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सुख-दुख...

किसी के सामने कभी नहीं झुका वह गायक

: उसने गंगा के बहने पर भी सवाल उठाया था : ब्रह्मपुत्र के गायक भूपेन हजारिका नहीं रहे. अब दिल हूम हूम भी नहीं करेगा और गंगा के बहने पर जनवादी सवाल भी नहीं पूछे जायेंगे. भूपेन दा महान गायक तो थे ही, वे एक जनपक्षधर कवि भी थे, संगीत के रचयिता थे और एक बहुत ही मज़बूत और बुलंद आवाज़ के मालिक थे. उनके जाने के बाद असम, कोलकाता और ढाका में तो मातम है ही, बाकी दुनिया में भूपेन के चाहने वालों के चहेरों पर मायूसी की खबरें आ रही हैं.

: उसने गंगा के बहने पर भी सवाल उठाया था : ब्रह्मपुत्र के गायक भूपेन हजारिका नहीं रहे. अब दिल हूम हूम भी नहीं करेगा और गंगा के बहने पर जनवादी सवाल भी नहीं पूछे जायेंगे. भूपेन दा महान गायक तो थे ही, वे एक जनपक्षधर कवि भी थे, संगीत के रचयिता थे और एक बहुत ही मज़बूत और बुलंद आवाज़ के मालिक थे. उनके जाने के बाद असम, कोलकाता और ढाका में तो मातम है ही, बाकी दुनिया में भूपेन के चाहने वालों के चहेरों पर मायूसी की खबरें आ रही हैं.

भूपेन ने बहुत उच्च कोटि की शिक्षा पायी थी. शुरुआती पढाई गुवाहाटी में करने के बाद वे बीएचयू चले आये थे जहां से उन्होंने बीए और एमए पास किया. १९४६ में एमए करने के बाद वे अमरीका के विख्यात कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए थे, जहां उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पीएचडी किया. भूपेन हजारिका ने उसके बाद भी पढाई की. उन्होंने पीएचडी के बाद शिकागो विश्वविद्यालय से सिनेमा के शिक्षा में इस्तेमाल पर पोस्ट डाक्टोरल अध्ययन किया. बताया जाता है कि मास कम्युनिकेशन में पीएचडी करने वाले भूपेन पहले एशियन थे.

अमरीका में भूपेन हजारिका की मुलाकात पॉल राबसन से हुई थी. पॉल राबसन की हैसियत दुनिया के क्रांतिकारी गायकों में सबसे ऊंची है. यह अमरीका में वह दौर था जब काले लोगों को अमरीकी लोकतंत्र में वोट देने तक के अधिकार नहीं थे. उस दौर में पॉल का "ओल्ड मैन रिवर" मानवीय अधिकारों के संघर्ष का प्रतीक गीत बन चुका था. हर जुलूस में लाठी गोली खाने वाले दलित और अश्वेत अधिकारों के दीवाने उस गीत को ज़रूर गाते थे.  उसी गीत की प्रेरणा से भूपेन ने "गंगा बहती हो क्यों" लिखा था और अधिकारों की लड़ाई के लिए जहां भी संघर्ष हुआ वहां गंगा वाला भूपेन का गीत  ज़रूर सुना गया. १९३० से भूपेन ने गाना शुरू किया और पूरी सदी वे आम आदमी के गीत गाते रहे. बहुत सारी असमिया फिल्मों के लिए उन्होंने संगीत और गीत लिखा और गाया.

अपनी जीवन भर की  दोस्त कल्पना लाजमी के साथ मिलकर उन्होंने हिन्दी फिल्मों रुदाली, एक पल, दरमियान आदि का संगीत लिखा. एमएफ हुसैन की फिल्म गजगामिनी का संगीत भी भूपेन दा का ही था. भूपेन बाएं बाजू के महान बुद्धिजीवी थे. बलराज साहनी और अनिल चौधरी के दोस्त थे. उनको मिले हुए सम्मानों को गिनाने का कोई मतलब नहीं है. उनको हर वह सम्मान मिल था जो किसी भी संगीतकार को मिलना चाहिए. सरकारी पदों से बचने के चक्कर में रहने वाले भूपेन दा ने २००३ में प्रसार भारती बोर्ड का सदस्य होना स्वीकार कर लिया था. हमें उनकी याद हमेशा रहेगी.

ये है …ओ गंगा बहती हो क्यूं…

ओ गंगा बहती हो क्यूं?

डॉ. भूपेन हजारिका

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम
ओ गंगा बहती हो क्यों?

नैतिकता नष्ट हुई
मानवता भ्रष्ट हुआ
निर्लज्य भाव से
बहती हो क्यों?

अनपढ़ जन
खाद्य विहीन,
नेत्र विहीन देख
मौन हो क्यों?

इतिहास की पुकार
करें हुंकार
ओ गंगा की धार
निर्वल जन को
सकल संग्रामी
समग्रगामी
बनाती नहीं हो क्यों ?

व्यक्ति रहे
व्यक्ति केन्द्रित
सकल समाज
व्यक्तित्व रहित
निष्प्राण समाज
नहीं तोड़ती हो क्यों?

स्त्रोतस्विनी तुम न रही
तुम निश्चय चेतना नहीं
प्राणों से प्रेरणा बनती न क्यों?


इस गीत को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें- ओ गंगा एमपी3

इस व अन्य गीतों को सुनने के लिए यहां क्लिक करें– भूपेन दा गीत

शेष नारायण सिंह की रिपोर्ट.


(सुनें)

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