: पत्रकारिता की आड़ में धंधे कैसे-कैसे… सुनिए देश के जाने-माने फोटोग्राफर बिजेंदर त्यागी की जुबानी : 1. नई दिल्ली के आईएनएस भवन के एक कमरे में चर्चा चल रही थी कि एक अखबार का मालिक अपनी बेटी को लेकर केरल चला गया है क्योंकि उसकी बेटी को एक पत्रकार तत्कालीन कृषि मंत्री बलराम जाखड़ के शयन कक्ष में लेकर जाता था. इस बात की सूचना मालिक के विश्वासपात्र ड्राइवर ने ही मालिक को दी थी. पत्रकार का नाम सुनील डांग था और लड़की ले जाने के एवज में मंत्री ने उसके साप्ताहिक समाचारपत्र को छपवाने का ज़िम्मा ले रखा है.
सुनील डांग ने इसी कृषि मंत्री के कार्यकाल में एक राजनीतिक और आर्थिक अखबार निकालना शुरू किया था. बाद में सुनील डांग अन्य मंत्रियों के भी करीब आ गया परन्तु कृषि मंत्री बलराम जाखड के हट जाने के बाद उसने अपना अखबार बंद कर दिया. बलराम जाखड राज्यपाल बन गए थे और दिल्ली से राज्य की दूरी ज्यादा थी. मंत्री सुनील डांग को अपना बेटा बताता था इसलिए मंत्रालय में उसकी धाक थी.
2. पीवी नरसिम्हा राव के प्रधान मंत्री के कार्यकाल में एक महिला पत्रकार कल्याणी शंकर और एसएम आसिफ नाम का एक तथाकथित पत्रकार जो 'इन दिनों', 'दीज़ डेज़' नाम के कई अखबार निकालते थे, बहुत ताक़तवर हो गए थे. वह तरह-तरह के मुस्लिम नेताओं की बैठक कराते थे. कुछ दाढी वाले मुसलमानों को बैठाकर बैठकें कराता और सरकारी रेडियो और टेलीविज़न पर उसकी खबरें आतीं. उसके कार्यक्रमों के उदघाटन उस दौर के मंत्री लोग किया करते थे. इस कथित पत्रकार की एक राजनीतिक पार्टी भी है. पीवी नरसिंहरा राव की सरकार अल्पमत थी इसीलिये उन्हें भी लोगों को दिखाने के लिए दाढी वाले मुसलमानों की आवश्यकता थी. इस कथित पत्रकार का बयान आता कि इस एसएम आसिफ की पार्टी ने भी पीवी नरसिम्हा राव का समर्थन कर दिया है. किसी को पता नहीं होता था कि मीटिंग करने वाले सांसद हैं कि नहीं. वह जानकारी तो इस एसएम आसिफ और नरसिम्हा राव के पास ही होती थी.
महिला पत्रकार कल्याणी शंकर यूएनआई नाम की समाचार एजेंसी में काम करती थीं. उसके बाद वह अंग्रेज़ी हिन्दुस्तान टाइम्स की पत्रकार बन गयी थीं. वह दिल्ली में आरके पुरम इलाके में संगम सिनेमा के पास एक अपार्टमेन्ट में रहती थीं. यह बात अलग है कि हिन्दुस्तान टाइम्स में नौकरी राजनेताओं के कहने से मिलती थी. उसी अपार्टमेन्ट में कल्याणी शंकर के आस पास ही नरसिम्हा राव के एक पुत्र प्रभाकर राव का भी फ़्लैट था. कल्याणी शंकर को उन्हीं दिनों हिन्दुस्तान टाइम्स के पत्रकार के रूप में अमरीका भेज दिया गया था. उनकी बेटी को विश्व बैंक में एशियन डेस्क पर एक अधिकारी के रूप में नौकरी मिल गयी थी. हम उस विवाद में नहीं पड़ेंगे कि नौकरी किसने दिलाई, कैसे दिलाई. यह तो कल्याणी शंकर, विश्व बैंक और नरसिम्हा राव जानें. हम तो चर्चित लोगों की चर्चा कर रहे हैं. हमारा मकसद किसी पर उंगली उठाना या किसी के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाना नहीं है. कुछ लोग कहते हैं कि इज्ज़त आबरू तो आनी जानी चीज़ है, जब पैसा होगा इज्ज़त आबरू अपने आप बढ़ जायेगी.
3. एक दौर में शास्त्री भवन के प्रेस लाउंज में पीआईबी के बड़े अधिकारी आकर बैठने लगे. वे वहां पर बैठने वाले पत्रकारों पर नज़र रखने के लिए आते थे. उन्हें शिकायत मिली थी कि कुछ पत्रकार अपने साथ कुछ चरित्रहीन महिलाओं को लाते हैं जिन्हें वे अपना काम निकलवाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों और बड़े अफसरों के पास ले जाते हैं .जब लोगों में में इस बात की चर्चा फैलने लगी तो पता चला कि एक लंबा अधेड़ पत्रकार जो शायद असम एक्सप्रेस से मान्यताप्राप्त था ,वह यह काम करता था. जिसके कारण सभी पत्रकार बदनाम हो रहे थे. थोड़े दिनों बाद देव प्रकाश नाम के उस पत्रकार ने प्रेस लाउंज में आना छोड़ दिया.
देव प्रकाश का निशाना अब संसद का सेन्ट्रल हाल बन गया था क्योंकि उसने अपनी वाक्पटुता से राज्य सभा की तत्कालीन उप सभापति नजमा हेपतुल्ला को फांस लिया था .उसे सेन्ट्रल हाल का पास मिल गया था. वहां भी चर्चा होने लगी कि कैसे देव प्रकाश लड़कियों को लेकर उन्हें रोज़गार दिलाने का झांसा देकर संसद में लाता था .मज़े की बात यह है कि उसे संसद के गेट पर कोई भी सुरक्षा कर्मी लडकियां लाने से नहीं रोकता था. .संसद के सुरक्षा कर्मी भी तो इंसान हैं , उन्हें अंदर से जैसा आदेश मिलेगा ,वही करेगें.मैंने स्वयं देखा है कि कई बड़े व्यापारी बिना पास के संसद के अंदर जाते थे.पूछने पर पता चला कि इन लोगों के लिए मंत्री जी का आदेश है कि जब भी यह आयें इन्हें रोका न जाए. संसद का सुरक्षा कवच तो संसद पर हुए हमले के बाद बढ़ाया गया .लेकिन इसके बावजूद भी कैश फार वोट वाले मामले कुछ सांसदों ने नोटों के बण्डल लोकसभा तक पंहुचा दिए थे.
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लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले

विजेंदर त्यागी





