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कर्मचारियों के मजबूरियां गिनाने के बाद भी नहीं पिघलीं मीना तिवारी

 

महुआ न्यूज़लाइन बंद करने के ऐलान के 25 घंटे बाद महुआ ग्रुप की निदेशक मीना तिवारी बेरोज़गार हुए कर्मचारियों से मुखातिब हुईं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पढ़ी-लिखी, शालीन सी दिखनेवाली मीना तिवारी कर्मचारियों के साथ संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण तरीके से बात करेंगी लेकिन उनका रवैया उम्मीदों के विपरीत और अहंकार से भरा था। उन्होंने बात की शुरुआत में ही कहा कि –‘हम तुम्हे एक महीने का वेतन तो दे रहे हैं ना… फिर क्यों ये तमाशा कर रहे हो, तुमलोगों को शर्म नहीं आती। 

 

महुआ न्यूज़लाइन बंद करने के ऐलान के 25 घंटे बाद महुआ ग्रुप की निदेशक मीना तिवारी बेरोज़गार हुए कर्मचारियों से मुखातिब हुईं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पढ़ी-लिखी, शालीन सी दिखनेवाली मीना तिवारी कर्मचारियों के साथ संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण तरीके से बात करेंगी लेकिन उनका रवैया उम्मीदों के विपरीत और अहंकार से भरा था। उन्होंने बात की शुरुआत में ही कहा कि –‘हम तुम्हे एक महीने का वेतन तो दे रहे हैं ना… फिर क्यों ये तमाशा कर रहे हो, तुमलोगों को शर्म नहीं आती। 
 
जबकि कर्मचारियों ने 124 परिवारों के भविष्य की मजबूरियां भी गिनाई, बावजूद इसके उनके तेवर में कोई फर्क नहीं पड़ा उनके आखिरी शब्द थे,‘पड़े रहो यहां।’ मीना तिवारी के इस तेवर और संवेदनहीन रवैये से कर्मचारियों में काफी रोष है बावजूद इसके उन्होंने अपना संयम नहीं खोया है वो शांतिपूर्ण तरीके से न्यूज़रुम के अंदर धरने पर बैठे हैं अगर इसके बाद भी निदेशक और प्रबंधन का रवैया ऐसा ही रहा तो कर्मचारी महुआ एंटरटेनमेंट और महुआ न्यूज़ बिहार/ झारखंड के प्रसारण को ठप करने के फैसले पर समय से पहले ही अमल कर सकते हैं।
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