कुरुक्षेत्र के एसपी राकेश आर्य और पत्रकारों में छतीस का आंकड़ा जगजाहिर है. जब वे करनाल में रहे तो वहां भी पत्रकारों से सींग भिड़ाये रहे और पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए. अब कुरुक्षेत्र में भी एसपी साहिब और पत्रकारों के बीच महाभारत हो रही है. बिहार के एक नवयुवक कौशल (उम्र पन्द्रह साल) की शिकायत पर ट्रिब्यून के कुरुक्षेत्र में नियुक्त युवा पत्रकार शेखर सिंह के खिलाफ मामूली से कागज के टुकड़े पर लिखी दरखास्त पर ही आईपीसी की दफा 377 /506 /511 के तहत मामला दर्ज कर शेखर की गिरफ़्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी गई है.
इससे पहले शेखर ने तीन दिन पहले एसपी साहिब को ग़ुम किए गए छयालीस हजार रुपयों की चोरी के बारे लिखित शिकायत दी थी. उस शिकायत का तो कुछ नहीं बना. लगभग बीस पत्रकार प्रेस क्लब संरक्षक विनोद जिंदल प्रधान विनोद महला की अध्यक्षता में इकट्ठा हुए और एसपी को मिलकर गुहार लगायी कि मामला झूठा है, शेखर को बख्श दो.
लेकिन एसपी साहिब टस से मस नहीं हुए. बोले- मामला जूठा है तो शिकायतकर्ता का शपथ पत्र लाओ. जानते हैं कि न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी. अगर शिकायतकर्ता शपथ पत्र देगा तो उसके खिलाफ पुलिस झूठी सूचना देने के आरोप में मामला बना देगी. फिलहाल शेखर पर इतना दबाव है कि उसे पुलिस से बचने के लिए अंडरग्राउंड रहना पड़ रहा है. वैसे भी भी आज पत्रकारिता बनिए की नौकरी रह गयी है, वरना अगर सभी पत्रकार एकजुट हैं, सच्चे साफ़ सुथरे हैं तो क्यों नहीं खोले देते एसपी के खिलाफ मोर्चा.





