नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने 1999 में हुई मॉडल जेसिका लाल की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मनु शर्मा को पांच दिन के पैरोल पर रिहा करने का आग्रह बुधवार को स्वीकार कर लिया। अदालत ने उसे इस शर्त के साथ पैरोल प्रदान किया है कि वह इस दौरान नाइट क्लबों और डिस्कोथेक नहीं जाएगा।
छोटे भाई कार्तिक शर्मा, जो आज समाज अखबार, इंडिया न्यूज मैग्जीन और इंडिया न्यूज चैनल के मालिक भी हैं, की शादी में शामिल होने के मनु शर्मा के आग्रह को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति वीके शालि ने उसे 21 नवम्बर से 25 नवम्बर तक अस्थाई राहत प्रदान की। न्यायमूर्ति शालि ने कहा ‘याचिकाकर्ता को पांच दिन के पैरोल पर छोड़ने की अनुमति दी जाती है लेकिन वह किसी नाइट क्लब या डिस्कोथेक में नहीं जाएगा।’
उन्होंने शर्मा को निर्देश दिया कि वह अपनी पैरोल अवधि समाप्त होते ही तिहाड़ जेल के अधीक्षक के समक्ष समर्पण कर दे। अदालत ने चंडीगढ़, करनाल और अंबाला तक पैरोल की पुष्टि की और शर्मा से कहा कि वह इन तीनों स्थानों के रिहायशी पते जेल अधीक्षक को उपलब्ध कराए। अदालत ने उसे जेल अधीक्षक के समक्ष 50 हजार रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया। प्रभावशाली कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने अपने भाई की शादी और उससे संबंधित कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए पैरोल मांगा था। वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने इससे पूर्व अदालत के समक्ष शादी से संबंधित कार्यक्रमों का ब्यौरा रखा जिसमें शादी से पहले चंडीगढ़ में 21 नवम्बर को ‘महिला संगीत’ और करनाल में 22 नवम्बर को शादी और अंबाला में 24 नवम्बर को रिसेप्शन शामिल है।
कोर्ट के आदेश से जाहिर है कि मनु शर्मा अपने छोटे भाई कार्तिक शर्मा की शादी में तो डांस कर सकेंगे लेकिन अगर डिस्कोथेक और नाइट क्लब में जाकर नाचे तो उनका पैरोल रद कर उन्हें फिर से जेल भेज दिया जाएगा। कोर्ट द्वारा उसे नाइट क्लब्स और डिस्कोथेक्स में जाने से मना करने का कारण है मनु शर्मा को मिले पिछले पैरोल के दौरान घटी घटनाएं। इससे पहले मनु शर्मा को 2009 में 30 दिनों का पैरोल इस आधार पर दिया गया था कि शर्मा को अपनी बीमार मां को देखने की जरुरत है,दादी की अंतिम क्रिया में भाग लेने और अपने पारिवारिक व्यापर को देखने की जरुरत है,जो शर्मा के अनुपस्थिति में नुकसान में चल रहा है। लेकिन शर्मा के पैरोल का आधार उस वक़्त निराधार साबित हुआ जब यह पता चला कि उसकी दादी की मृत्यु 2008 में ही हो चुकी थी।
इसके बाद भी शर्मा के पैरोल को 30 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया। इस दौरान शर्मा को दिल्ली के एक डिस्कोथेक में पार्टी करते हुए देखा गया। उसी समय शर्मा की मां,जिनकी बीमारी को आधार बना कर शर्मा के पैरोल मिला था,को चंडीगढ़ में अपने परिवार द्वारा संचालित एक होटल में महिला क्रिकेट टूर्नामेंट को बढ़ावा देने के लिए बुलाए गए पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पाया गया।
पैरोल के दौरान ही शर्मा दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त वाई एस डडवाल के बेटे के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगा। मनु शर्मा के पैरोल मानदंडों का उल्लंघन को लेकर जनता ने खासा हंगामा किया जिसके बाद दिल्ली सरकार ने उसके पैरोल को रद्द कर दिया। इस पूरे मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को विपक्ष समेत मीडिया और जनता के भारी आलोचना का सामना कर पड़ा। दिल्ली सरकार ने भी शीला सरकार को मनु शर्मा को पैरोल दिए जाने पर फटकार लगाई। शीला पर आरोप लगे कि उन्हें मनु शर्मा के पिता और कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के राजनीतिक रसूख के कारण मनु को पैरोल देने के लिए दिल्ली पुलिस को लिखा। हालांकि शीला दीक्षित ने इसे गलत बताया और कहा कि मनु शर्मा के पैरोल को बढ़ाने को किसी भी तरह से अवैध या गैरकानूनी कदम नहीं था। गौरतलब है कि मनु शर्मा के पिता विनोद शर्मा कांग्रेस के एक प्रभाशाली नेता होने के साथ ही बहुत बड़े व्यापारी भी है। मनु के चाचा पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के दामाद हैं।
इनपुट- जी न्यूज और दैनिक भास्कर





