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केंद्र सरकार और इंडियन एक्सप्रेस की यह जुगलबंदी कार्पोरेट के प्रभाव और दबाव की मिसाल है

Mukesh Kumar : इंडियन एक्सप्रेस वैसे तो मेरे पसंदीदा अख़बारों में से है, मगर उसकी कार्पोरेट भक्ति देखकर लगता है कि वह उनका परचा बनकर रह गया है। इन दिनों वह जयंती नटराजन के पीछे पड़ा हुआ है।

Mukesh Kumar : इंडियन एक्सप्रेस वैसे तो मेरे पसंदीदा अख़बारों में से है, मगर उसकी कार्पोरेट भक्ति देखकर लगता है कि वह उनका परचा बनकर रह गया है। इन दिनों वह जयंती नटराजन के पीछे पड़ा हुआ है।

वजह, क्योंकि उन्होंने बहुत से कंपनियों के प्रोजेक्ट को पर्यावरण संबंधी समस्याओं की वजह से मंज़ूरी नहीं दी थी। इसी वजह से वह वीरप्पा मोइली की वाह वाह करने में भी लगा हुआ है। सरकार और एक्सप्रेस की ये जुगलबंदी कार्पोरेट के प्रभाव और दबाव की मिसाल है।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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