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कानूनी जंग जीते राजेश कपिल, कोर्ट के आदेश पर भास्‍कर ने दोबारा ज्‍वाइन कराया

जालंधर : आज से करीब 2 साल पहले भास्कर प्रबंधन की आंतरिक राजनीति का शिकार बने जालंधर के सीनियर रिपोर्टर राजेश कपिल कानूनी जंग जीत गए हैं। कोर्ट के आदेश पर राजेश कपिल को प्रबंधन ने पुन: ज्वाइन करवा लिया गया है, वहीं राजेश कपिल पर दवाब बनाने के उद्देश्य से भास्कर प्रबंधन की ओर से दर्ज करवाई गई झूठी एफआईआर को कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। कपिल की कानूनी वापसी से जहां भास्कर प्रबंधन के साजिशकर्ता सकते में हैं, वहीं कर्मचारी वर्ग में खासा उत्साह है क्योंकि सभी को अपने सेवा से जुड़े अधिकारों की पहचान हो गई है।

जालंधर : आज से करीब 2 साल पहले भास्कर प्रबंधन की आंतरिक राजनीति का शिकार बने जालंधर के सीनियर रिपोर्टर राजेश कपिल कानूनी जंग जीत गए हैं। कोर्ट के आदेश पर राजेश कपिल को प्रबंधन ने पुन: ज्वाइन करवा लिया गया है, वहीं राजेश कपिल पर दवाब बनाने के उद्देश्य से भास्कर प्रबंधन की ओर से दर्ज करवाई गई झूठी एफआईआर को कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। कपिल की कानूनी वापसी से जहां भास्कर प्रबंधन के साजिशकर्ता सकते में हैं, वहीं कर्मचारी वर्ग में खासा उत्साह है क्योंकि सभी को अपने सेवा से जुड़े अधिकारों की पहचान हो गई है।

वर्तमान में राजेश कपिल की ओर से भास्कर प्रबंधन के खिलाफ दायर दर्जन भर सिविल व क्रिमिनल मामले कोर्ट में लंबित हैं, जिसमें एम.डी से लेकर ब्यूरो चीफ तक कानूनी लपेटे में हैं। इसके अलावा झूठी एफआईआर दर्ज करवाने के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 सहित 499, 500, 211 व 120 बी की कार्रवाई करने का विकल्प भी कपिल के पास खुला है। गौरतलब है कि मई 2010 में भास्कर प्रबंधन ने एकाएक राजेश कपिल की सेवा समाप्त कर दी थी, जिसके विरोध में कपिल ने प्रबंधन को मांग पत्र व मानहानि का नोटिस जारी कर दिया था। मानहानि का नोटिस व मांग पत्र मिलने पर पहले ही जोश में होश खोकर काम कर रहे प्रबंधन ने अपने ही अखबार में कपिल की सेवा समाप्ति का नोटिस प्रकाशित कर दिया और पुलिस में एक झूठी शिकायत कर दी। पुलिस ने जांच के दौरान कपिल को क्लीनचिट दे दी और अखबार में नोटिस प्रकाशित करने के बाद प्रबंधन ने वकील की सलाह ली और गैर-कानूनी ढंग से जारी सेवा समाप्ति का आदेश वापस लेते हुए कपिल को काम पर वापस लौटने का आदेश दिया था।

उधर, कपिल तब तक उठे कदमों से काफी हतप्रभ हो चुके थे और कानूनी जंग लडऩे का मन बना चुके थे। चूंकि वह खुद पिछले 10 साल से कोर्ट की रिपोर्टिंग करते आ रहे थे और हर दावपेंच से भली-भांति परिचित थे इसलिए भास्कर प्रबंधन के साजिशकर्ताओं का मुंह तोड जवाब देने व एम.डी. तक आवाज पहुंचाने के लिए कपिल ने न केवल मानहानि का दावा किया बल्कि कोर्ट में दर्जन भर सिविल व क्रिमिनल केस दायर कर दिए। इससे घबराए साजिशकर्ताओं ने दवाब बनाने के लिए कपिल पर पंजाब सरकार का सहारा लेकर धारा 452 व 506 के तहत झूठा मामला दर्ज करवा दिया, जिसे कोर्ट ने सुनवाई के पहले दौर पर ही खारिज कर दिया। अपनी कानूनी जंग के दौरान राजेश कपिल ने सूचना अधिकार कानून का सहारा लेकर साजिशकर्ताओं के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए हैं जिस पर जल्द ही कोर्ट एफआईआर दर्ज करवाने जा रही है।

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