कहते हैं कि हजारों शब्द जो बातें नहीं कह पाते उसे कार्टून मात्र थोड़ी सी बातों में ही कह जाता है. आडवाणी की नाराजगी भी गलत नहीं है. बेचारे आडवाणी 1990 से पीएम की कुर्सी पर बैठने की तैयारी कर रहे हैं. एक बार मौका मिला तो अटल जी बैठ लिए और दुबारा मौका मिलने की आस लगाए आडवाणी पर नरेंद्र मोदी भारी पड़ गए.







