पैसा कमाने के लिए ना जाने क्या-क्या करना पड़ता है. किस तरीके से रंगा सियार बनना पड़ता है. लोगों की आंखों में धूल झोंकना पड़ता है. बेवकूफ बनाना पड़ता है. उनके भावनाओं को उभारना पड़ता है, तब जाकर मिलता है पैसा. ऐसा ही कुछ हरियाणा में दैनिक भास्कर कर रहा है. राज्य में 'कन्या बचाओ अभियान' के नाम पर यह अखबार पैसा कमाओ अभियान चला रहा है.
दरअसल, दैनिक भास्कर ने अभी हाल ही में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ में लड़कियों की घटती अनुपातिक दर को आधार बनाकर एक अभियान शुरू किया है, जिसका नाम उसने 'कन्या बचाओ अभियान' रखा है. अखबार ने शुरुआत में जनसरोकारी आवरण ओढ़ा तथा समाज चिंतक बनकर संदेश दिया कि हम लोग कन्याओं को बचाने के लिए कूद पड़े हैं. लोगों से भी इस अखबार ने योगदान देने की अपील की. लोग नेक काम को देखते हुए इस अभियान से जुड़ने लगे. और इसी के बाद शुरू हो गई धूर्तता!
अखबार के कर्ताधर्ताओं ने हर जिला ऑफिस में इस मुद्दे पर लोगों को बुलाकर परिचर्चा कराई. परिचर्चा को लोगों की बड़ी-बड़ी फोटो के साथ प्रकाशित किया. लोग इस अभियान में हिस्सा लेकर तथा अखबार में छप कर खुश होने लगे. इसके बाद दैनिक भास्कर के लोगों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया. इस अखबार के विज्ञापन विभाग के लोग मार्केट में निकले और विभिन्न प्रोफेशनल जैसे- डाक्टर, व्यापारी से इस अभियान के नाम पर विज्ञापन मांगना शुरू कर दिया.
अखबार द्वारा आयोजित परिचर्चा में ज्यादातर ऐसे लोगों को ही बुलाया गया, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से सबल थे. विज्ञापन विभाग के कर्मी उन लोगों के पास भी पहुंचने लगे जिन्होंने इस परिचर्चा में भाग लिया था. स्कूल वालों से भी विज्ञापन लिया. अब विज्ञापन ऐसे मुद्दे को लेकर था कि ज्यादातर लोग इनकार नहीं कर सके. खासकर वे जो परिचर्चा में लम्बी-लम्बी कह सुनकर आए थे. चाहते या ना चाहते हुए भी लोगों ने अखबार को विज्ञापन देकर लोगों से आह्वान किया कि आप भी बेटी को बचाने में आगे आएं.
हालांकि भास्कर के अपने कर्मचारी ही कह रहे हैं कि प्रबंधन को बेटी बचाने के अभियान से उतना लेना-देना नहीं है, जितना की बेटी बचाने के नाम पर पैसा वसूलना. ये इतना भावनात्क और संवेदनशील मसला है कि ज्यादातर लोग पैसा देने से इनकार नहीं कर रहे हैं. पर लोग लाख टके का सवाल यह भी उठा रहे हैं कि अगर दैनिक भास्कर सचमुच में बेटियों को बचाने के लिए प्रयत्नशील है तो फिर उन लोगों के खिलाफ अभियान क्यों नहीं चलाते जो कन्या भ्रूण हत्या के लिए जिम्मेदार हैं, जो गर्भ में भ्रूण का पता लगाते हैं?






