बैतूल : विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट की दावेदारी के पूर्व 'मेरी कमीज तेरी कमीज से ऊजली कैसे' के फार्मूले पर चल रही कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं की एक दूसरे को नीचा दिखाने की मुहिम का शिकार बना एक शराबी पत्रकार जिसे सिर्फ शाम को पीने को चाहिए। उसके समाचार पत्र की आड़ में तथाकथित राजनैतिक चीर हरण का ऐसा घृणित कार्य किया गया जिसमें पूरे जिले के पत्रकारों में स्वयं को इमानादार दिखाने एवं बताने की महत्वाकांक्षा ने उस पत्रकार को जेल की चारदिवारी के पीछे पहुंचा दिया।
नीतिन राज माथनकर एक साप्ताहिक समाचार पत्र ''फर्स्ट डान'' के प्रकाशक एवं संपादक हैं। वे कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद कुमार डागा के खिलाफ लगातार खबरें छापे जा रहे थे। राजनैतिक, सामाजिक और परिवारिक चरित्र हनन के समाचारों से क्षुब्ध होकर पूर्व विधायक के पुत्र निलय डागा ने मानहानि का नोटिस भेजा। लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया नीतिन ने। तब निलय डागा ने उक्त पत्रकार को संदेश भिजवाया कि वह उनके परिवार का चरित्र हनन करना बंद कर दे।
उक्त संदेश को डागा परिवार के घुटने टेकने की नीति समझ कर नीतिन राज माथनकर ने अपनी इच्छाओं को रुपयों में बदल कर एक मुश्त दस लाख की मांग की जो बाद में तयशुदा नीति एवं रीति के तहत दो लाख रुपए हुई। पुलिस ने निलय डागा की फरियाद पर जाल बिछा कर उक्त पत्रकार को दो लाख रुपए की रकम के साथ पकड़ दबोचा। पूरी कार्रवाई का बाकायदा स्टिंग आपरेशन के तहत वीडियो तैयार किया गया। शुरू से लेकर अंत तक की बातचीत की पूरी रिकाडींग की गई तथा पुलिस ने उक्त कार्य में पुलिस अधिक्षक का भी मार्गदर्शन लिया।
नीतिन राज माथनकर पर शाहपुर थाना में भी एक अपराधिक प्रकरण दर्ज है जो कि अनाधिकृत वसूली को लेकर उत्पन्न हुए वाद-विवाद की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। नीतिन राज माथनकर पर मीडिया सेंटर संचालन समिति की आड़ में अनाधिकृत वसूली एवं उक्त राशि के गबन का भी मामला एसडीएम बैतूल के पास जांच के लिए पड़ा है। पूरे झगड़े के पीछे सीलिंग एक्ट के समय आई 32 एकड़ जमीन का मामला है जो दो परिवारों के बीच राजनैतिक वैमनस्ता का कारण बना। इस वैमनस्ता के लिए नीतिन को बकायदा मोहरा बना कर उसे चने के झाड़ पर चढाया गया और जब वह औंधे मुंह गिरा तो उसे उसके हाल पर छोड़ दिया गया।
बैतूल जिले में इस समय पांच सौ से अधिक पत्रकार हैं लेकिन मात्र कुछ लोगो को छोड़ कर बड़े बैनर एवं छोटे बैनर का कोई भी पत्रकार इस मामले में मैदान में नहीं आ सका है। खबर लिखे जाने तक पत्रकार बैतूल जेल में बंद है तथा उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई होना बाकी है। इधर इस घटना को लेकर पूर्व विधायक विनोद कुमार डागा की पैसे की ताकत के बल पर टिकने पाने की लालसा का शिकार बने उन टिकट के दावेदारों द्वारा श्री डागा को एक बहुसंख्यक कुंबी समाज के लोगों के बीच में नीचा दिखाने के लिए उक्त घटना को प्रचारित एवं प्रसारित किया जा रहा है।
जेल की दहलीज तक पहुंचाने के बाद नीतिन राज माथनकर की स्वयं को इमानदार एवं अन्य पत्रकारों को सार्वजनिक रूप में ब्लैकमेलर कहने के चलते पूरा मीडिया और उससे जुड़े संगठनों ने नीतिन से अपनी दूरिया बढ़ा ली है। इधर कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद कुमार डागा एवं उनके भतीजे को लेकर सीएनबी आवाज पर काफी खबरें प्रसारित हुई है। उनके नाम कई प्रकार के गड़बड़झाले एवं घोटाले में आए गए लेकिन उस समय डागा परिवार द्वारा मानहानी का नोटिस न तो जारी किया गया और न किसी को ब्लैकमेलिंग के आरोप में पकड़वाया गया। इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस के नेताओं की आपसी लड़ाई ही सामने आ रही है।
बैतूल से रामकिशोर पंवार की रिपोर्ट.
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