमी तथा खालिद मुजाहिद को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से आरडीएक्स विस्फोटक तथा डेटोनेटर की बरामदगी की थी। जिसका मुकदमा बाराबंकी फैजाबाद और गोरखपुर में चल रहा है। शनिवार को फैजाबाद ने इस केस की सुनवाई होनी थी इसलिए संदिग्ध आतंकवादी खालिद मुजाहिद को लखनऊ की पुलिस तारीख पेशी पर फैजाबाद लेकर गई हुई थी। जहां वापस आते समय उसकी तबियत खराब हो गयी। बाराबंकी अस्पताल पहुंचते पहुंचते खालिद मुजाहिद की मौत हो गयी। सूचना मिलते ही जिला अस्पताल परिसर पूरी तरह से पुलिस छावनी बन गया। पुलिस के बड़े-बड़े आला अधिकारी मौके पर पहुंच गये। वहीं खालिद मुजाहिद की मौत पीस पार्टी के कार्यकर्ता आक्रोशित व दुःखी दिखाई पड़े। उन्होंने अस्पताल के अंदर जमकर नारेबाजी की और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
सपा ने खालिद मुजाहिद की मौत को कहा अफसोसनाक
बाराबंकी। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष मौलाना मेराज ने खालिद मुजाहिद की मौत पर कहा कि यह अफसोसनाक है और खास तौर से ऐसे वक्त में यह हादसा हुआ जब हमारी सरकार इन लोगों को छोड़ने के लिए एलान कर चुकी थी। कुछ फिरकापरस्त नाजायज तौर पर उंगली उठा रहे हैं और वह पूरे मामले को उलझाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में यह हादसा होना अफसोस नाक है। खालिद मुजाहिद को बसपा सरकार ने नाहक बंद किया था। इस पर कई बार प्रदर्शन भी हुआ था। लेकिन एसटीएफ और बाराबंकी के डीएम व एसपी ने एक भी न सुनी और कानूनी जाल को मजबूत कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम तन्जीमे अनावश्यक मामले को उठाकर चुनावी ईशू बनाकर इन बेकसूरों को छुड़ाना नहीं चाहते बल्कि मामले को उलझाना चाहते हैं।
पुनिया और पीस पार्टी ने की सीबीआई जांच की मांग
बाराबंकी। पुलिस कस्टडी में खालिद मुजाहिद की मौत पर सांसद पीएल पुनिया ने जिला अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग की है। वहीं पीस पार्टी ने दूसरे प्रदेश की डाक्टरों की टीम बुलाकर पोस्टमार्टम कराने की बात कही है। पुलिस कप्तान सैयद वसीम अहमद से मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा है।
पीरबटावन कांड में शामिल लोग भी इस मौके पर सियासत करते नजर आये
बाराबंकी। सन 1987 में हुए पीरबटावन ईदगाह काण्ड में 16 निहत्थे मुसलमानों को गोली के भेंट चढ़ाने वाले एक सूफी साहब आज भी सक्रिय नजर आये। सूफी साहब के बारे में कहा जाता है कि यह हलाला मास्टर हैं और जिले में कई मामलों में मुस्लिमों को शहीद करवाने से नहीं चूकते। आज यह भी काफी सक्रिय नजर आये। पुलिस की इन पर खास नजर है। वहीं दूसरी तरफ इन संदिग्ध आतंकियों की हिमायत करने वाले वकील भी इस मामले को हत्या का रूप बताने में नहीं चूके।
बाराबंकी से रिजवान मुस्तफा की रिपोर्ट.





