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कुमार्ग के राह पर रांची सन्मार्ग, तीन माह का वेतन बकाया

 

सन्मार्ग, रांची के कर्मियों का वेतन बकाया फिर तीन माह का हो गया है. जुलाई में अप्रैल माह का भुगतान करते वक़्त डाइरेक्टर प्रेम ने एक सप्ताह के अन्दर एक माह का और भुगतान करने का आश्वासन दिया था लेकिन फिर इसकी कोई सुगबुगाहट नहीं हुई. काफी मान-मंनौवल के बाद पुनर्वापसी के कारण सम्पादक बैजनाथ मिश्र प्रबंधन के प्रति कटु वचन बोलने में संकोच नहीं कर रहे और वेतन रोकने की प्रवृति की खुलेआम निंदा कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर प्रेम से सीधे दो टूक बात करने से हिचक रहे हैं. 

 

सन्मार्ग, रांची के कर्मियों का वेतन बकाया फिर तीन माह का हो गया है. जुलाई में अप्रैल माह का भुगतान करते वक़्त डाइरेक्टर प्रेम ने एक सप्ताह के अन्दर एक माह का और भुगतान करने का आश्वासन दिया था लेकिन फिर इसकी कोई सुगबुगाहट नहीं हुई. काफी मान-मंनौवल के बाद पुनर्वापसी के कारण सम्पादक बैजनाथ मिश्र प्रबंधन के प्रति कटु वचन बोलने में संकोच नहीं कर रहे और वेतन रोकने की प्रवृति की खुलेआम निंदा कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर प्रेम से सीधे दो टूक बात करने से हिचक रहे हैं. 
 
मॉर्निंग इंडिया के प्रभारी विष्णु राजगढ़िया प्रेम के गुड बुक में आने के लिए औरों की शिकायत से लेकर हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. लेकिन उन्हें पता नहीं कि उनकी तमाम बातें न सिर्फ टेप की जा रही हैं बल्कि सम्बंधित लोगों को सुनाई भी जा रही हैं. तमाम चाटुकारिता के बावजूद राजगढ़िया साहब और मॉर्निंग इंडिया की उनकी टीम के लोगों का वेतन भी दो माह से रुका हुआ है. ज्वाइनिंग के बाद उन्हें एक पैसे का भी दर्शन नहीं हुआ है. वेतन बकाया होने का कारण वित्तीय संकट नहीं बल्कि प्रबंधन की प्रवृति है. संस्थान के पास विज्ञापन का पैसा आ रहा है. लाभ हो रहा है. किसी खर्च में कटौती नहीं की जा रही है. 
 
हिंदी और उर्दू के बाद अंग्रेजी अखबार भी छपना शुरू हो चुका है. जानकार लोगों का कहना है कि डाइरेक्टर प्रेम लगातार कर्मियों की छंटनी करते जा रहे हैं और वेतन रोककर अन्य लोगों को भी संस्थान छोड़ने को विवश करना चाहते हैं, ताकि छोटी सी टीम के जरिये फ़ाइल कॉपी छापें और सरकारी विज्ञापनों के जरिये ऐश करें. ज्यादा छापने और बाजार में भेजने में उन्हें कोई लाभ नहीं दिख रहा है. जब सौ-दो सौ अखबार छापकर लाखों के विज्ञापन लुटे जा सकते हैं तो ज्यादा छापने से क्या लाभ. संपादकों को बार-बार बदलने के पीछे भी यही मानसिकता है. कर्मियों के अन्दर आक्रोश बढ़ता जा रहा है लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है. ऐसी चर्चा है कि प्रेम माडिया के प्रति कोई खुन्नस निकाल रहे हैं.
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