लेखिकाओं को गाली देने के मामले में माफी मांगकर जैसे तैसे अपना पद बचाने वाले हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति, विभूति राय अब मुश्किल में फंस सकते हैं. इस बार विभूति सहित विश्वविद्यालय के चार अधिकारियों पर फर्जी माइग्रेशन जारी करने, उसे अपने पजेशन में रखने के इल्जाम में धारा ४२०, ४६८ , १२० (बी) के तहत एफ.आई.आर दर्ज करने का आदेश दिया है. कल, 2 अप्रैल 2012 को वर्धा के जिला न्यायालय के सी.जी.एम कोर्ट (जस्टिस डी.एच शर्मा) ने हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति राय सहित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कैलाश खामरे, डी. आर. अकादमिक कादर नवाज खान और परीक्षा प्रभारी के.के.त्रिपाठी पर मुकदमा दायर करने का आदेश पुलिस को दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आवेदन कर्ता राजीव सुमन के आवेदन में बताये गये तथ्यों के आधार पर कोई कारण नहीं बनता है कि राय और अन्य पर एफ.आई.आर दर्ज करने का आदेश न पारित किया जाय.
राजीव सुमन, जो कि उस विश्वविद्यालय से पी. एच.डी कर रहे हैं, ने जनवरी 10, 2012 को वर्धा के सेवग्राम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि राय और अन्य चार ने उन्हें फर्जी माइग्रेशन जारी किया, उस पर विश्वविद्यलय में नामांकन दिया. उक्त विवादित माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर कुलसचिव कैलाश खामरे का हस्ताक्षर है. सुमन ने अपनी शिकायत में कहा है कि राय ने अपने चैंबर में परीक्षा प्रभारी कौशल त्रिपाठी के द्वारा उसे और एक पूर्व छात्र संजीव चन्दन को १८ अप्रैल २०१२ को (१५ अप्रैल २०१२ को हस्ताक्षरित) माग्रेशन दिलवाया, जो कि जाली है. इसी जाली सर्टिफिकेट को कुलसचिव अकादमिक कादर नवाज खान ने अपने पास पूरी जानकारी में रखा, इस तरह चारों ने मिलकर साजिश की, जाली सर्टिफिकेट बनाया .
सुमन ने जब यह मामला पिछले नवम्बर में विश्वविद्यालय में उठाया और जांच की मांग की थी तो उन्हें पी.एच.डी दे निलंबित कर दिया गया था. पूर्व छात्र संजीव चन्दन ने फर्जी माइग्रेशन का मुद्दा उठाया. २ जनवरी, २०१२ को राष्ट्रपति से इस प्रसंग में जांच की मांग की तो पुलिसिया सेवा के शीर्ष पर रहे कुलपति राय ने ४ जनवरी को संजीव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था. पिछले 22 मार्च को मुम्बइ उच्च न्यायालय के नागपुर खंड पीठ ने संजीव को अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था. संजीव फिलहाल उच्च्तम न्यायालय से अग्रिम जमानत लेने के लिए प्रयासरत हैन.
संजीव और राजीव ने राय के द्वारा फर्जी नियुक्तियों, अवैध डिग्री और माइग्रेशन , आर्थिक घोटाले आदि की उच्च स्तरीय जांच की मांग के साथ मुहिम चला रखी है. प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री सहित देश की कई संस्थाओं को इन्होंने पत्रों के माध्यम से राय के तथाकथित गैर कानूनी कारवाईयों और घोटालों के खिलाफ जानकारी दी है. राजीव ने आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद कुलपति राय को पदमुक्त कर विश्वविद्यालय में की गई अवैध नियुक्तियों, फर्जी डिग्री और माइग्रेशन के मामले में तथा आर्थिक घोटालों पर जांच बैठाने की मांग मानव संसाधन विकासमंत्री कपिल सिब्बल और राष्ट्रपति से की है.





