आगरा: सेवा में संपादक जी आप को एक मेल भेज रहा हूँ. मैं चाहूँगा कि आप उसे अपने पोर्टल पर अवश्य प्रकाशित करें. पंजाब केसरी, दिल्ली और बाजारू लोगों की इमेज में कोई ज्यादा फर्क नहीं है. यही कारण हैं कि आयेदिन पंजाब केसरी के ब्यूरो आगरा में बदल दिए जाते हैं. हालात यह हैं कि जिस तरह से पैसे के बल पर कुछ लोग कोई काम करने को तैयार हो जाते हैं ठीक उसी तरह से पंजाब केसरी, दिल्ली भी चंद रुपयों की खातिर आगरा का ब्यूरो किसी को भी बना देता हैं, फिर चांहे वह पत्रकारिता से जुड़ा हो या नहीं.
अभी हाल में ही पंजाब केसरी, दिल्ली ने सुधीर भारद्वाज को अपना आगरा ब्यूरो बनाया हैं, जिसका पत्रकारिता से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं हैं. वर्तमान में आगरा ऑफिस की स्थिति यह हैं कि वह सुधीर भारद्वाज का ऑफिस हैं इसलिए वहां कई काम हो रहे हैं. आए दिन गलत कामों का अड्डा बन गया है पंजाब केसरी का आगरा आफिस. ऐसा भी नहीं है कि इससे पंजाब केसरी दिल्ली के शीर्ष स्तर के अधिकारी व स्वयं अश्वनी कुमार चोपड़ा नहीं जानते, लेकिन वह भी सब जानकार अनजान बने हुए हैं, क्योंकि बड़ा-बड़ा लेख प्रतिदिन पहले पन्ने पर लिखने वाले श्री अश्वनी कुमार चोपड़ा अपने ब्यूरो के लिए कुछ भी खर्चा नहीं देते हैं. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में पंजाब केसरी, दिल्ली के अधिकांश ब्यूरो पत्रकारिता के अलावा दूसरे कामों में व्यस्त हैं. यहां पत्रकारिता के पेशे को बदनाम करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाती है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






