सेवा में,
अध्यक्ष,
मेडिकल कौसिल ऑफ़ इंडिया,
नयी दिल्ली
विषय- कानपुर में मेडिकल कॉलेज में हुई घटना की जांच किये जाने विषयक
प्रिय महोदय,
यह कि मैं डॉ नूतन ठाकुर निवासी 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ फोन 094155-34525 एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और विभिन्न सामाजिक कार्यों से सम्बद्ध हूँ. मैं अन्य क्षेत्रों के अलावा मानव अधिकार तथा सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के क्षेत्र में भी कार्यरत हूँ
यह कि मैं आपके सम्मुख विगत दो दिनों में कानपुर में मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के सम्बन्ध में कतिपय तथ्य उद्धृत करना चाहती हूँ.
यह कि मुझे इस घटना के बारे में विभिन्न समाचारपत्रों तथा संचार माध्यमों से ज्ञात हुआ.
यह कि इस सम्बन्ध में मैंने कोई भी तथ्य उद्धृत करने के पूर्व सबसे पहले अपने स्तर पर वास्तविक तथ्य जानने की पूरी कोशिश की.
यह कि इस हेतु मुझ डॉ नूतन ठाकुर ने अपने फेसबुक पर विभिन्न साथियों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया.
यह कि इस पर मुझे ढेर सारी प्रतिक्रियाएं मिलीं और कई फोन भी आये. जिन फोन नंबर से इस घटना के विषय में फोन आये और जिनसे मेरी बात हुई वे हैं- 084002-27272, 085748-52027, 081759-00563, 098384-99636, 081277-58999 तथा 088745-88887
यह कि इनमे कोई भी मेरा विशेष पूर्व परिचित नहीं था और इनसे जो भी बात हुई वह मूल रूप से इस घटना पर ही केन्द्रित थी.
यह कि इन बातचीत से जो महत्वपूर्ण तथ्य निकल कर सामने आये वे थे-
(अ) शुरुआत में स्थानीय विधायक तथा जूनियर डॉक्टरों के बीच घटी घटना को ले कर दो तरह की बातें कहीं गयीं, जिनमे कुछ लोगों ने यह कहा कि गलती स्थानीय विधायक के पक्ष की थी जबकि अन्य लोगों ने कहा कि गलती जूनियर डॉक्टर पक्ष की थी. चूँकि दोनों तरह की बात कहने वाले लोग मिले और दोनों ने अपनी बात उतनी ही गंभीरता से कही, अतः यह बहुत आसान नहीं रहा कि इस विषय में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सके
(आ) जितने लोगों से मेरी बात हुई लगभग सभी का यह मत था कि प्रारंभिक घटना के बाद पुलिस ने रात्री में आठ-नौ बजे और पुनः करीब दो बजे मेडिकल कॉलेज जो कुछ भी किया वह मानवाधिकार की दृष्टि से सही नहीं था. यह बताया गया कि इस दौरान कई लोग इस प्रकार घायल हो गए जिसे बड़ी आसानी से बचाया जा सकता था
(इ) लगभग सभी लोगों ने कहा कि मीडियाकर्मियों, जिसमे प्रेस फोटोग्राफर भी शामिल थे, के साथ पूरी तरह अकारण मारपीट की गयी. यह भी बताया गया कि रात्रि आठ-नौ बजे और रात्री दो बजे एसएसपी की मौजूदी में घटी इन घटनाओं को निश्चित रूप से मानव अधिकारों की दृष्टि से पूर्णतया गलत कहा जाएगा
(ई) यह लगभग एक स्वर में कहा गया कि इस घटना के लिए एसएसपी श्री यादव व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने ही फ़ोर्स को उकसाया और मारपीट कराई
(ओ) लेकिन इसके साथ ही घटना के बाद डॉक्टरों द्वारा की जा रही स्ट्राइक/हड़ताल और इसके कारण मरीजों को हो रही भारी असुविधा और मौतों की भी काफी लोगों ने भारी निंदा की
(औ) कुछ लोगों ने यहाँ तक कहा कि जूनियर डॉक्टर इसके अलावा भी कई बार मरीजों और आम आदमी से अनुचित व्यवहार करते हैं
यह कि मैंने स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों को भी फोन किया. फोन नंबर 094544-00142 पर आईजी कानपुर और 094544-00211 पर डीआईजी कानपुर ने उनकी बात हुई जबकि फोन नंबर 094544-00285 पर एसएसपी तथा 0512-2304287 पर डीएम कानपुर नगर से बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी.
आईजी और डीआईजी कानपुर ने पुलिस की कार्यवाही को सही बताया और कहा कि किसी भी प्रकार का अनावश्यक बल प्रयोग नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि जूनियर डॉक्टर शुरू से इस घटना के लिए दोषी रहे हैं इस प्रक्रिया में पुलिसवाले भी घायल हुए हैं और उन्होंने ख़ास कर सीओ ट्रैफिक का नाम लिया और कहा कि उनके अलावा भी सात-आठ पुलिसवाले घायल हुए हैं.
यह कि इसके अलावा मैंने अत्यंत वरिष्ठ पत्रकारों से वार्ता की जिन्होंने नाम नहीं देने की शर्त पर पूरी बात बतायी. इन सभी पत्रकार साथियों ने भी कहा कि पुलिस ने इस अवधि में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन किया, कई लोग घायल हुए, कई लोगों के सामान तोड़ दिए गए आदि. उन्होंने साफ़ कहा कि इन घटनाओं में एसएसपी की मौजूदगी में पुलिस की पूरी गलती रही और इसमें विशेष कर एसएसपी की भूमिका रही
यह कि लेकिन इन लोगों ने भी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को पूरी तरह गलत बताया और यह कहा कि इसमें कारण आम मरीजों को होने वाली परेशानियां अक्षम्य हैं
यह कि यह समस्या सीधे आम जनता से जुडी हुई है और इसे किसी भी स्थिति में नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है
यह कि आप सहमत होंगे कि यदि पुलिस ने गलत कार्य किया है तो उसका बदला यह नहीं हो सकता कि डॉक्टर हड़ताल पर चले जाएँ और आम लोगों के साथ परेशानी हो, और मरीजों की मौत तक हो जाये
यह कि मैं अपने स्तर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस सम्बन्ध में तत्काल कार्यवाही कराये जाने हेतु पत्राचार अलग से कर रही हूँ
यह कि इसके साथ उपरोक्त सभी तथ्यों के आधार पर मैं आपसे भी निम्न निवेदन करती हूँ-
डॉक्टरों की हड़ताल के आम मरीजों और आम लोगों के मानव अधिकार हनन से जुड़े मुद्दे को समझते हुए इसका तत्काल निराकरण किये जाने के सम्बन्ध में अपने स्तर से आपको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस समस्या को समाप्त कराये जाने की कृपा करें
कृपया इस हड़ताल को तत्काल समाप्त किये जाने हेतु हर संभव कार्यवाही करने की कृपा करें
जूनियर डॉक्टर को इस सम्बन्ध में उचित निर्देश दिए जाने की कृपा करें कि वे मरीजों और आम आदमी से हमेशा ऐसा व्यवहार करें जो एक डॉक्टर के व्यक्तित्व और कृतित्व को शोभा देता है
Yours
डॉ नूतन ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमतीनगर,
लखनऊ- 226010
# 94155-34525
[email protected]
Lt No-NT/Kanpur/Med/02
Dated- 02/03/2014
सेवा में,
अध्यक्ष,
प्रेस काउन्सिल ऑफ़ इंडिया,
नयी दिल्ली
विषय- कानपुर में मेडिकल कॉलेज में हुई घटना की जांच किये जाने विषयक
प्रिय महोदय,
यह कि मैं डॉ नूतन ठाकुर निवासी 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ फोन 094155-34525 एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और विभिन्न सामाजिक कार्यों से सम्बद्ध हूँ.
मैं अन्य क्षेत्रों के अलावा मानव अधिकार तथा सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के क्षेत्र में भी कार्यरत हूँ
यह कि मैं आपके सम्मुख विगत दो दिनों में कानपुर में मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के सम्बन्ध में कतिपय तथ्य उद्धृत करना चाहती हूँ.
यह कि मुझे इस घटना के बारे में विभिन्न समाचारपत्रों तथा संचार माध्यमों से ज्ञात हुआ.
यह कि इस सम्बन्ध में मैंने कोई भी तथ्य उद्धृत करने के पूर्व सबसे पहले अपने स्तर पर वास्तविक तथ्य जानने की पूरी कोशिश की.
यह कि इस हेतु मुझ डॉ नूतन ठाकुर ने अपने फेसबुक पर विभिन्न साथियों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया.
यह कि इस पर मुझे ढेर सारी प्रतिक्रियाएं मिलीं और कई फोन भी आये. जिन फोन नंबर से इस घटना के विषय में फोन आये और जिनसे मेरी बात हुई वे हैं- 084002-27272, 085748-52027, 081759-00563, 098384-99636, 081277-58999 तथा 088745-88887
यह कि इनमे कोई भी मेरा विशेष पूर्व परिचित नहीं था और इनसे जो भी बात हुई वह मूल रूप से इस घटना पर ही केन्द्रित थी.
यह कि बातचीत के अलावा कुछ लोगों ने मुझे ऐसे साक्ष्य भी भेजे जो पुलिस कार्यवाही से जुड़े मानव अधिकार उल्लंघन को उजागर करते हैं जिन्हें मैं जांच के समय प्रस्तुत कर सकती हूँ
यह कि इन बातचीत और साक्ष्यों से से जो महत्वपूर्ण तथ्य निकल कर सामने आये वे थे-
(अ) शुरुआत में स्थानीय विधायक तथा जूनियर डॉक्टरों के बीच घटी घटना को ले कर दो तरह की बातें कहीं गयीं, जिनमे कुछ लोगों ने यह कहा कि गलती स्थानीय विधायक के पक्ष की थी जबकि अन्य लोगों ने कहा कि गलती जूनियर डॉक्टर पक्ष की थी. चूँकि दोनों तरह की बात कहने वाले लोग मिले और दोनों ने अपनी बात उतनी ही गंभीरता से कही, अतः यह बहुत आसान नहीं रहा कि इस विषय में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सके
(आ) जितने लोगों से मेरी बात हुई लगभग सभी का यह मत था कि प्रारंभिक घटना के बाद पुलिस ने रात्री में आठ-नौ बजे और पुनः करीब दो बजे मेडिकल कॉलेज जो कुछ भी किया वह मानवाधिकार की दृष्टि से सही नहीं था. उनका यह कहना था कि एक तो पुलिस भारी संख्या में थी, दुसरे वह पूरी तरह शक्ति-संपन्न स्थिति में थी, तीसरे ऐसी कोई स्थिति नहीं थी जिसमे उन्हें अनावश्यक बल-प्रयोग की आवश्यकता हो और चौथी बात यह कि इस दौरान कई निरपराध लोगों के साथ बल-प्रयोग किया गया जिसमे उम्रदराज प्रोफ़ेसर शामिल थे.
(इ) यह बताया गया कि इस दौरान कई लोग इस प्रकार घायल हो गए जिसे बड़ी आसानी से बचाया जा सकता था (ई) लगभग सभी लोगों ने कहा कि मीडियाकर्मियों, जिसमे प्रेस फोटोग्राफर भी शामिल थे, के साथ पूरी तरह अकारण मारपीट की गयी
(उ) इन लोगों ने बताया कि इस दौरान पुलिस का रवैया काफी आक्रामक था और स्वयं एसएसपी श्री यशस्वी यादव बार-बार पुलिसवालों को उकसा रहे थे और कह रहे थे कि इन डॉक्टर की पीठ तोड़ दी जाए, इन्हें ऐसा सबक सिखाया जाए कि ये जिन्दगी भर याद रखें आदि
(ऊ) यह भी कहा गया कि चूँकि स्वयं एसएसपी इन पुलिस फ़ोर्स का नेतृत्व कर रहे थे और वे खुद ही मारपीट में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे, ऐसे में पुलिसवाले भी मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन कर बुरी तरह मारपीट कर रहे थे जिस दौरान गाड़ियों से तोड़फोड़, रूम में सामान से तोड़फोड़, निरपराध लोगों को पीटना जैसी तमाम घटनाएं घटीं जिन्हें किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं कहा जाएगा
(ए) यह भी बताया गया कि रात्रि आठ-नौ बजे और रात्री दो बजे एसएसपी की मौजूदी में घटी इन घटनाओं को निश्चित रूप से मानव अधिकारों की दृष्टि से एक काला अध्याय कहा जाएगा
(ऐ) इसमें विशेष निंदनीय बात यह कही गयी कि पुलिस ही निरंतर आक्रामक रही, निरपराध लोगों को मारापीटा, उनके सामान तोड़े, उम्रदराज प्रोफेसरों को पीटा और सबसे बढ़ कर प्रेस वालों और फोटोग्राफरों को भी अकारण मारपीट, उनके कैमरे तोड़ दिए आदि-आदि
(ओ) यह लगभग एक स्वर में कहा गया कि इस घटना के लिए एसएसपी श्री यादव व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने ही फ़ोर्स को उकसाया और मारपीट कराई और इसमें मीडियाकर्मी अकारण मारपीट के शिकार बने..
यह कि मैंने स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों को भी फोन किया. फोन नंबर 094544-00142 पर आईजी कानपुर और 094544-00211 पर डीआईजी कानपुर ने उनकी बात हुई जबकि फोन नंबर 094544-00285 पर एसएसपी तथा 0512-2304287 पर डीएम कानपुर नगर से बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी.
आईजी और डीआईजी कानपुर ने पुलिस की कार्यवाही को सही बताया और कहा कि किसी भी प्रकार का अनावश्यक बल प्रयोग नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में पुलिसवाले भी घायल हुए हैं और उन्होंने ख़ास कर सीओ ट्रैफिक का नाम लिया और कहा कि उनके अलावा भी सात-आठ पुलिसवाले घायल हुए हैं.
यह कि इसके अलावा मैंने श्री वैभव शुक्ल, जो हिंदुस्तान समाचारपत्र में फोटोग्राफर हैं और जो स्वयं इस घटनाक्रम में घायल हुए हैं, को फोन नंबर 088967-64250 पर भी संपर्क किया. साथ ही कानपुर के दो अत्यंत वरिष्ठ पत्रकारों से वार्ता की जिन्होंने नाम नहीं देने की शर्त पर पूरी बात बतायी.
यह कि इन सभी पत्रकार साथियों ने भी कहा कि पुलिस ने इस अवधि में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन किया, कई लोग घायल हुए, कई लोगों के सामान तोड़ दिए गए आदि. उन्होंने साफ़ कहा कि इन घटनाओं में एसएसपी की मौजूदगी में पुलिस की पूरी गलती रही और इसमें विशेष कर एसएसपी की भूमिका रही
यह कि चूँकि इस मामले में प्राप्त सूचना के अनुसार प्रेस वालों और मीडिया कर्मियों के साथ अकारण मारपीट की गयी है, अतः इसमें आपके स्तर पर कार्यवाही किया जाना नितांत आवश्यक हो गया है. अतः इन सभी तथ्यों के आधार पर मैं आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-
(क) कृपया तत्काल इस पूरे घटनाक्रम की जांच अपने स्तर से किये जाने की कृपा करें
(ख) जिन पत्रकारों को पुलिस द्वारा किये गए मानवाधिकार उल्लंघन का शिकार बनना पड़ा है, उन्हें समुचित मुआवजा दिलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें
Yours
डॉ नूतन ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमतीनगर,
लखनऊ- 226010
# 94155-34525
[email protected]
Lt No-NT/Kanpur/Med/03
Dated- 02/03/2014
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