भड़ास4मीडिया के संचालक यशवंत सिंह की नोयडा में पुलिस ने जिस अंदाज मे गिरफ्तारी दिखलाई गई है, उससे एक बात साफ हो गई है कि पुलिस ने कहीं ना कहीं, किसी से प्रेरित हो कर यशवंत भाई के खिलाफ इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। खुद पुलिस ही बता रही है कि यशंवत और उनके साथी ने धमकाया, फिर उनका साथी आखिरकार फरार कैसे हो गया और दूसरा बीस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है, जितनी रकम का आरोप लगाया गया है वो खुद में घिनौना आरोप है।
इसके अलावा जान से मारने की धमकी देने का आरोप तो ऐसा होता है कि हर प्राथमिकी में खुद पुलिस ही दर्ज कराती है। नोयडा के जिस एसएसपी के निर्देश पर पुलिस बल ने यशंवत सिंह को गिरफ्तार किया है उनके बारे में यहां पर यह बताने में कोई गुरेज इस लिये नहीं क्यों कि प्रवीण कुमार एक समय इटावा के एसएसपी रह चुके हैं और इटावा में तैनाती के दौरान ही उनके रिश्ते बसपा के बडे़ राजनेताओं से ना केवल बिगडे़ बल्कि बेहद खराब भी हुये। एक समय उनको हटाने की तैयारी कर ली गई थी, इसके बाद उनको शंशाक शेखर मुजफ्फरनगर में एसएसपी के तौर पर तैनात करवाने में कामयाब हो गये।
बसपा का राज खत्म हुआ था तो प्रवीण कुमार को नोयडा मे तैनाती दे गई। ऐसे मे लाजिमी है कि बसपा राज का अफसर अगर सपा राज में भी मजेदार जिले मे तैनात हो जाये तो जाहिर है कि कहीं ना कहीं उनमें निरकुंशता आयेगी। ऐसा ही प्रवीण कुमार के बारे में कहा जा सकता है। यशवंत सिंह को गिरफ्तार करने में जिस तेजी का इस्तेमाल किया गया, वह बताता है कि इतनी तो किसी डाकू और अपराधी को पकड़ने के लिए नहीं दिखाई जाती है। यशवंत की गिरफ्तारी की यह बताती है कि पूरा का पूरा मामला कथित तौर पर तैयार किया गया है। उसकी सच्चाई एक ना एक दिन सामने आ ही जाएगी।
लेखक दिनेश शाक्य इटावा में टीवी पत्रकार हैं.
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