कई अखबारों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके और इन दिनों आगरा से प्रकाशित हिंदी दैनिक कल्पतरु एक्सप्रेस के स्थानीय संपादक अरुण कुमार त्रिपाठी के बारे में चर्चा है कि उनकी कल्पतरु ग्रुप से विदाई हो गई है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है. अरुण त्रिपाठी पर कई तरह के आरोप हैं. उनकी कार्यशैली को लेकर काम करने वाले पत्रकारों में खासा रोष है. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक पत्रकार को अपने घर पर कामकाज करने में लगा रखा था. साथ ही उन्होंने कल्पतरु ग्रुप की लाइब्रेरी के लिए आई दर्जनों महंगी किताबें हड़प कर अपने घर ले गए.
चर्चा है कि अरुण कुमार त्रिपाठी की किसी दूसरे मीडिया ग्रुप के साथ बातचीत तय हो गई है, इस कारण वो कल्पतरु एक्सप्रेस को विदा कह गए हैं. बताया जाता है कि उन्होंने अपनी तरफ से एक पत्र प्रबंधन को भेज दिया है और वो आगरा से दिल्ली की तरफ कूच कर गए हैं. कल्पतरु मीडिया के ग्रुप एडिटर पंकज सिंह के बारे में सूचना है कि वे अरुण कुमार त्रिपाठी के अलविदा कह देने के बाद की स्थिति को संभालने में लगे हुए हैं.
यह भी बताया जा रहा है कि अरुण कुमार त्रिपाठी ने जाते-जाते अपने खास पत्रकारों को इस्तीफे के लिए प्रोत्साहित किया. अरुण के करीबी उन कुछ पत्रकारों ने इस्तीफा दे भी दिया है जो मध्य प्रदेश के किसी एक अखबार में नई ज्वायनिंग के लिए बातचीत तय कर चुके हैं. कल्पतरु एक्सप्रेस, आगरा का पूरा संचालन अरुण कुमार त्रिपाठी ही किया करते थे. ग्रुप एडिटर पंकज सिंह केवल मीडिया विमर्श के वक्त संडे के दिन आगरा जाते. बताया जा रहा है कि जाते-जाते अरुण कुमार त्रिपाठी ने उसी पंकज सिंह के खिलाफ एक अघोषित मोर्चा खोल दिया और आरोप लगाने की कोशिश की जिन पंकज सिंह ने अरुण कुमार त्रिपाठी को बेहद मुश्किल वक्त में नौकरी दिलाई. (कानाफूसी)
आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






