दोस्तों, आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. हम इस तथ्य के प्रत्यक्ष साक्षी है कि तम्बाकू हमारे स्वाथ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है. हमारे घर-परिवारों में जो भाई-बहिन या बुजुर्ग इस बुरी लत के लती हैं वे या तो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं या फिर उनके आने वाले कल के लिए रोग उन्हें दस्तक दे रहे हैं. ये लत ऐसी है कि जिसे लग जाती है उसका पीछा फिर शरीर के साथ ही छूट पाता है. इस के इस्तेमाल से कैंसर, दांतों के रोग, मानसिक रोग अदि घातक रोग होना लाज़मी है. जो लोग तम्बाकू खाते हैं उनका या तो मुंह कम खुल पाता है या गालों के भीतरी सतह पर सफ़ेद दाग पड़ना और बीडी-सिगरेट के प्रयोग से फेफड़ों का कम काम कर पाना जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है. डाक्टरों द्वारा कहा तो यहां तक जाता है कि कैंसर के चालीस प्रतिशत रोगी तम्बाकू के कारण होते हैं.
इन गंभीर प्रभावों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 83 देशों ने इसके प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगा दिया है. क्या हमारी सरकार भारत को चौरासीवां देश घोषित नहीं कर सकती है जहां तम्बाकू और इसके उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबन्ध घोषित हो. पर वह ऐसा क्यों करें, उसे तो इसमें आनंद आता है कि पब्लिक ज्यादा से ज्यादा कष्ट सहे, वरना सरकार इसके उत्पादन (खेती) पर ही रोक क्यों नहीं लगा देती है जिससे न बांस रहेगा और न बांसुरी बजेगी. पर अगर ऐसा हुआ तो उसकी जेबें भरने के लिए नोट कहाँ से आयेंगे, पैसा पेड़ों पर तो लगता नहीं है (बकौल PM). उसे तो जनता की जान की कीमत पर ही उगाया जा सकता है.
जो उत्पाद इतना घातक है, उसके सम्बन्ध में तो मेरा तो यहाँ तक कहना है कि अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर ही इसका उत्पादन निषेध होना चाहिए. यदि इसके उत्पादन से जेबें भरने के लिए कमाई के आलावा कोई लाभ हो तो उसे मैं जानना चाहता हूँ, जिसके आधार पर सरकार इसके उत्पादन पर रोक नहीं लगा रही है. भाई-बहिनों और मेरे बुजुर्गों, आप बुद्धि का प्रयोग करें और इस तम्बाकू के सेवन से किसी भी तरह पीछा छुड़ा लें, वरना यह आपका पीछा मौत को आपके निकट लाकर ही छोड़ेगी.
Mahesh Saxena





